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पाकिस्तान में हिंदू विवाह बिल को मिली स्वीकृति

Tue, 03 Jan 2017 02:22 AM IST
एजेंसी/ इस्लामाबाद
एजेंसी/ इस्लामाबाद Updated Tue, 03 Jan 2017 02:22 AM IST
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Pakistan: Senate approve Hindu Marriage Bill
सांकेतिक चित्र

पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू अल्पसंख्यकों को मानवाधिकार पर बनी सीनेट फंक्शनल कमेटी ने नए साल का नजराना दिया है। कमेटी ने बहु-प्रतीक्षित हिंदू विवाह अधिनियम को अपनी अंतिम स्वीकृति दे दी है। अब इस पर पाक में हिंदू विवाह पर कानून बन जाएगा। इससे पहले सितंबर में नेशनल असेंबली (उच्च सदन) ने पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं के लिए हिंदू मैरिज बिल-2016 को पारित कर दिया था।

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पाकिस्तान के प्रसिद्ध अखबार ‘डॉन’ ने इस आशय का समाचार प्रकाशित करते हुए लिखा है कि पिछले 66 वर्षों से पाक में रहने वाले हिंदुओं की शादी रजिस्टर्ड नहीं होती थी, इस कारण यह समुदाय असुरक्षित महसूस करता था। लेकिन अब पाक आबादी का 2 फीसदी हिस्सा बेहतर जीवन जी सकता है। इसके अलावा तलाक और जबरन धर्म परिवर्तन जैसे मामलों का समाधान भी अब आसानी से निकाला जा सकता है, ताकि हिंदू पाक में खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें। इस बिल का उल्लंघन करने पर जुर्माने का भी प्रावधान है। 
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इस बिल के स्वीकृत होने के बाद पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू लोगों को दूसरी शादी करने की इजाजत भी मिल सकेगी। पाक की मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट सीनेटर नसरीन जलील की अध्यक्षता में सीनेट कमेटी ने बिल पर पूरी चर्चा की थी। पाक नेशनल असेंबली में अल्पसंख्यक सदस्य डॉ. रमेश कुमार वांकवानी ने कहा कि यह अधिनियम पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं के लिए नए साल उपहार है। उन्होंने कहा कि बिल के स्वीकृत होने के बाद अब हमें पाकिस्तानी हिंदू कहने में गर्व महसूस होगा।

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कुछ ऐसा होगा पाक का हिंदू विवाह अधिनियम

Pakistan: Senate approve Hindu Marriage Bill
सांकेतिक चित्र
- पाक हिंदू विवाह अधिनियम के मुताबिक शादी के 15 दिनों के भीतर इसका रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा।
- शादी के समय हिंदू जोड़े की उम्र 18 साल या उससे अधिक होनी चाहिए, इससे कम नहीं।
- यदि पति-पत्नी एक साल या उससे अधिक समय से अलग रह रहे हैं और साथ रहना नहीं चाहते हैं, तो तलाक ले सकते हैं।
- पति की मृत्यु के छह महीने के बाद महिला को दोबारा शादी करने का पूरा अधिकार होगा।
- अगर कोई हिंदू व्यक्ति अपनी पहली पत्नी के होते हुए दूसरा विवाह करता है तो इसे दंडनीय अपराध माना जाएगा।
- बिल का उल्लंघन करने पर छह माह की सजा और पांच हजार रुपए के जुर्माने का प्रावधान है।

महिलाओं को न्याय पाने में आती थी परेशानी
अब तक यहां हिंदू समुदाय की महिलाओं को अपना विवाह साबित करने के लिए कोई दस्तावेज नहीं मिलता था। इससे उन्हें न्याय पाने में काफी परेशानी आती थी। यह समुदाय पुनर्विवाह, संतान गोद लेने और उत्तराधिकार जैसे कानूनी अधिकारों से भी वंचित था। नए कानून के बाद अब पाकिस्तान में हिंदू महिलाओं के अपहरण की घटनाओं पर भी लगाम लगने की उम्मीद है।
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