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डॉलर की जगह पाकिस्तान चलाएगा चीनी युआन
एजेंसी / इस्लामाबाद
Updated Wed, 20 Dec 2017 07:11 AM IST
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चीनी युआन
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पाकिस्तान के अमेरिका के साथ खराब होते रिश्तों और चीन के साथ नजदीकियां बढ़ने के बीच पाक में अमेरिकी डॉलर की जगह चीन की मुद्रा युआन को लाने के प्रत्यक्ष संकेत मिले हैं। पाक योजना व विकास मंत्री एहसान इकबाल ने इसकी तस्दीक करते हुए कहा कि उनकी सरकार एक ऐसे प्रस्ताव पर विचार कर रही है जिसके तहत पाक व चीन के बीच आपसी व्यापार डॉलर के बजाय युआन में शुरू हो सके। इस तरह पाक का इरादा चीन की मुद्रा को दुनिया में पहली बार वैश्विक पहचान दिलाने का है।
पाक अखबार ‘डॉन’ की रिपोर्ट के मुताबिक एहसान इकबाल ने चीन-पाक आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के लिए 2017 से 2030 के बीच लांग टर्म योजना की आधिकारिक लांचिंग के वक्त इस बारे में चर्चा की। चीनी राजदूत याओ जिंग की मौजूदगी में इस योजना पर 21 नवंबर को दोनों देशों के बीच दस्तखत हो चुके हैं। पाक मंत्री ने बताया कि चीन चाहता है कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार युआन में हो, इसलिए हम अमेरिकी डॉलर के बजाय युआन के इस्तेमाल पर विचार कर रहे हैं। यह पाक के लिए लाभदायक ही साबित होगा।
पढ़ें- अमेरिका: करीब 3 हजार करोड़ में बिकी 500 साल पुरानी जीसस की पेंटिंग
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अमेरिका के साथ बिगड़ते रिश्तों के बीच पाकिस्तान का चीन की इस मांग को स्वीकार करना एक बड़े बदलाव के रूप में माना जा रहा है, क्योंकि चीन अपनी मुद्रा का वैश्वीकरण करना चाहता है। ऐसे में सीपीईसी पर सहयोग के बहाने चीन को भविष्य में एक बड़ा बाजार मिलने की उम्मीद है। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए सिर्फ डॉलर का ही इस्तेमाल होता है। यद्यपि चीनी मुद्रा को डॉलर का दर्जा देने में अभी तीन साल का समय लगेगा।
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पाक अखबार ‘डॉन’ की रिपोर्ट के मुताबिक एहसान इकबाल ने चीन-पाक आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के लिए 2017 से 2030 के बीच लांग टर्म योजना की आधिकारिक लांचिंग के वक्त इस बारे में चर्चा की। चीनी राजदूत याओ जिंग की मौजूदगी में इस योजना पर 21 नवंबर को दोनों देशों के बीच दस्तखत हो चुके हैं। पाक मंत्री ने बताया कि चीन चाहता है कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार युआन में हो, इसलिए हम अमेरिकी डॉलर के बजाय युआन के इस्तेमाल पर विचार कर रहे हैं। यह पाक के लिए लाभदायक ही साबित होगा।
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अमेरिका के साथ बिगड़ते रिश्तों के बीच पाकिस्तान का चीन की इस मांग को स्वीकार करना एक बड़े बदलाव के रूप में माना जा रहा है, क्योंकि चीन अपनी मुद्रा का वैश्वीकरण करना चाहता है। ऐसे में सीपीईसी पर सहयोग के बहाने चीन को भविष्य में एक बड़ा बाजार मिलने की उम्मीद है। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए सिर्फ डॉलर का ही इस्तेमाल होता है। यद्यपि चीनी मुद्रा को डॉलर का दर्जा देने में अभी तीन साल का समय लगेगा।