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जज नजरबंदी मामले में मुशर्रफ को मिली जमानत

Tue, 11 Jun 2013 10:31 PM IST
बीबीसी
बीबीसी Updated Tue, 11 Jun 2013 10:31 PM IST
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musharraf got bail in case of detention judge

इस्लामाबाद की एक अदालत ने जजों को नज़रबंद किए जाने के मामले में पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ जमानत याचिका मंजूर कर ली है और उन्हें पांच लाख रुपए मुचलका जमा करने का आदेश दिया है।

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न्यायाधीशों को नज़रबंद बंद किए जाने के मामले में सरकारी वकील का कहना है कि वो अदालत में आरोपी की जमानत याचिका का विरोध के लिए नहीं बल्कि इस मामले में अदालत की सहायता करने के लिए आए हैं।
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महत्वपूर्ण है कि परवेज़ मुशर्रफ़ ने तीन नवंबर 2007 में देश में आपातकाल लगाने के बाद मुख्य न्यायाधीश इफ्तिखार मोहम्मद चौधरी सहित उच्च न्यायपालिका के न्यायाधीशों को नज़रबंद कर दिया था।
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नजरबंदी के दौरान उच्च न्यायपालिका के कुछ जजों ने असंवैधानिक करार दिए जाने वाले सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अब्दुल हमीद डोगर के साथ काम करना शुरू कर दिया था, जबकि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की सरकार ने सत्ता में आने के बाद मुख्य न्यायाधीश इफ्तिखार मोहम्मद चौधरी समेत बाकी कुछ न्यायाधीशों की नजरबंदी समाप्त कर दी थी।


जस्टिस मोहम्मद रियाज की अध्यक्षता में दो सदस्यीय खंडपीठ ने पूर्व सैनिक राष्ट्रपति की जमानत याचिका की सुनवाई की।

मुशर्रफ की ओर से वकील इलियास सिद्दीकी ने कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ मुकदमा 2009 में उस समय दर्ज किया गया जब वह देश में मौजूद नहीं थे।

इलियास सिद्दीकी ने कहा कि मुशर्रफ ने देश में आपातकाल उस समय संघीय सरकार के कहने पर लगाई थी।

इस मामले में सरकारी वकील का कहना था कि आरोपी ने सीधे किसी न्यायाधीश नजरबंदी के आदेश तो जारी नहीं किए थे लेकिन आपातकाल के बाद न्यायाधीशों को घरों में कैद रखना भी ऐसे ही विचार होगा जैसे उनके आदेश तत्कालीन सैन्य राष्ट्रपति ने दिए थे।

दूसरी ओर क्वेटा में एक अदालत ने बलूच नेता नवाब अकबर बुगती हत्याकांड में पूर्व सैनिक राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है।

मुशर्रफ बलूच नेता नवाब बुगती मामले हत्या में नामित हैं और यह मामला बलूचिस्तान हाईकोर्ट के आदेश पर नवाब बगटी के बेटे जमील अकबर बगटी आवेदन दर्ज हुआ था।

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