Pakistan: पाकिस्तान में नैरेटिव की जंग हार रहे हैं शहबाज शरीफ! क्यों डर रहे हैं जनता के बीच जाने से?
Pakistan: विश्लेषकों के मुताबिक इस विवाद से इमरान खान को नए चुनाव का मुद्दा फिर से चर्चा में लाने का मौका मिला है। उनके मुताबिक प्रांतीय असेंबली भंग होने से नेशनल असेंबली पर वैसे भी कोई फर्क नहीं पड़ता। इमरान खान की रणनीति यह थी कि वे निर्वाचन आयोग को प्रांतीय असेंबली का चुनाव कराने पर मजबूर करें...
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पाकिस्तान (Pakistan) के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाला सत्ताधारी गठबंधन- पाकिस्तान डेमोक्रेटिक एलायंस (पीडीएम) नैरेटिव की जंग में पिछड़ रहा है। पंजाब प्रांत की ताजा घटनाओं ने यह सोच मजबूत की है कि पीडीएम किसी भी कीमत पर चुनाव से बचना चाहता है। वहां जिस तरह गवर्नर बलीघ-उर-रहमान ने मुख्यमंत्री परवेज इलाही को उनके पद से हटाया, उससे सत्ताधारी गठबंधन के इरादे पर नए सिरे से सवाल उठ रहे हैं।
इलाही को प्रांतीय असेंबली को भंग करवाने से रोकने के लिए गवर्नर ने यह कदम उठाया है। इलाही पाकिस्तान मुस्लिम लीग (क्यू) के नेता हैं। इस पार्टी का पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) से गठजोड़ है। इमरान खान ने अपने शासन वाले दोनों प्रांतों की असेंबलियों को 23 दिसंबर को भंग करवाने का एलान किया था। पंजाब इसे रोकने के लिए पीडीएम ने इलाही सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया। अपने निर्देश के मुताबिक उस पर मतदान न करवाने के स्पीकर सिबतैन खान के फैसले के बाद गवर्नर ने गुरुवार रात मुख्यमंत्री पद पर इलाही की नियुक्ति को रद्द कर दिया।
अब पीएमएल (क्यू) और पीटीआई ने गवर्नर के इस फैसले के खिलाफ कोर्ट जाने का एलान किया है। गवर्नर के फैसले पर चर्चा करने के लिए दोनों पार्टियों की शुक्रवार को बैठक हुई। उसमें गवर्नर के फैसले को कोर्ट में चुनौती देने का निर्णय लिया गया। पीटीआई के नेता फव्वाद चौधरी ने इस बैठक के बाद दावा किया कि मुख्यमंत्री को उनके पद से हटाने का गवर्नर को कोई अधिकार नहीं है।
विश्लेषकों के मुताबिक इस विवाद से इमरान खान को नए चुनाव का मुद्दा फिर से चर्चा में लाने का मौका मिला है। उनके मुताबिक प्रांतीय असेंबली भंग होने से नेशनल असेंबली पर वैसे भी कोई फर्क नहीं पड़ता। इमरान खान की रणनीति यह थी कि वे निर्वाचन आयोग को प्रांतीय असेंबली का चुनाव कराने पर मजबूर करें। पाकिस्तान के संविधान के मुताबिक सदन भंग होने के बाद 60 दिन के अंदर नया चुनाव कराना जरूरी होता है। इमरान खान की रणनीति थी कि अगर नए चुनाव में उनकी पार्टी जीती, तो उससे संघीय सरकार पर देश में तुरंत नया आम चुनाव कराने का नैतिक दबाव बढ़ेगा। अब पंजाब की घटनाओं के चर्चा के केंद्र में आने से इमरान खान के लिए यह दावा करना आसान हो गया है कि पीडीएम जनता के बीच जाने से बचना चाहता है।
अखबार द न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब में हुई घटनाओं की कमान सीधे प्रधानमंत्री शरीफ ने संभाल रखी थी। गवर्नर का आदेश जारी होने के पहले गुरुवार को उन्होंने कई वरिष्ठ नेताओं से संपर्क किया था। इनमें पीडीएम में शामिल पार्टियों के नेताओं के अलावा पीएमएल (क्यू) के अध्यक्ष शुजात हुसैन भी शामिल बताए जाते हैं।
इमरान खान ने पंजाब के अलावा खैबर पख्तूनवा प्रांत की असेंबली को भी 23 दिसंबर को भंग कराने की घोषणा की थी। लेकिन पंजाब की घटनाओं के बाद वहां के मुख्यमंत्री महमूद खान ने इस बारे में फैसला टाल दिया। उन्होंने कहा कि वे पहले यह देखने के लिए इंतजार करेंगे कि पंजाब में क्या होता है। खान ने कहा- ‘इमरान खान पहले पंजाब के बारे में फैसला लेंगे। पंजाब के बारे में निर्णय होने के बाद खैबर पख्तूनवा के बारे में फैसला होगा।’