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Pakistan: इस्लामाबाद में विरोध के बाद मंदिर की जमीन बहाल, तीखी आलोचना के बाद चंद घंटे में पलटा आदेश
Tue, 09 Nov 2021 10:37 PM IST
Amit Mandal
एजेंसी, इस्लामाबाद।
एजेंसी, इस्लामाबाद।
Published by: Amit Mandal
Updated Tue, 09 Nov 2021 10:37 PM IST
सार
हिंदू मंदिर और श्मशान घाट के लिए पहले से आवंटित जमीन को रद्द करने की कार्रवाई सीडीए के वकील द्वारा अदालत को दी गई दलील से सामने आई।
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hindu temple in pak (file photo)
- फोटो : dawn
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विस्तार
पाकिस्तान के राजधानी राजधानी विकास प्राधिकरण (सीडीए) ने इस्लामाबाद में मंदिर निर्माण के लिए आवंटित भूमि का आवंटन हिंदू समुदाय को रद्द करने के चंद घंटों के भीतर उसे बहाल कर दिया। यह बहाली जनता द्वारा बड़े स्तर पर विरोध के बाद बढ़ती किरकिरी के चलते की गई। इस्लामाबाद शहर के प्रबंधकों ने अब उस अधिसूचना को वापस ले लिया है जिसके तहत भूखंड रद्द किया गया था।
हिंदू मंदिर और श्मशान घाट के लिए पहले से आवंटित जमीन को रद्द करने की कार्रवाई सीडीए के वकील द्वारा अदालत को दी गई दलील से सामने आई। वकील जावेद इकबाल ने इस्लामाबाद उच्च न्यायालय (आईएचसी) में एक सुनवाई के दौरान बताया कि नागरिक एजेंसी ने इस साल फरवरी में हिंदू समुदाय के लिए निर्माण शुरू नहीं करने के मकसद से पहले ही भूखंड रद्द कर दिया था। इस्लामाबाद में एच-9/2 में चार कनाल (0.5 एकड़) भूमि 2016 में समुदाय को पहली बार हिंदू मंदिर, श्मशान और सामुदायिक केंद्र के निर्माण के लिए आवंटित की गई थी। इस साजिश की खबर मिलते ही मुख्यधारा के साथ सोशल मीडिया ने सीडीए की आलोचना शुरू कर दी। इस आलोचना से घबराई सरकार ने अधिसूचना वापस ले ली।
कैबिनेट फैसले की गलत व्याख्या की : सीडीए
डॉन अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, सीडीए के प्रवक्ता सैयद आसिफ रजा ने कहा कि संघीय कैबिनेट के एक फैसले के आलोक में विभिन्न कार्यालयों, विश्वविद्यालयों और अन्य संस्थानों को आवंटित उन भूमियों का आवंटन रद्द कर दिया गया है, जिन पर कोई निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया था। हालांकि, नागरिक एजेंसी में संबंधित अधिकारियों ने कैबिनेट के फैसले की गलत व्याख्या की। उन्होंने कहा, मंदिर के लिए आवंटित भूमि पर चारदीवारी के निर्माण के लिए पहले ही मंजूरी दी जा चुकी है, इसलिए संघीय कैबिनेट का निर्णय उस पर लागू नहीं होता है।
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नवाज शरीफ की सरकार ने दी थी जमीन
पाकिस्तान सरकार ने नवाज शरीफ के प्रधानमंत्री रहते हुए 2016 में मंदिर निर्माण के लिए इस्लामाबाद के चार मरला एच-9/2 पर में जमीन दी थी। यह जमीन हिंदू समुदाय को कृष्ण मंदिर, श्मशान व सामुदायिक केंद्र के निर्माण के लिए आवंटित की गई थी। हालांकि इसमें ज्यादा काम नहीं हो सका। मंदिर निर्माण की शुरुआत से ही कुछ धार्मिक संस्थाओं ने इस पर विरोध जताना शुरू कर दिया था।
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हिंदू मंदिर और श्मशान घाट के लिए पहले से आवंटित जमीन को रद्द करने की कार्रवाई सीडीए के वकील द्वारा अदालत को दी गई दलील से सामने आई। वकील जावेद इकबाल ने इस्लामाबाद उच्च न्यायालय (आईएचसी) में एक सुनवाई के दौरान बताया कि नागरिक एजेंसी ने इस साल फरवरी में हिंदू समुदाय के लिए निर्माण शुरू नहीं करने के मकसद से पहले ही भूखंड रद्द कर दिया था। इस्लामाबाद में एच-9/2 में चार कनाल (0.5 एकड़) भूमि 2016 में समुदाय को पहली बार हिंदू मंदिर, श्मशान और सामुदायिक केंद्र के निर्माण के लिए आवंटित की गई थी। इस साजिश की खबर मिलते ही मुख्यधारा के साथ सोशल मीडिया ने सीडीए की आलोचना शुरू कर दी। इस आलोचना से घबराई सरकार ने अधिसूचना वापस ले ली।
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कैबिनेट फैसले की गलत व्याख्या की : सीडीए
डॉन अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, सीडीए के प्रवक्ता सैयद आसिफ रजा ने कहा कि संघीय कैबिनेट के एक फैसले के आलोक में विभिन्न कार्यालयों, विश्वविद्यालयों और अन्य संस्थानों को आवंटित उन भूमियों का आवंटन रद्द कर दिया गया है, जिन पर कोई निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया था। हालांकि, नागरिक एजेंसी में संबंधित अधिकारियों ने कैबिनेट के फैसले की गलत व्याख्या की। उन्होंने कहा, मंदिर के लिए आवंटित भूमि पर चारदीवारी के निर्माण के लिए पहले ही मंजूरी दी जा चुकी है, इसलिए संघीय कैबिनेट का निर्णय उस पर लागू नहीं होता है।
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नवाज शरीफ की सरकार ने दी थी जमीन
पाकिस्तान सरकार ने नवाज शरीफ के प्रधानमंत्री रहते हुए 2016 में मंदिर निर्माण के लिए इस्लामाबाद के चार मरला एच-9/2 पर में जमीन दी थी। यह जमीन हिंदू समुदाय को कृष्ण मंदिर, श्मशान व सामुदायिक केंद्र के निर्माण के लिए आवंटित की गई थी। हालांकि इसमें ज्यादा काम नहीं हो सका। मंदिर निर्माण की शुरुआत से ही कुछ धार्मिक संस्थाओं ने इस पर विरोध जताना शुरू कर दिया था।