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खत्म हो जाएगा नवाज शरीफ का राजनीतिक भविष्य?

बीबीसी हिंदी Updated Fri, 23 Feb 2018 02:52 PM IST
नवाज शरीफ
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एक अहम फैसले में पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) का नेतृत्व करने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया है। नावज शरीफ इस पार्टी के संस्थापक हैं।
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बीते साल 28 जुलाई को अदालत ने नवाज शरीफ के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की सुनवाई करते हुए उन्हें सार्वजनिक पद पर रहने के लिए अयोग्य करार दिया था।

शरीफ को काला धन जमा करने के आरोप में दोषी ठहराया गया था। पनामा लीक्स से जुड़े इस मामले में फैसला आने के बाद उन्हें प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

विस्तृत जजमेन्ट में अदालत ने कहा था कि सुनवाई के दौरान नवाज से उनकी संपत्ति और आय के स्रोतों के बारे में सवाल किए गए थे जिसके उन्होंने सीधे और स्पष्ट उत्तर नहीं दिए थे। अदालत का कहना था कि देश के संविधान के अनुसार किसी बेईमान व्यक्ति को देश पर शासन करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

लेकिन शरीफ की पार्टी ने संसद में एक कानून पारित किया जिसके आधार पर अदालत में अयोग्य ठहराए गए शरीफ को पार्टी के नेतृत्व करने के लिए काबिल बता कर पार्टी का अध्यक्ष चुन लिया गया। बाद में देश की मुख्य विपक्षी पार्टी ने इलेक्टोरल रिफॉर्म कानून 2017 नाम के इस कानून का विरोध किया था।

विपक्ष की याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस शाकिब निसार ने कहा कि जिस व्यक्ति को किसी भी सार्वजनिक पद के लिए अयोग्य करार दिया गया है वो किसी पार्टी का नेतृत्व नहीं कर सकता।

चुनावों में शरीफ को मिल सकता है इसका फायदा

अपने छोटे आदेश में चीफ जस्टिस ने लिखा कि पार्टी अध्यक्ष के तौर पर अयोग्य बताए जाने के बाद नवाज शरीफ के पार्टी अध्यक्ष रहते हुए जो भी कदम उठाए गए, आदेश दिए गए, दिशानिर्देश जारी किए गए या दस्तावेज जारी किए गए उन्हें "कानून की नजर में कभी पारित नहीं किए गए, जारी नहीं किए गए या माने नहीं गए माना जाएगा।"

नवाज ने हमेशा से ही खुद पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों से इंकार किया है। उनका कहना है कि उन्हें सत्ता से हटाने के लिए उनके खिलाफ साजिश की जा रही है।

हालांकि जानकार अदालत से ऐसे ही फैसले की ही उम्मीद कर रहे थे लेकिन वो ये भी मानते हैं कि अगले महीने होने वाले सीनेट चुनावों (संसदीय चुनावों) के मद्देनजर इसका व्यापक असर पड़ सकता है। कईयों को डर है कि इस फैसले के बाद देश में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल तैयार होगा और हो सकता है कि चुनावों की तारीखों को भी पीछे कर दिया जाए।

गहरा सकता है राजनीतिक संकट

नवाज शरीफ के राजनीतिक भविष्य के लिए संसदीय चुनाव खासी अहमियत रखते हैं। संसद के निचले सदन में उनकी पार्टी बहुमत में है।

संसद में पाकिस्तान मुस्लिम लीग एन को पूर्ण बहुमत मिला तो पार्टी कानून में जरूरी बदलाव कर सकती है ताकि इस साल के आखिर में होने वाले आम चुनावों से पहले शरीफ को सार्वजनिक पद के लिए फिर से योग्य घोषित किया जा सके।

विपक्ष का कहना है कि इस फैसले के कारण वो उम्मीदवार भी अमान्य हो गए हैं जिन्हें सत्तारूढ़ पाकिस्तान मुस्लिम लीग एन के नवाज शरीफ ने नॉमिनेट किया है।

लेकिन अदालत के फैसले पर संविधान के जानकारों का मत अलग-अलग हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में जब अदालत इस बारे में जो विस्तृत जजमेन्ट जारी करेगी उसमें इस बारे में कुछ अहम बातें हों ताकि इस राजनीतिक संकट से बचा जा सके। 

