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इमरान खान का देश को संबोधन: रविवार को होगा पाकिस्तान का फैसला, जो भी नतीजा हो आखिर तक लड़ूंगा

Thu, 31 Mar 2022 10:14 PM IST
Amit Mandal वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Amit Mandal Updated Thu, 31 Mar 2022 10:14 PM IST
सार

पाकिस्तान सियासी संकट गहराता जा रहा है। आज भी नेशनल असेंबली में पाक पीएम इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बहस नहीं हुई और इसे 3 अप्रैल तक के लिए टाल दिया गया। 

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Pakistan Prime Minister Imran Khan's address to the nation, tweets Pakistan Minister Fawad Chaudhry. 
Imran Khan - फोटो : ANI

विस्तार

देश में सियासी संकट के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने आज जनता को संबोधित किया। इस दौरान इमरान ने भारत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कश्मीर का जिक्र करने से लेकर अमेरिकी दखल पर भी बात की। इमरान ने कहा कि मैं रिकॉर्डेड नहीं बल्कि देशवासियों से लाइव बात कर रहा हूं। आज पाकिस्तान के लिए फैसले की घड़ी है। न झुकूंगा, न कौम को झुकने दूंगा। उन्होंने हा कि इस रविवार को पाकिस्तान का फैसला होगा। जो भी नतीजा होगा, मैं आखिर तक लड़ूंगा। अपने संबोधन में क्या-क्या कहा इमरान ने पढ़ें- 

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पाकिस्तान मेरे से सिर्फ पांच साल बड़ा

मेरे पाकिस्तानियों, मैं आपसे बड़ी अहम बात करना चाहता हूं। इसकी वजह ये है कि पाकिस्तान ऐसे मोड़ पर है, जब हमारे सामने दो रास्ते हैं और हमें कौन सा रास्ता लेना है। मैं चाहता हूं कि आज आपसे दिल की बातें करूं। मैं पाकिस्तान की पहली जेनरेशन था। पाकिस्तान मेरे से सिर्फ पांच साल बड़ा है। पाकिस्तान को एक इस्लामिफलाई रियासत बनना है। हमारे फाउंडिंग फादर्स ने लिखा था कि हमें मदीना की तरह की रियासत बनना है। मैंने अपने मैनिफेस्टो में लिखा था कि हमारे तीन मकसद रहेंगे- एक इंसाफ, दूसरा इंसानियत, तीसरा मकसद था खुद्दारी। एक मुसलमान कौम गुलाम नहीं हो सकती। सबसे बुरी चीज अल्लाह को लगती है कि जब आप किसी को भी अल्लाह की जगह पर रखते हैं। ये जो आप गुलामी करते हैं पैसे की, या किसी डर की यह इस्लाम में गलत है।

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मैं अपनी कौम को किसी की गुलामी नहीं करने दूंगा

अगर अल्लाह मेरे में ईमान न डालता तो मैं राजनीति में ही क्यों आता। मैं जब स्कूल में था तो लोग पाकिस्तान की मिसालें देते थे। लेकिन पाकिस्तान को जिस तरह की जिल्लत मिली। मैं अपनी कौम को किसी की गुलामी नहीं करने दूंगा। जब मुझे तख्त मिला तो मैंने फैसला किया कि हमारी फॉरेन पॉलिसी आजाद होगी। इसका ये मतलब नहीं कि हम एंटी इंडिया या एंटी अमेरिका या एंटी यूरोप होंगे। हिंदुस्तान में जो मेरी दोस्ती थीं, वो क्रिकेट की वजह से थीं। इंग्लैंड मेरा दूसरा घर था। मैंने कभी किसी इंसानी मासरे की खिलाफत नहीं की। उनकी गलत पॉलिसी का जरूर विरोध करता हूं।

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सबसे बड़ी गलती जनरल मुशर्रफ ने की

मैं इसी कमरे में था जब हमसे कहा गया था कि अगर हमने अमेरिका की खिदमत नहीं की तो वे जख्मी रीछ की तरह हमें ही न मार दें। तब मैंने कहा था कि 9-11 में पाकिस्तान का कोई हाथ नहीं था। मैंने कहा था कि हम दहशतगर्दी के खिलाफ हैं और हमें उनकी मदद करनी चाहिए। इसका क्या ये मतलब है कि हम अपनों को कुर्बान कर दें उनके लिए। सबसे बड़ी गलती जनरल मुशर्रफ ने की। हम अमेरिका के सहयोगी हैं और हम सोवियत के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं। यहां से कबायली गए और हमने उनकी हिमायत की। हमने उनसे कहा कि विदेशी अफगानिस्तान में जंग लड़ रहे हैं, हमें उसके खिलाफ जेहाद करना है। जब सोवियत चला गया तो वही अमेरिका जो हमारे साथ जंग लड़ रहा था, उसी ने हम पर प्रतिबंध लगा दिए।


