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पाकिस्तान की हिंदू महिलाओं को नए विवाह कानून में सुरक्षा की उम्मीद
amarujala.com- Presented by: जया पाण्डेय
Updated Wed, 12 Apr 2017 01:54 PM IST
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नए हिंदू मैरिज अधिनियम से पाकिस्तान की अल्पसंख्यक हिंदू महिलाओं को सुरक्षा मिलने की उम्मीद है। इस्लामाबाद की सपना गोबिया कुछ हफ्ते से अपनी शादी की तैयारियों में मशगूल हैं। उनकी शादी परंपराओं के अनुरूप तो होगी ही लेकिन उनकी माता-पिता की शादी से अलग अब सपना को अपनी हिंदू विवाह कानून के तहत सरकारी प्रमाण पत्र भी लेना होगा।
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सपना ने थॉमसन रायटर फाउंडेशन से कहा कि हम अल्पसंख्यक लड़कियों को शादी को लेकर हमेशा डर बना रहता है। उन्होंने कहा कि इस नए कानून के तहत अब हमारी शादी कानूनी रूप से सरकारी प्राधिकार के साथ पंजीकृत होगी। अब कोई हमारे विवाह को झूठा नहीं ठहरा सकेगा।
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सपना की ही तरह पाकिस्तान की दूसरी अल्पसंख्यक हिंदू महिलाओं को भी उम्मीद है कि पाकिस्तान का नया हिंदू विवाह कानून से हिंदू महिलाओं के अपहरण की घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी। इससे अल्पसंख्यक महिलाओं का धर्मांतरण भी रुकेगा।
गौरतलब है कि पाकिस्तान में हिंदू मैरिज अधिनियम को पिछले साल सितंबर में ही पारित कर दिया गया था लेकिन पाकिस्तान के संसद में इसे फरवरी में मंजूरी मिली।
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पाक हिंदू विवाह अधिनियम के अनुसार शादी के 15 दिनों के अंदर इसका रजिस्ट्रेशन जरूरी हो गया है। शादी के लिए लड़का और लड़की की उम्र 18 साल से अधिक होनी चाहिए। यदि पति-पत्नी एक साल या उससे अधिक समय से अलग रह रहे हैं और साथ रहना नहीं चाहते हैं, तो तलाक ले सकते हैं। इसके अलावा पति की मृत्यु के छह महीने के बाद महिला को दोबारा शादी करने का पूरा अधिकार होगा।
अगर कोई हिंदू व्यक्ति अपनी पहली पत्नी के होते हुए दूसरा विवाह करता है तो इसे दंडनीय अपराध माना जाएगा। इस बिल का उल्लंघन करने पर छह माह की सजा और पांच हजार रुपए के जुर्माने का प्रावधान है।
पाकिस्तान में हिंदू समुदाय की महिलाओं को पास अपनी शादी करने का कोई सबूत नहीं होता था। ऐसे में ये अधिनियम हिंदू महिलाओं के लिए काफी मददगार साबित हो रही है।