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पाकिस्तान चुनाव 2018: पहली बार पोलिंग बूथ के अंदर भी तैनात होगी सेना
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Updated Wed, 27 Jun 2018 05:53 PM IST
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पाकिस्तान चुनाव आयोग ने एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए पहली बार पोलिंग बूथ के अंदर भी सेना को तैनात करने का फैसला किया है। अब तक चुनावों के दौरान सेना को सिर्फ अतिसंवेदनशील पोलिंग बूथों के बाहर तैनात किया जाता था। पाकिस्तान में 25 जुलाई को आम चुनाव होने वाले हैं।
पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने रक्षा मंत्रालय को पत्र भेजकर 23 जुलाई से 26 जुलाई तक सेना को तैनात करने का अनुरोध किया है। देश भर में 4500 बिल्डिंगों में 85 हजार से ज्यादा पोलिंग बूथ बनाए जाएंगे। इन बूथों के अंदर और बाहर सेना को तैनात करने के लिए साढ़े तीन लाख से ज्यादा सैनिकों की जरूरत होगी। इसके अलावा मतपत्रों की छपाई करने वाले सरकारी छापेखानों को भी सेना सुरक्षा मुहैया करा रही है। यही नहीं, मतपत्रों एवं चुनाव से संबंधित अन्य सामग्रियों की हिफाजत करने के लिए भी सेना की सेवाएं ली जाएंगी।
चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने बताया कि सेना, रेंजर और पुलिस अधिकारियों को एक ट्रैनिंग प्रक्रिया से गुजरना होगा जहां उन्हें यह बताया जाएगा कि चुनाव प्रक्रिया में कहां दखल देना है और कहां नहीं। इन सभी के लिए आचार संहिता भी बनाई जा रही है।
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आयोग की चिंता
पिछले आम चुनाव में अपने अधिकारियों पर हमलों से चिंतित चुनाव आयोग इस बार कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता है। पिछले चुनाव में बलूचिस्तान में हुए हमले में कई अधिकारी मारे गए थे। इस बार उसने विभिन्न विभागों से 80 लाख सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को चुनाव ड्यूटी में लगाया है।
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पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने रक्षा मंत्रालय को पत्र भेजकर 23 जुलाई से 26 जुलाई तक सेना को तैनात करने का अनुरोध किया है। देश भर में 4500 बिल्डिंगों में 85 हजार से ज्यादा पोलिंग बूथ बनाए जाएंगे। इन बूथों के अंदर और बाहर सेना को तैनात करने के लिए साढ़े तीन लाख से ज्यादा सैनिकों की जरूरत होगी। इसके अलावा मतपत्रों की छपाई करने वाले सरकारी छापेखानों को भी सेना सुरक्षा मुहैया करा रही है। यही नहीं, मतपत्रों एवं चुनाव से संबंधित अन्य सामग्रियों की हिफाजत करने के लिए भी सेना की सेवाएं ली जाएंगी।
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चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने बताया कि सेना, रेंजर और पुलिस अधिकारियों को एक ट्रैनिंग प्रक्रिया से गुजरना होगा जहां उन्हें यह बताया जाएगा कि चुनाव प्रक्रिया में कहां दखल देना है और कहां नहीं। इन सभी के लिए आचार संहिता भी बनाई जा रही है।
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आयोग की चिंता
पिछले आम चुनाव में अपने अधिकारियों पर हमलों से चिंतित चुनाव आयोग इस बार कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता है। पिछले चुनाव में बलूचिस्तान में हुए हमले में कई अधिकारी मारे गए थे। इस बार उसने विभिन्न विभागों से 80 लाख सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को चुनाव ड्यूटी में लगाया है।