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प्रतिबंध के डर से कार्रवाई पर मजबूर हुआ पाक, कई आतंकी गिरोहों को ब्लैक लिस्ट करने को बनाया प्लान
एजेंसी, इस्लामाबाद
Updated Wed, 27 Jun 2018 04:42 PM IST
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पाकिस्तान ने मुंबई आतंकी हमले के गुनहगार हाफिज सईद के जेयूडी सहित तमाम आतंकी गिरोहों की फंडिंग का रास्ता रोकने की एक कार्ययोजना पेश की है। फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) द्वारा ब्लैक लिस्ट में डाले जाने से बचने के लिए उठाए गए इस कदम के तहत उसने 28 सूत्री योजना लागू करने का ऐलान किया है।
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पेरिस में मंगलवार को शुरू हुई एफएटीएफ की बैठक में पाकिस्तान के 28 सूत्री कार्यक्रम पर चर्चा हुई। इसके तहत उसने आईएस, अलकायदा, लश्कर ए ताइबा, जैश ए मोहम्मद, हक्कानी नेटवर्क, जमात उद दावा (जेयूडी) एवं इसकी सहयोगी फलाह ए इंसानियत और तालिबान से संबद्ध व्यक्तियों को वित्तीय मदद रोकने का प्रस्ताव दिया है। इसे लागू करने के लिए उसने 15 महीने का समय मांगा है।
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इस कार्ययोजना के अनुसार पाकिस्तान को सभी संबंधित देशों की एजेंसियों से द्विपक्षीय सहयोग लेते हुए आतंकियों तक पहुंच रहे धन के मामले में कार्रवाई करना है। अगले साल जनवरी तक कार्ययोजना के पहले भाग को लागू कर देना है। सितंबर, 2019 तक सारी कार्ययोजना पर अमल हो जाना चाहिए।
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स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान की जवाबदेही
कार्ययोजना में कहा गया है कि जनवरी, 2019 तक स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान और सिक्यूरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ पाकिस्तान यह साबित करेंगे कि आतंकी फंडिंग से जुड़े खतरों की पहचान कर ली गई है और उनका आकलन भी कर लिया गया है। इसी समय सीमा में उसे एटी टेररिज्म एक्ट के तहत प्रतिबंधित व्यक्तियों एवं संगठनों की अपडेटेड सूची भी प्रकाशित करनी है।
ये होगा नुकसान
एफएटीएफ शुक्रवार को पाकिस्तान की कार्ययोजना पर फैसला सुनाएगा। अगर वह प्रस्ताव को खारिज कर देता है तो उसे ब्लैक लिस्ट में डाल दिया जाएगा। फरवरी, 2018 में उसे ग्रे लिस्ट की निगरानी सूची में डाला गया था। प्रस्ताव पारित होने की सूरत में उसे ग्रे लिस्ट में स्थायी रूप से शामिल कर लिया जाएगा। अगर उसे ब्लैक लिस्ट किया जाता है तो उसकी अर्थव्यवस्था को गहरा आघात पहुंचेगा, जो पहले से ही बदहाल है।
क्या है एफएटीएफ
दुनिया के 37 देशों ने 1989 में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था को मनी लांड्रिंग और आतंकी फंडिंग जैसे खतरों से बचाने के लिए इसका गठन किया था।