Mahrang Baloch: महरंग बलूच पर आतंकवाद के मामले में दर्ज किया गया मामला; फिलहाल क्वेटा जेल में हैं बंद
महरंग अक्सर बलूचिस्तान में गायब हुए लोगों के मुद्दे को लेकर पाकिस्तान सरकार को घेरती रहती हैं। वह बलूचिस्तान के लोगों के हक के लिए दशकों से लड़ रही हैं।
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पाकिस्तान पुलिस ने बलूचिस्तान की मानवाधिकार कार्यकर्ता महरंग बलूच पर आतंकवाद के आरोप में मामला दर्ज किया है। उनपर 150 अन्य लोगों के साथ मिलकर एक मुर्दाघर से जबरन शवों को ले जाने, हिंसा भड़काने और अन्य कथित अपराधों के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। 22 मार्च को महरंग बलूच के खिलाफ सरियाब पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई एफआईआर में आतंकवाद विरोधी अधिनियम (एटीए) और पाकिस्तान दंड संहिता (पीपीसी) की विभिन्न धाराएं शामिल की गई है। इन आरोपों में आतंकवाद, हत्या और हत्या का प्रयास, हिंसा और विद्रोह को भड़काना, अव्यवस्था पैदा करना और नस्लीय घृणा को बढ़ावा देना और संपत्ति को नुकसान पहुंचाना जैसे अपराध शामिल हैं।
जाफर ट्रेन दुर्घटना में मारे गए पांच लोगों के शवों को जबरन ले जाने का आरोप
समाचार एजेंसी एएनआई ने डॉन के हवाले से बताया कि ये मामला क्वेटा के सिविल अस्पताल की एक घटना से संबंधित है। आरोप है कि बलूच यकजेहती समिति (बीवाईसी) के सदस्यों ने कथित तौर पर सिविल अस्पताल के मुर्दाघर पर हमला कर जाफर ट्रेन दुर्घटना के दौरान मारे गए पांच लोगों के शवों को जबरन ले गए थे। दर्ज की गई एफआईआर में कहा गया है कि बीवाईसी नेतृत्व ने कथित रूप से दंगाइयों को पुलिस अधिकारियों, राहगीरों और अपने स्वयं के प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाने के लिए उकसाया, जिसके चलते तीन व्यक्तियों की मौत हो गई और 15 पुलिस अधिकारी घायल हो गए।
वहीं, एफआईआर में बीवाईसी के जिन अन्य प्रमुख नेताओं का नाम शामिल है। उनमें बीबो बलूच, गुलजादी सतकजई, सबीहा बलूच, सबातुल्ला बलूच, गुलजार दोस्त, रियाज गशकोरी और शाली बलूच शामिल हैं।
क्वेटा जेल में बंद हैं महरंग बलूच
बता दें कि इससे पहले पाकिस्तान के अधिकारियों ने शनिवार को महरंग बलूच और 17 अन्य को गिरफ्तार भी किया था। फिलहाल उन्हें कानून- व्यवस्था (एमपीओ) अध्यादेश की धारा 3 के तहत क्वेटा जिला जेल में बंद किया गया है। अभी तक इस मामले में कुल तीन एफआईआर दर्ज की गईं हैं। महरंग बलूच की गिरफ्तारी का आधिकारिक तौर पर खुलासा नहीं किया गया है। वह सिविल लाइंस पुलिस की हिरासत में नहीं है और एमपीओ प्रावधानों के तहत क्वेटा जिला जेल में है।
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इंटरनेट सेवाएं लगातार चौथे दिन बंद
इस विरोध प्रदर्शन के चलते क्वेटा और आस-पास के इलाकों में इंटरनेट सेवाएं रविवार को लगातार चौथे दिन बंद रहीं। हालांकि पीटीसीएल के अधिकारियों ने रविवार देर शाम दावा किया कि सेवाएं बहाल कर दी गई हैं, लेकिन यूजर्स को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी बलूच की हिरासत पर जताई चिंता
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार रक्षकों की विशेष दूत मैरी लॉलर सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी महरंग बलूच की हिरासत पर चिंता व्यक्त की और उनकी तत्काल रिहाई की मांग की। लॉलर ने कहा कि क्वेटा में बलूच यकजेहती समिति के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई के बाद महरंग बलूच और कई अन्य मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की खबरें बहुत चिंताजनक हैं। उन्होंने इस क्षेत्र में हो रहे दमन की ओर ध्यान खींचा है। इस घटना ने बलूच कार्यकर्ताओं और उनके परिवारों के साथ हो रहे व्यवहार के बारे में चिंता जताई है, जिससे यह साबित होता है कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत है।
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कौन है महरंग बलूच
1993 में जन्मीं महरंग के पिता अब्दुल गफ्फार लैंगोव एक मजदूर थे। पहले उनका परिवार क्वेटा में रहता था लेकिन मां की बीमारी के इलाज के लिए कराची स्थानांतरित हो गया। महरंग का अब तक का सफर चुनौतियों से भरा रहा है। उनके मानवधिकार कार्यकर्ता बनने के पीछे भी दर्दनाक कहानी है। दरअसल, दिसंबर 2009 में उनके पिता को कराची में अस्पताल ले जाते समय पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने जबरन अपहरण कर लिया था। 16 साल की उम्र में महरंग ने तुरंत पिता को वापस लाने के लिए विरोध करना शुरू कर दिया और छात्र आंदोलनों में जाने लगीं। हालांकि, जुलाई 2011 में उनके पिता को मार दिया गया।
2017 में उनके भाई को भी अगवा कर लिया गया था। इस घटना ने महरंग की पूरी जिंदगी ही बदल दी। अपने भाई को वापस लाने के लिए उन्होंने पाकिस्तान सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया। इसके एक साल बाद उनके भाई को वापस कर दिया था। साल 2019 में महरंग ने बलूच यकजेहती समिति (बीवाईसी) की स्थापना की। महरंग पेशे से एक डॉक्टर भी हैं। बलूचिस्तान में उन्हें खूब पसंद किया जाता है। उनकी रैलियों में लाखों की संख्या में लोग शामिल होते हैं। महरंग ने स्कूलों और लोगों के घरों में जाकर अभियान चलाया।
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