फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Pakistan ›   wusutullah khan's blog on pakistan

गर तेंदुलकर संसद पर चढ़ाई कर दें...

Tue, 02 Sep 2014 11:51 AM IST
वुसतुल्लाह खान/बीबीसी संवाददाता, पाकिस्तान
वुसतुल्लाह खान/बीबीसी संवाददाता, पाकिस्तान Updated Tue, 02 Sep 2014 11:51 AM IST
विज्ञापन
wusutullah khan's blog on pakistan

पिछले एक पखवाड़े से भी अधिक समय से पाकिस्तानी राजनीतिक उथल पुथल के दौर से गुजर रही है। इस पर पढ़िए वुसुतुल्लाह खान का ब्लॉग। इमरान खान और ताहिरुल कादरी नवाज शरीफ के इस्तीफे से कम पर मानने को राजी नहीं हैं।

विज्ञापन


उधर, ख़ान और कादरी समर्थक पत्थर-डंडे और गैस मास्क पहनकर प्रधानमंत्री आवास की ओर कूच कर रहे हैं और सुरक्षा बलों के साथ उनकी झड़पें हो रही हैं।

इन हालात में दिल्ली में बैठा कोई शख्स क्या महसूस कर रहा होगा ? अपने अनोखे अंदाज में वुसतुल्लाह खान का ब्लॉग..

कभी कभी ऐसे दिन भी आते हैं जब न कुछ सोचा जाता है न लिखा जाता है, बस दिल चाहता है कि आदमी अकेला बैठा रहे। बात करना भी मेहनत करने जैसा लगता है।

इस वक्त मेरा यही हाल है। कल शाम से टीवी बंद कर दिया है, लेकिन दिल चाहता है कि इस टीवी को भी खिड़की से बाहर फेंक दें।

मेरी तकलीफ समझनी है तो जरा देर के लिए आंखें बंद कर लें और तसव्वुर कर लें कि कोई एनआरआई आचार्यजी दिल्ली के इंदिरा गांधी एयरपोर्ट पर उतरते ही ऐलान कर दें कि लोकतंत्र तो एक फ्रॉड है और उसके नाम पर पिछले छह दशक से जनता पर जुल्म किया जा रहा है।

विज्ञापन

आचार्याजी और तेंदुलकर

wusutullah khan's blog on pakistan

'अगर लोकतंत्र ये है कि हर वर्ष हजारों किसान आत्महत्या कर लें, अगर लोकतंत्र ये है कि एक गरीब आदमी को किसी गुंडे से अपना मकान वापिस लेने के लिए दस-दस साल अदालत के सामने नाक रगड़नी पड़े, मृत्यु प्रमाणपत्र भी लेने के लिए क्लर्क को घूस देनी पड़े, अगर किसी पुलिस ऑफिसर को अपनी ही पेंशन लेने के लिए चपरासी से लेकर ऊपर तक हरेक के सामने घिघियाना पड़े तो लानत है ऐसे लोकतंत्र पर..'

'मैं नहीं मानता ऐसी संसद को, सबको लपेट दो।'

जिस समय आचार्यजी ऐलान कर दें कि ऐसे लोकतंत्र का तख्ता पलट करने के लिए वो आगरा से दिल्ली तक दस लाख लोगों के साथ क्रांति मार्च करेंगे, उसी समय यदि कोई सचिन तेंदुलकर ये ऐलान कर दे कि मोदी सरकार धांधली की उपज है, जिसने जनता का वोट चुराया है। इसलिए मेरे हजारों सहयोगी तब तक संसद नहीं चलने देंगे जबतक कि मोदी सरकार इस्तीफा नहीं देती?

और फिर आचार्यजी और सचिन तेंदुलकर एक दूसरे के आगे पीछे नई दिल्ली में दाखिल हों और संसद को घेर कर धरना दे दें और विपक्ष समेत किसी की भी बात सुनने से इनकार कर दें।

जब मोदी को जाए फौज की जरूरत

wusutullah khan's blog on pakistan

और जब सत्रह दिन के धरने के बाद भी मोदी सरकार, प्रधान न्यायाधीश और चुनाव आयुक्त त्यागपत्र न दें तो अचानक ये हज़ारों विरोधी हेलमेट पहन, मुंह पर गैस मास्क लगा, डंडे-गुलेलें और मिर्च स्प्रे हाथों में उठा, पत्थरों से भरे बैग कंधों से लटका, राष्ट्रपति भवन और प्रधानमंत्री निवास की ओर दौड़ पड़ें और उनकी दीवारें या दरवाजे साथ लाई हुईं क्रेन से तोड़ दें।

पुलिस और अर्द्ध सैनिक बलों से उनकी आंख मिचौली चलती रहे और अर्थव्यवस्था इतनी बिगड़ जाए कि मोदी सरकार को फौज की मदद मांगनी पड़ जाए।

और फिर सेनापति ये कह दें कि फ़ौज तो न्यूट्रल है, सरकार और बलवाई अपना झगड़ा खुद ही निपटाएं।

ये सब टीवी की स्क्रीन देखकर और सुनकर आपको कैसा लगेगा? बस, आपको जैसा लगेगा, वैसा ही मुझे इस वक़्त इस्लामाबाद में बैठकर लग रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news, Crime all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed