पाकिस्तान को एफएटीएफ ने दिया बड़ा झटका, ग्रे लिस्ट में बना रहेगा
पाकिस्तान को एफएटीएफ ने बड़ा झटका दे दिया है। आतंकवादी गतिविधियों पर लगाम लगाने और आर्थिक अपराध को रोकने के लिए एक प्रभावी तंत्र विकसित में नाकाम रहने पर एफएटीएफ ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से बाहर नहीं किया है।
आतंकियों पर कार्रवाई करे पाकिस्तान
एफएटीएफ ने कहा कि पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र द्वारा सूचीबद्ध किए गए आतंकवादियों और उसके सहयोगियों के खिलाफ कार्रवाई कर के दिखानी चाहिए।
फाइनेंशिल एक्शन टास्कफोर्स ने कहा सभी सूचीबद्ध 1267 और 1373 घोषित अंतरराष्ट्रीय आतंकवादियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करना चाहिए। इसके साथ ही टेरर फाइनेंसिंग यानी आतंकियों के वित्त पोषण को रोकने के लिए प्रभावी तंत्र बनाना होगा।
पाकिस्तानी कोर्ट दें सख्त सजा
आतंकवाद विरोधी इस संगठन ने पाकिस्तान की अदालतों से भी कहा कि उन्हें आतंकवाद में लिप्त लोगों पर प्रभावी कार्रवाई करना चाहिए और उन्हें सख्त, प्रभावी व निर्णायक दंड देना चाहिए।
जून में होगी समीक्षा
एफएटीएफ ने कहा कि पाकिस्तान तीन अधूरे कामों को जब पूरा कर लेगा तो यह संगठन जून में होने वाले अपने सालाना सत्र में उसके मौजूदा स्टेटस पर विचार करेगा। पाकिस्तान को दी गई समय-सीमाा पहले ही खत्म हो चुकी है। ऐसे में उसकी जिम्मेदारी है कि वह इन कामों को जितनी जल्दी हो पूरा करे।
समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा था पाकिस्तान
बहरहाल, अब पाकिस्तान का जून तक आतंकी फंडिंग की निगरानी करने वाली वैश्विक संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की ग्रे सूची से बाहर निकलने के आसार नजर नहीं हैं। हालांकि पाकिस्तान एफएटीएफ की पूर्ण बैठक से पहले सदस्यों देशों से समर्थन जुटाने की कोशिशों में जुटा था।
अगर सदस्य देशों के बीच सहमति बनती तो पाकिस्तान को इस साल सूची से बाहर आने में मदद मिल सकती थी। बुधवार को एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया था कि एफएटीएफ की पूर्ण व कार्यकारी समूह की बैठक 21 से 26 फरवरी के बीच पेरिस में होगी। इन बैठकों में ग्रे सूची में पाकिस्तान की स्थिति पर फैसला होने की पूरी संभावना जताई गई थी।
किन देशों को रखा जाता है ग्रे सूची में
आतंकी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के सबसे ज्यादा जोखिम वाले देशों को ग्रे सूची में शामिल किया जाता है। पाकिस्तान को जून 2018 में इस सूची में रखा गया था। 27 मुद्दों को लागू कर वैश्विक चिंताओं को दूर करने के लिए समयसीमा दी गई थी। पिछले साल अक्तूबर में एफएटीएफ ने बैठक में पाकिस्तान फरवरी 2021 तक इस सूची में बनाए रखने का फैसला किया था।
दरअसल, पाकिस्तान वह छह प्रमुख दायित्वों को पूरा करने में नाकाम रहा था, जिनमें भारत के दो सर्वाधिक वांछित आतंकवादियों मौलाना मसूद अजहर और हाफिज सईद के खिलाफ कार्रवाई करना शामिल था। एक रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने एफएटीएफ की आगामी बैठक के नतीजे को लेकर आशा जताई थी, लेकिन अधिकारियों का मानना था कि पाकिस्तान कम से कम जून तक ग्रे सूची में शामिल रहेगा।