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'चार को खरोंच नहीं, बेनजीर मारी गईं'
बीबीसी हिंदी
Updated Sat, 23 Mar 2013 07:41 PM IST
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पूर्व पाकिस्तानी शासक परवेज मुशर्रफ का कहना है कि बेनज़ीर भुट्टो की मौत सुरक्षा में कमी की वजह से नहीं हुई थी।
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बीबीसी से खास बातचीत में मुशर्रफ ने माना कि उनके शासनकाल में पू्र्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की नेता बेनज़ीर भुट्टो की हत्या हुई थी लेकिन उस हादसे का कारण खराब सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी।
मुशर्रफ ने कहा, "बेनज़ीर एक जलसे में आई थीं, वो मंच पर गईं, तीन घंटे तक वहां रहीं और उसके बाद एक बम-प्रूफ गाड़ी में बैठ गईं। हादसा तो तब हुआ जब वो गाड़ी से बाहर निकलीं, गाड़ी में जो चार और लोग बैठे हुए थे उन्हें तो खरोंच भी नहीं आई।"
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27 दिसंबर 2007 को पाकिस्तान के रावलपिंडी में एक रैली के बाद बेनज़ीर भुट्टो की हत्या कर दी गई थी।
मुशर्रफ मानते हैं कि जब उन्होंने पाकिस्तान छोड़ा था तब सुरक्षा के हालात नाज़ुक थे, लेकिन आज वो और भी बदतर हो गए हैं। वो कहते हैं कि अब पाकिस्तान में सुरक्षा का माहौल 'बहुत ही खराब' है।
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ज़मानत मिली
उधर, परवेज मुशर्रफ के वकीलों का कहना है कि मुशर्रफ को कई मामलों में सुरक्षात्मक ज़मानत मिल गई है जिससे उनके पाकिस्तान लौटने का रास्ता साफ हो गया है।
मुशर्रफ पर पाकिस्तान में कई मुकदमे चल रहे हैं जिनमें हत्या की साजिश का केस भी शामिल है।
मुशर्रफ ने इशारा किया है कि वो पाकिस्तान लौटना चाहते हैं और रविवार को वो कराची पहुंच सकते हैं।
पांच साल पहले पाकिस्तान छोड़ने के बाद से मुशर्रफ दुबई और लंदन में रह रहे हैं।
इरादा नहीं बदलेगा
बीबीसी संवाददाता हसन काज़मी ने दुबई में उनसे खास बातचीत में पूछा कि वो पहले भी कई बार पाकिस्तान लौटने की घोषणा कर चुके हैं, लेकिन उन्होंने कभी उसे पूरा नहीं किया तो मुशर्रफ ने कहा, "माहौल के हिसाब से इन्सान सोच बदलता है, पहले माहौल सही नहीं था, मैंने तब इरादा बदला था क्योंकि तब चुनाव सामने नहीं था। अब तो चुनाव सर पर है, मैंने पार्टी भी बना ली है। ये 'अभी नहीं तो कभी नहीं' वाली बात है।"
मुशर्रफ मानते हैं कि जब उन्होंने पाकिस्तान छोड़ा था तब सुरक्षा के हालात नाज़ुक थे, लेकिन आज वो और भी बदतर हो गए हैं। वो कहते हैं कि अब पाकिस्तान में सुरक्षा का माहौल 'बहुत ही खराब' है।
मुशर्रफ ने माना कि उनके शासनकाल में पू्र्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की नेता बेनज़ीर भुट्टो को हत्या हुई थी लेकिन वो उस हादसे का कारण सुरक्षा की कमी को नहीं मानते हैं।
मुशर्रफ ने कहा, "बेनज़ीर एक जलसे में आई थी, वो मंच पर गई, तीन घंटे तक वहां रही और उसके बाद एक बम-प्रूफ गाड़ी में बैठ गई। हादसा तो तब हुआ जब वो गाड़ी से बाहर निकलीं, गाड़ी में जो चार और लोग बैठे हुए थे उन्हें तो खरोंचे भी नहीं आई।"
रूतबा
ये पूछे जाने पर कि क्या अपनी वापसी के लिए उन्होंने फौज से या सउदी अरब से कोई बातचीत की है या सुरक्षा की गारंटी मांगी है, मुशर्रफ ने कहा, "मैं कभी कोई चीज़ नहीं मांगता औऱ न ही मैं इसका आदी हूं। मेरा एक रूतबा है, मैने दो जंगे लड़ी हैं। चालीस साल तक मैं फौज में रहा हूं। फौज जानती है कि मुझे क्या चाहिए और वो देगी भी।"
मुशर्ऱफ़ का कहना है कि अभी उन्होंने दूसरी राजनैतिक पार्टियों से बात नहीं की है लेकिन जैसे जैसे चुनाव करीब आएगा, गठबंधन की बात बढ़ेगी।
हालांकि मुशर्रफ को कुछ मामलों में ज़मानत मिल गई है लेकिन अभी भी उन्हें पाकिस्तान पंहुचने पर गिरफ्तार किया जा सकता है। मज़ाक के लहज़े में मुशर्रफ कहते हैं कि अगर उन्हें गिरफ्तार किया गया तो कम से कम उन्हें जेलों में कैसी व्यवस्था और वहां क्या कमियां है इसका पता चल जाएगा।