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भारत ने जासूसी के आरोप में पाक उच्चायोग के दो अधिकारियों को पकड़ा, इस्लामाबाद ने जताया विरोध
Mon, 01 Jun 2020 09:18 AM IST
अनवर अंसारी
पीटीआई, इस्लामाबाद
पीटीआई, इस्लामाबाद
Published by: अनवर अंसारी
Updated Mon, 01 Jun 2020 09:18 AM IST
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भारत पाकिस्तान
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पाकिस्तान ने जासूसी के आरोप में नई दिल्ली में अपने उच्चायोग के दो अधिकारियों को निष्कासित करने के भारत के फैसले पर कड़ा विरोध दर्ज करने के लिए सोमवार को एक वरिष्ठ भारतीय राजनयिक को बुलाया।
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पाकिस्तान के विदेश कार्यालय (एफओ) ने कहा कि भारतीय प्रभारी डी'एफेयर को डिमार्श (आपत्ति पत्र) जारी करने के लिए बुलाया गया था, जहां पाकिस्तान ने नई दिल्ली में पाकिस्तान उच्चायोग के दो अधिकारियों को नॉन ग्रेटा (अवांछित व्यक्ति) घोषित करने के फैसले की निंदा की और सभी आरोपों को निराधार बताकर खारिज कर दिया।
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सोमवार सुबह एफओ ने कहा कि भारतीय कार्रवाई कूटनीतिक संबंधों और राजनयिक मानदंड़ों पर वियना कंवेंशन का स्पष्ट उल्लंघन है। इससे पहले पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने कहा था कि नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग के दो स्टाफ को भारतीय अधिकारियों ने 31 मई को झूठे और बेबुनियादी आरोप में पकड़ा। कार्यालय ने कहा कि हालांकि, उच्चायोग के दखल देने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया।
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बता दें कि, दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा और इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) ने रविवार को पाकिस्तानी उच्चायोग के दो अधिकारियों और उनके एक ड्राइवर को जासूसी करते पकड़ा है। भारत सरकार ने इन सभी को जासूसी गतिविधियों में लिप्त होने के कारण पर्सन नॉन ग्रेटा (अवांछित व्यक्ति) करार देते हुए 24 घंटे के अंदर देश छोड़ने का आदेश जारी किया है। ये दोनों अधिकारी उच्चायोग में वीजा सहायक के पद पर तैनात थे।
विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि भारत सरकार ने इस संबंध में पाकिस्तान उच्चायोग को डिमार्श (आपत्ति पत्र) जारी किया है। पाकिस्तान उच्चायोग से भी कहा गया है कि वह सुनिश्चित कर ले कि उसके राजनयिक मिशन का कोई सदस्य भारत विरोधी गतिविधियों में लिप्त न रहे या कोई ऐसा बर्ताव न करे जो उनके राजनयिक पद के अनुकूल न हो।
दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि खुफिया विभाग को सूचना मिली थी कि पाकिस्तान उच्चायोग के आबिद हुसैन और मोहम्मद ताहिर किसी व्यक्ति से गोपनीय दस्तावेज लेने करोलबाग पहुंच रहे हैं।
इसके बाद एसीपी ललित मोहन नेगी और हृदयभूषण नेगी के नेतृत्व में गठित टीम ने दोनों अधिकारियों और ड्राइवर जावेद को उस समय रंगेहाथ पकड़ लिया, जब वे भारतीय सुरक्षा प्रतिष्ठान से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज के एवज में किसी को भारतीय मुद्रा दे रहे थे।
दोनों को करोलबाग से रविवार दोपहर 12 बजे पकड़ा गया, जब दोनों किसी तीसरे व्यक्ति से गोपनीय दस्तावेज ले रहे थे। वे दिल्ली की सड़कों पर खुलेआम घूमते थे और फर्जी आईडी बनाकर खुद को भारतीय बताते थे। इससे पहले इस तरह की घटना 2016 में हुई थी।