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पाकिस्तान में सुप्रीम आदेश: रक्षा मंत्रालय व तीनों सेना के अधिकारियों को सजा का निर्देश, फैजाबाद धरने का मामला

Thu, 16 Nov 2023 11:13 PM IST
ज्योति भास्कर वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: ज्योति भास्कर Updated Thu, 16 Nov 2023 11:13 PM IST
सार

पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश पारित किया है। शीर्ष अदालत ने रक्षा मंत्रालय व तीनों सेना के अधिकारियों को सजा देने का निर्देश दिया है। मामला 2017 में फैजाबाद में धरने से जुड़े आदेश की अनदेखी का है।

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Pakistan Supreme Court Faizabad Sit In Case May 9 Riots  religious group TLP
पाकिस्तान का सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने अदालत के फैसलों की अनदेखी पर नाराजगी प्रकट की है। शीर्ष अदालत ने गुरुवार को कहा कि फैजाबाद धरना मामले में शामिल कट्टरपंथी इस्लामी समूह और अन्य के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू नहीं करने के कारण देश में हिंसा जारी है। अदालत ने कहा, फैसले को लागू न करने के कारण देश में नौ मई के दंगों जैसे हालात पैदा हो रहे हैं।
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गौरतलब है कि कट्टरपंथी धार्मिक समूह तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) के 2017 फैजाबाद धरने के कारण इस्लामाबाद और रावलपिंडी में व्यापक व्यवधान हुआ। अदालत के फैसले को लागू न करने के मामले में तीन सदस्यीय पीठ ने फैजाबाद मामले में 2019 का फैसला जारी किया। अदालत ने कहा, रक्षा मंत्रालय और तीनों सेनाओं के प्रमुखों को उनके आदेश के तहत दंडित करने का निर्देश दिया गया। उन लोगों को सजा मिलेगी जिन्होंने अपनी शपथ के उल्लंघन का दोषी पाया गया। सुप्रीम कोर्ट ने संघीय सरकार को नफरत, उग्रवाद और आतंकवाद की वकालत करने वालों की निगरानी करने और कानून के अनुसार दोषी अधिकारियों पर मुकदमा चलाने का भी निर्देश दिया।
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धरने के बारे में 2019 के फैसले को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर बुधवार की अदालती कार्यवाही के बाद सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने लिखित आदेश जारी किया। चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति काजी फ़ैज़ ईसा ने आदेश में कहा, इसके लिए कोई जिम्मेदारी नहीं तय की गई। न ही अतीत की हिंसा के लिए किसी को जवाबदेह ठहराया गया।
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2019 का फैसला जारी करने वाली तीन सदस्यीय पीठ के सदस्य न्यायमूर्ति ईसा ने कहा, "यह आश्चर्य की बात नहीं है कि हिंसा को किसी के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एक स्वीकार्य साधन के रूप में देखा जाता रहा। एक स्वतंत्र न्यायपालिका, एक समावेशी और सहिष्णु पाकिस्तान के लिए प्रयास करने वालों के पीड़ितों को न्याय के बिना नजरअंदाज कर दिया गया। राष्ट्र को इसके परिणाम भुगतने पड़े इस कारण 9 मई 2023 जैसी घटनाएं हुईं।

बता दें कि 9 मई को अर्धसैनिक रेंजर्स द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद पाकिस्तान में अभूतपूर्व हिंसा भड़क उठी। इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद हुई अभूतपूर्व घटना के दौरान कई पीटीआई कार्यकर्ताओं द्वारा रावलपिंडी में सेना मुख्यालय और फैसलाबाद में आईएसआई भवन सहित दर्जनों सैन्य और राज्य भवनों को आग लगा दी गई और तोड़फोड़ की गई।

शीर्ष अदालत के लिखित आदेश में फैजाबाद धरना मामले में समीक्षा याचिकाओं से निपटने में हुई हेराफेरी को स्वीकार किया गया। अदालत के आदेश में कहा गया है कि यह लंबे समय से अपेक्षित है कि हर संस्था पारदर्शी और जिम्मेदारी से काम करती है। जब गलत होता है, तो उसे स्वीकार करना अनिवार्य है।

समीक्षा याचिकाएं और अन्य आवेदन लंबित होने पर कार्यान्वयन रोका जा सकता है। हालांकि, सभी समीक्षा याचिकाएं और आवेदन अब निपटाए जा चुके हैं। अब इस पर विचार करने की जरूरत है कि क्या अदालत को अनुच्छेद 204 के तहत निर्णय लागू नहीं होने की स्थिति में अवमानना की संवैधानिक शक्ति का इस्तेमाल करना चाहिए या नहीं।


न्यायमूर्ति ईसा ने कहा कि यह याद दिलाने की जरूरत नहीं होनी चाहिए कि सर्वोच्च न्यायालय का प्रत्येक निर्णय बाध्यकारी है और इसे संविधान के अनुच्छेद 189 और 190 में निर्धारित अनुसार सभी कार्यकारी अधिकारियों द्वारा लागू किया जाना चाहिए। अदालत ने यह भी घोषणा की है कि सुनवाई 22 जनवरी, 2024 तक के लिए स्थगित कर दी गई है।
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