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अफगानिस्तान पर ट्रंप की नीति बदल देने वाले हक्कानी का प्रत्यर्पण चाहता है पाकिस्तान

Sun, 06 Jan 2019 12:50 AM IST
गौरव द्विवेदी एजेंसी, इस्लामाबाद
एजेंसी, इस्लामाबाद Published by: गौरव द्विवेदी Updated Sun, 06 Jan 2019 12:50 AM IST
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Pakistan wants extradition of Haqqani who has changed policy on Afghanistan
सांकेतिक तस्वीर
अफगानिस्तान और पाकिस्तान को लेकर अपने लेखों से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपनी नीति बदल देने के लिए मजबूर कर देने वाले हुसैन हक्कानी के प्रत्यर्पण की कोशिश पाकिस्तान सरकार ने शुरू की हैं। 
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शनिवार को डॉन अखबार में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने ‘मेमोगेट स्कैंडल’ में इंटरपोल के जरिए हक्कानी को वापस लेने की कोशिश फेल होने पर 20 लाख डॉलर की धोखाधड़ी के आरोपों में उनके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू की है। इसके लिए आंतरिक मंत्रालय की तरफ से विदेश कार्यालय को 355 पेज का एक प्रत्यर्पण डोजियर भेजा गया है।
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बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल जनवरी में मेमोगेट स्कैंडल में पेश नहीं होने वाले हक्कानी का गिरफ्तारी वारंट जारी किया था, जिसे पाकिस्तानी सरकार ने इंटरपोल को भेजा था। मार्च तक इस पर कार्रवाई नहीं होने के बाद उन पर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया था। 
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अमेरिका में 2008 से 2011 तक पाकिस्तानी राजदूत रहे 62 वर्षीय हक्कानी को अपने देश की सेना और राजनेताओं के सबसे बड़े आलोचकों में से एक माना जाता है। वह पिछले 7 साल से अमेरिका में ही रह रहे हैं और वहां के एक शीर्ष थिंक टैंक हडसन इंस्टीट्यूट की दक्षिण व मध्य एशिया डिविजन के प्रमुख हैं। 

उन्होंने एक अन्य शीर्ष थिंक टैंक द हेरिटेज फाउंडेशन की लिसा कर्टिस के साथ मिलकर 2018 में अफगानिस्तान और पाकिस्तान पर एक रिपोर्ट लिखी थी।  कुछ महीने बाद इस रिपोर्ट में की गई सिफारिशों के आधार पर ही ट्रंप की नई अफगानिस्तान व दक्षिण एशिया नीति बनाई गई थी।


क्या है मेमोगेट स्कैंडल

हक्कानी के ऊपर 2011 में कथित तौर पर अमेरिकी सेना के चीफ एडमिरल माइक मुलन को एक मेमोरेंडम भेजने का आरोप है, जिसमें पाकिस्तान में पीपीपी की सत्ता वाली तत्कालीन सरकार का सेना द्वारा तख्तापलट रोकने के कथित प्रयास को रोकने में मदद मांगी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इसकी जांच के लिए ‘मेमोगेट कमीशन’ बनाया था, जिसने हक्कानी को दोषी ठहराया था।
 
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