लेकिन क्या इस विस्तृत जजमेन्ट के आने के बाद नवाज शरीफ की मुश्किलें बढ़ सकती हैं? इस पर लोगों की राय अलग-अलग है।

अयोग्य ठहराए जाने के बाद से नवाज शरीफ और उनकी बेटी और रजनीतिक उत्तराधिकारी मरियम नवाज शरीफ लगातार न्यायाधीश और न्यायपालिका की आलोचना कर रहे हैं। दोनों के बीच मौजूद ये फासला अदालक के ताजा फैसले के बाद और भी बड़ा हो गया है।

गुरुवार को इस्लामाबाद में मीडिया से बात करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि अदालत का फैसला सिर्फ "नवाज शरीफ" के लिए ही दिया गया है।

उन्होंने कहा, "ये पहले की तरह लिए गए फैसले की तरह है, उन्होंने मुझे देश और पार्टी का नेतृत्व करने से महरूम कर दिया है और अब वो मुझे हमेशा के लिए राजनीति से दूर रखने के लिए रास्ते तलाशने की कोशिश कर रहे हैं।"

लेकिन कईयों का मानना है कि न्यायाधीशों और नवाज शरीफ के बीच के बीच इस ताजा टकराव से पार्टी को वोटरों को संगठित करने में मदद मिली है और इस कारण पूर्व प्रधानमंत्री को वोटरों से संवेदना मिल रही है।

विपक्ष को पहुंचेगा फायदा

पार्टी नेतृत्व से अयोग्य करार दिए जाने के बाद से नवाज शरीफ अपने मामले को सार्वजनिक रैलियों में यानी जनता के सामने ले कर गए हैं। और ऐसा लग रहा है कि वो काफी हद तक अपने वोटरों को ये समझाने में सक्षम हो रहे हैं कि उन्हें संस्थागत षडयंत्रों का शिकार बनाया जा रहा है।

पिछले कुछ वक्त में उन्होंने देश के शक्तिशाली प्रतिष्ठानों पर हाथ से सत्ता छीनने के लिए जिम्मेदार ठहराया है।

राजनीतिक विश्लेषक सोहेल वराइच मानते हैं कि इससे पहले भी राजनेताओं को सार्वजनिक पदों पर रहने के लिए अयोग्य ठहराया गया है। लेकिन ये पहली बार है कि किसी नेता को राजनीतिक पार्टी का नेतृत्व करने के लिए अयोग्य बताया गया है।

वो कहते हैं, "ये एक नई मिसाल है। अब देखना ये है कि राजनीतिक पर्टियां इस स्थिति से किस का सामना किस तरह करती हैं। ये देखने वाली बात होगी कि क्या वो नेता की ईमानदारी से संबंधित संविधान की इस व्याख्या को स्वीकार करती हैं या फिर इसमें बदलाव लाने की कोशिश करती हैं।"

सोहेल वराइच कहते हैं कि ये फैसला पकिस्तान की राजनीति के लिए एक बड़ा धक्का है और इससे देश में ध्रुवीकरण बढ़ेगा, लेकिन ये बात तय है कि इसका सीधा फायदा पूर्व क्रिकेटर इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ को पहुंचेगा।

कानून विशेषज्ञ तारिक महमूद कहते हैं कि नवाज शरीफ फैसले की समीक्षा की मांग कर सकते हैं लेकिन इसके कारण उन्हें जो राजनीतिक क्षति होनी थी वो हो चुकी है।

वो कहते हैं, "मौजूदा स्थिति में विभिन्न संस्थाओं के बीच जो संबंध हैं वो बुरी तरह प्रभावित हुए है और देश में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल है।"

फिलहाल देश की दो सबसे ताकतवर संस्थाओं- न्यायपलिका और सेना के बीच पड़ी दरार को साफ देखा जा सकता है लेकिन सोहेल वराइच का मानना है कि नवाज शरीफ का राजनीतिक जीवनकाल इतनी जल्दी खत्म नहीं होगा।

सोहेल वराइच कहते हैं, "वो अभी भी बेहद पॉपुलर हैं और उनसे उनकी लोकप्रियता कोई उनसे नहीं छीन सकता।"

"वो कोशिश करेंगे कि आने वाले चुनावों में उन्हें बहुमत हासिल हो ताकि उनकी पार्टी संविधान की जिस धारा के तहत उन्हें अयोग्य घोषित किया गया है कि उसे बदलने के लिए नया कानून ला सके।"

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