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हाफिज सईद की रिहाई का रास्ता पाकिस्तान ने खुद बनाया
बीबीसी, हिंदी
Updated Fri, 24 Nov 2017 12:25 PM IST
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hafiz saeed
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पाकिस्तान में ज्यूडिशियल बोर्ड ने जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफिज सईद की रिहाई का फैसला सुनाया है। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में जमात-उद-दावा के चीफ हाफिज सईद जनवरी से ही नजरबंद हैं।
बोर्ड का कहना है कि पाकिस्तानी सरकार हाफिज सईद के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं दे पाई है और अब उन्हें और नजरबंद रखने का कोई मतलब नहीं रह गया है। भारत ने इस मामले में जितने डोजियर और सबूत दिए थे, पाकिस्तान उन्हें बतौर साक्ष्य स्वीकार नहीं करता है।
इसके अलावा मुकदमे और तफ्तीश से जुड़ी पाकिस्तान की अपनी सरकारी एजेंसियों ने खुद अदालत के सामने कोई ठोस सबूत नहीं रखे हैं।इसे समझने की जरूरत है। दूसरे मुकदमों में ये पहले भी हो चुका है।
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पाकिस्तान में न्यायिक प्रक्रिया?
पाकिस्तान एक तरफ तो न्यायिक प्रक्रिया का पालन करने का दिखावा भी करता है। वहीं, दूसरी तरफ मुकदमे और तफ्तीश को आगे बढ़ाने के लिए भी कुछ करता भी नहीं है। मानो इस न्यायिक प्रक्रिया का नतीजे पहले से तय कर लिया गया है कि आखिर में अभियुक्तों को छोड़ दिया जाएगा। इस न्यायिक प्रक्रिया से कोई उम्मीद रखना बेमानी है।
ये भी पढ़ेंः आतंकवाद पर दुनिया को धोखा दे रहा पाक, हाफिज बोला- कुछ नहीं बिगाड़ सकता भारत
ये समझना जरूरी है कि जो लोग इस केस में शामिल हैं, वो सभी पाकिस्तान की सरकारी एजेंसियों के हथियार हैं। ये सरकारी एजेंसियां इनके खिलाफ कुछ नहीं करने वाली हैं। ये भी याद रखने की जरूरत है कि मुंबई हमलों के केस में ही दो अभियुक्तों को अमेरिका में दोषी करार दिया जा चुका है।
इस मुकदमे में हाफिज सईद और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के शामिल होने से जुड़े सारे सबूत रखे गए थे। उसी आईएसआई के दबाव में काम करने वाली कानूनी एजेंसियां जैसे अभियोजन से लेकर कोर्ट तक से कैसे ये उम्मीद रखी जा सकती है कि वे इंसाफ करेंगे।
भारत के पास मौजूद विकल्प
मौजूदा हालात में भारत के पास कोई विकल्प नहीं है, कानूनी प्रक्रिया सिर्फ तब पूरी होगी जब तक पाकिस्तान भारत के खिलाफ दहशतगर्दी की मुहिम से किनारा कर ले। जब तक वो ये तय नहीं करते कि इससे उन्हें कोई फायदा नहीं मिल रहा है तब तक पाकिस्तानी एजेंसियों से ये उम्मीद रखना कि वो वहां इंसाफ होने देंगे ये बिलकुल गलत उम्मीद होगी।
हमारे लिए जरूरी है कि हम अपनी क्षमताएं बढ़ाएं और पाक पर दबाव बना सकें कि वो भारतीय जमीन पर किसी तरह की दहशतगर्द हरकत को अंजाम ना दे सके।
इसके अलावा दबाव बनाने के लिए खुफिया तरीकों को प्रयोग में लाया जाता है। इनसे दबाव बनाया जा सकता ताकि पाकिस्तान में इन तत्वों के लिए इतनी आसानी से ऑपरेशन चलाने और नए लड़ाकों को भर्ती करने, योजना बनाने और वहां से दहशतगर्द योजनाओं को अंजाम देना मुनासिब न हो सके।
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बोर्ड का कहना है कि पाकिस्तानी सरकार हाफिज सईद के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं दे पाई है और अब उन्हें और नजरबंद रखने का कोई मतलब नहीं रह गया है। भारत ने इस मामले में जितने डोजियर और सबूत दिए थे, पाकिस्तान उन्हें बतौर साक्ष्य स्वीकार नहीं करता है।
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इसके अलावा मुकदमे और तफ्तीश से जुड़ी पाकिस्तान की अपनी सरकारी एजेंसियों ने खुद अदालत के सामने कोई ठोस सबूत नहीं रखे हैं।इसे समझने की जरूरत है। दूसरे मुकदमों में ये पहले भी हो चुका है।
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पाकिस्तान में न्यायिक प्रक्रिया?
