पाकिस्तान: सियासी पार्टियों से नाराज सुप्रीम कोर्ट ने कहा- अब आपमें नहीं बचा भरोसा, इमरान ने रद्द किया ‘आजादी मार्च’
पाकिस्तानी मीडिया के कुछ हलकों में चर्चा है कि सरकार से एक अंदरूनी डील के बाद इमरान खान ने आजादी मार्च को स्थगित किया। हालांकि पीटीआई ने इसका खंडन किया है, लेकिन कुछ मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि 19 जून के बाद मौजूदा नेशनल असेंबली भंग कर जाएगी। उसके बाद सितंबर में नए चुनाव कराए जाएंगे...
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पाकिस्तान में अफरातफरी के बढ़ रहे माहौल के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक कड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि देश में बुधवार से जो घटनाएं हुई हैं, उससे कोर्ट का देश के राजनीतिक दलों में भरोसा हिल गया है। बुधवार को पाकिस्तान के अलग-अलग हिस्सों से राजनीतिक हिंसा की खबरें आईं। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटाआई) की तरफ से आयोजित ‘आजादी मार्च’ के सिलसिले में सरकार ने दमन का रास्ता अख्तियार किया, जिस कारण देश में सियासी तनाव और बढ़ गया है।
इमरान खान ने गुरुवार को अपने समर्थकों के साथ इस्लामाबाद पहुंचने के बाद नए चुनाव का कार्यक्रम घोषित करने के लिए सरकार को छह दिन का अल्टीमेटम दिया। हालांकि खान ने कहा था कि वे यह एलान होने तक इस्लामाबाद में ही डेरा डालेंगे, लेकिन गुरुवार दोपहर बाद उन्होंने अचानक आजादी मार्च स्थगित कर दिया। लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि अगर छह दिन में नए चुनाव का कार्यक्रम घोषित नहीं हुआ, तो वे अपने समर्थकों के साथ फिर इस्लामाबाद आएंगे।
जून में नेशनल असेंबली हो सकती हैं भंग
इस बीच पाकिस्तानी मीडिया के कुछ हलकों में चर्चा है कि सरकार से एक अंदरूनी डील के बाद इमरान खान ने आजादी मार्च को स्थगित किया। हालांकि पीटीआई ने इसका खंडन किया है, लेकिन कुछ मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि 19 जून के बाद मौजूदा नेशनल असेंबली भंग कर जाएगी। उसके बाद सितंबर में नए चुनाव कराए जाएंगे।
इस बीच गुरुवार को संघीय सरकार ने इमरान खान के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट अवमानना की अर्जी दाखिल की। इसमें इल्जाम लगाया गया कि इमरान खान ने आजादी मार्च के सिलसिले में सुप्रीम कोर्ट के दिए निर्देशों का उल्लंघन किया है। उन्होंने खुलेआम अपने समर्थकों से इस्लामाबाद के डी चौक पहुंचने का आह्वान किया, जबकि कोर्ट ने वहां किसी तरह की राजनीतिक सभा न करने का निर्देश दिया था। अर्जी की सुनवाई चीफ जस्टिस उमर अता बंदियाल की अध्यक्षता वाली बेंच ने शुरू की। इसी सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने वह कड़ी टिप्पणी की। जस्टिस बंदियाल ने कहा कि कोर्ट ने राजनीतिक दलों को आपस में बातचीत शुरू करने का निर्देश दिया था। लेकिन पार्टियों की उसकी पूरी अनदेखी कर दी।
सत्ता पक्ष ने उड़ाया मजाक
इस बीच पूर्व विदेश मंत्री और पीटीआई के नेता शाह महमूद कुरैशी ने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में संकेत दिया कि उनकी पार्टी शहबाज शरीफ सरकार को कुछ समय देने को तैयार है, ताकि वह अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से कर्ज की अगली किश्तें लेने के लिए चल रही बातचीत को अंजाम तक पहुंचा सके। इमरान खान ने जिस तरह अचानक आजादी मार्च को स्थगित किया, उसे पार्टी की इसी सोच के अनुरूप समझा जा रहा है।
लेकिन इमरान खान के इस कदम से दोनों पक्षों में कोई सद्भाव पैदा होने के संकेत नहीं हैँ। सत्ता पक्ष ने तंज कसा है कि इस्लामाबाद पर घेरा डालने आए इमरान खान जन समर्थन न मिलने के कारण दुम दबा कर भाग गए। शरीफ सरकार ने आरोप लगाया है कि आजादी मार्च के दौरान पीटीआई समर्थकों ने कई जगहों पर फायरिंग की और लाखों रुपये की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। उधर पीटीआई का आरोप है कि सरकार ने गैर-कानूनी रूप से उसके नेताओं और समर्थकों को हिरासत में लिया। साथ ही आजादी मार्च को रोकने के लिए दमनकारी तरीके अपनाए गए।