जैश-ए-मोहम्मद : पाक सेना या पाक सरकार... आखिर झूठा कौन?
14 फरवरी को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले में सीआरपीएफ (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) के 40 जवान शहीद हो गए थे। इस हमले की जिम्मेदारी ली थी पाकिस्तान में पल रहे आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने। हालांकि, पाक सरकार का लगातार यही कहना है कि जैश-ए-मोहम्मद का इस हमले से कोई लेना-देना नहीं है।
जैश को लेकर पाक सेना और सरकार दो धड़ों में बंटी सी लग रही है। कुछ दिन पहले पाक के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा था कि जैश-ए-मोहम्मद का पुलवामा हमले से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री इमरान खान जैश के मुखिया के संपर्क में हैं। वहीं, पाक सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर ने कह दिया कि जैश-ए-मोहम्मद का पाकिस्तान में वजूद ही नहीं है। अब सवाल यह है कि सच माना जाए तो किसे?
क्या बोले थे पाक विदेश मंत्री कुरैशी
पाक विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कुछ दिन पहले कहा था कि पुलवामा हमले में जैश की भूमिका के आरोप निराधार हैं। कुरैशी ने कहा था कि पाक सरकार ने जैश नेतृत्व से बात की थी जिसमें जैश ने अपनी हमले में अपनी भूमिका होने से इंकार किया था। एक अन्य इंटरव्यू में कुरैशी ने कहा था कि पाक प्रधानमंत्री इमरान खान जैश नेतृत्व के संपर्क में हैं।
कुरैशी ने यह भी कहा था कि जैश का मुखिया मसूद अजहर बहुत बीमार है। वह इतना बीमार है कि अपने घर से निकलने की हालत में भी नहीं है। कुरैशी के इन बयानों से स्पष्ट होता है कि पाक सरकार देश में जैश-ए-मोहम्मद का होना स्वीकार करती है।
पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल गफूर का बयान
वहीं, जैश-ए-मोहम्मद को लेकर पाकिस्तान सेना कुछ और ही कहानी बताती है। पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल गफूर ने बुधवार को पाकिस्तान में जैश की मौजूदगी होने से ही इंकार कर दिया। गफूर ने कहा, 'जैश-ए-मोहम्मद का पाकिस्तान में वजूद ही नहीं है।' पाक सेना यह स्वीकार करने को ही तैयार नहीं है कि जैश पाक में पल रहा है।
अब ऐसे में संतुलन की समस्या से जूझ रहे पाकिस्तान में सेना और सरकार इतने बड़े विषय पर ही एकमत नहीं हैं। हालांकि इस सबसे एक बात तो स्पष्ट है कि पाक सरकार या पाक सेना, दोनों में से कोई एक झूठ बोल रहा है। अब झूठ कौन बोल रहा है यह तो सब जानते हैं, लेकिन इससे भी बड़ी समस्या यह है कि ऐसे मुद्दे पर सरकार और सेना का अलग-अलग होना पाकिस्तान के शांति के दावों की सच्चाई जरूर बयान करता है।