पाकिस्तान एक तरफ तो न्यायिक प्रक्रिया का पालन करने का दिखावा भी करता है। वहीं, दूसरी तरफ मुकदमे और तफ्तीश को आगे बढ़ाने के लिए भी कुछ करता भी नहीं है। मानो इस न्यायिक प्रक्रिया का नतीजे पहले से तय कर लिया गया है कि आखिर में अभियुक्तों को छोड़ दिया जाएगा। इस न्यायिक प्रक्रिया से कोई उम्मीद रखना बेमानी है।
ये भी पढ़ेंः आतंकवाद पर दुनिया को धोखा दे रहा पाक, हाफिज बोला- कुछ नहीं बिगाड़ सकता भारत
ये समझना जरूरी है कि जो लोग इस केस में शामिल हैं, वो सभी पाकिस्तान की सरकारी एजेंसियों के हथियार हैं। ये सरकारी एजेंसियां इनके खिलाफ कुछ नहीं करने वाली हैं। ये भी याद रखने की जरूरत है कि मुंबई हमलों के केस में ही दो अभियुक्तों को अमेरिका में दोषी करार दिया जा चुका है।
इस मुकदमे में हाफिज सईद और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के शामिल होने से जुड़े सारे सबूत रखे गए थे। उसी आईएसआई के दबाव में काम करने वाली कानूनी एजेंसियां जैसे अभियोजन से लेकर कोर्ट तक से कैसे ये उम्मीद रखी जा सकती है कि वे इंसाफ करेंगे।
भारत के पास मौजूद विकल्प
मौजूदा हालात में भारत के पास कोई विकल्प नहीं है, कानूनी प्रक्रिया सिर्फ तब पूरी होगी जब तक पाकिस्तान भारत के खिलाफ दहशतगर्दी की मुहिम से किनारा कर ले। जब तक वो ये तय नहीं करते कि इससे उन्हें कोई फायदा नहीं मिल रहा है तब तक पाकिस्तानी एजेंसियों से ये उम्मीद रखना कि वो वहां इंसाफ होने देंगे ये बिलकुल गलत उम्मीद होगी।
हमारे लिए जरूरी है कि हम अपनी क्षमताएं बढ़ाएं और पाक पर दबाव बना सकें कि वो भारतीय जमीन पर किसी तरह की दहशतगर्द हरकत को अंजाम ना दे सके।
इसके अलावा दबाव बनाने के लिए खुफिया तरीकों को प्रयोग में लाया जाता है। इनसे दबाव बनाया जा सकता ताकि पाकिस्तान में इन तत्वों के लिए इतनी आसानी से ऑपरेशन चलाने और नए लड़ाकों को भर्ती करने, योजना बनाने और वहां से दहशतगर्द योजनाओं को अंजाम देना मुनासिब न हो सके।
क्या अमेरिका से बेखौफ है पाकिस्तान
ट्रंप
- फोटो : FILE PHOTO
अमेरिका की प्राथमिकता ये नहीं है कि भारत में आतंकवाद से जुड़ी घटनाएं ना हों लेकिन ये जरूर है कि अफगानिस्तान में तैनात अमेरिकी फौजियों की जान को कोई नुकसान ना हो।
साल 2001 से लेकर आज तक 2000 से ज्यादा अमेरिकी फौजी तालिबानी और हक्कानी नेटवर्क के साथ लड़ाई में मारे गए हैं।
अमेरिका खुद खुलेआम ये कहता है कि ये तत्व पाकिस्तान से अपने मंसूबों को अंजाम देते हैं। पाक में सुरक्षित ठिकाने हैं जहां से ये दहशतगर्द आते हैं और हमला करके वापस भाग जाते हैं।
अमेरिका इन मामलों में हक्कानी नेटवर्क के खिलाफ पाक पर दबाव नहीं बना पाया है। ऐसे में ये विश्व संस्थाएं और अमेरिका जब खुद अपना नुकसान नहीं रोक पा रहे हैं तो भारत को हो रहे नुकसान को कैसे रोकेंगे।
साल 2001 से लेकर आज तक 2000 से ज्यादा अमेरिकी फौजी तालिबानी और हक्कानी नेटवर्क के साथ लड़ाई में मारे गए हैं।
अमेरिका खुद खुलेआम ये कहता है कि ये तत्व पाकिस्तान से अपने मंसूबों को अंजाम देते हैं। पाक में सुरक्षित ठिकाने हैं जहां से ये दहशतगर्द आते हैं और हमला करके वापस भाग जाते हैं।
अमेरिका इन मामलों में हक्कानी नेटवर्क के खिलाफ पाक पर दबाव नहीं बना पाया है। ऐसे में ये विश्व संस्थाएं और अमेरिका जब खुद अपना नुकसान नहीं रोक पा रहे हैं तो भारत को हो रहे नुकसान को कैसे रोकेंगे।