इन्होंने मुझे तालिबान खान कहा

पाकिस्तान किस समय से गुजरा। मैं बैकग्राउंड इसलिए दे रहा हूं ताकि आगे बात ले जा सकूं। इन्होंने मुझे तालिबान खान कहा। जब मैंने अमेरिका के ड्रोन हमलों के खिलाफ विरोध किया तो मुझे तालिबान के साथ बताया गया। मैंने इसे जुल्म कहा। लेकिन हमारे सीनियर पॉलिटिशियंस ने कुछ नहीं कहा। उनका कहना था कि अमेरिका कहीं नाराज न हो जाए। अगर कोई बाहरी फैसला कर ले कि कौन कसूरवार है, कौन बेकसूर, तो यह सही नहीं। हमारी सरकारों ने अमेरिका के साथ सहयोग किया। हर तरफ पाकिस्तानियों ने मुसीबतें झेलीं। 


मैंने भारत से बात करने की पूरी कोशिश की थी

जब मुझे हुकूमत मिली तो मैंने कहा कि पाकिस्तान की विदेश नीति पाकिस्तान की होगी। इससे किसी की बेहतरी हो या न हो, लेकिन पाकिस्तान के खिलाफ न हो। इंडिया के खिलाफ सिर्फ तब बात की गई, जब उन्होंने जम्मू-कश्मीर का अनुच्छेद 370 हटा दिया। मैंने उससे पहले भारत से बात करने की पूरी कोशिश की।


7 मार्च को अमेरिका से मैसेज आया 

अभी हमें 7 मार्च को अमेरिका (बाहरी मुल्क से हमें) से मैसेज आता है, (चिट्ठी खोलते हुए) ये है तो पीएम के खिलाफ, लेकिन ये पूरी कौम के खिलाफ है। उस मैसेज में लिखा है कि पाकिस्तान में अविश्वास प्रस्ताव आ रहा है, जो विपक्ष रखने वाला है। यानी विपक्ष का पहले से ही विदेशी ताकतों का संपर्क था। वो बताते हैं कि पाकिस्तान से वे क्यों गुस्सा हैं। वे यह भी कहते हैं कि अगर इमरान खान अविश्वास प्रस्ताव हार जाता है तो हम सब भुला देंगे। लेकिन अगर इमरान बच जाता है तो पाकिस्तान को फिर से मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। ये रिकॉर्डेड बात है। ये आधिकारिक दस्तावेज है। ये पाकिस्तान सरकार के राजदूत के नोट्स से है। इसमें कहा गया कि अगर इमरान वजीरे आजम रहता है तो हमारे आपके ताल्लुकात भी खराब हो जाएंगे और आपको मुश्किलों का भी सामना करना पड़ेगा।


रूस जाने से पहले देश के सभी बड़े लोगों से बात की थी

क्या यही हमारी हैसियत है कि 22 करोड़ के एक मुल्क को कोई बाहरी देश बताएगा। इसमें रूस के मेरे दौरे का भी जिक्र किया गया है। मैंने रूस जाने से पहले देश के सभी बड़े लोगों से बात की थी। लेकिन राजदूत ने जब उस देश के व्यक्ति को यह बताने की कोशिश की तो उसने पलटकर कहा कि नहीं ये गलत हुआ।


पाकिस्तान में बैठे लोगों के बाहरी ताकतों से संपर्क

मेरा जो आज आपसे बात करने का मकसद है वह यह कि कोई हमसे यह कैसे कह सकता है कि हम कहां जा सकते हैं। ऐसी बाहरी ताकतों के संपर्क पाकिस्तान में बैठे लोगों से हैं। ये हैं थ्री स्टूजेस। ये चाह रहे हैं कि अगर इमरान चला जाए तो सब ठीक हो जाएगा। जिनके ऊपर अरबों रुपये के केस हों, जिनको मुजरिम घोषित कर दिया है पाकिस्तान की अदालत ने। जो बाहर भाग गए हों। क्या अपने मुल्क को हम ऐसे लोगों को आने देंगे। हमारे मुल्क में इन लोगों (विपक्ष) पर इतने सारे केस हैं। उन लोगों को बाहरी ताकतें कह रही हैं कि वो ठीक हैं, लेकिन इमरान पसंद नहीं है। उनको भी पता है कि इमरान का बैकग्राउंड क्या है, उन्हें विपक्ष के नेताओं की भी सारी जानकारी है। विदेशी ताकतों के पास विपक्षी नेताओं के सारे राज हैं। हमारे जो तीन लोग विदेशी ताकतों को पसंद आ गए हैं, इनकी क्या खासियतें उन्हें पसंद आई हैं। मुशर्रफ के समय अमेरिका ने 11 ड्रोन अटैक किए। विपक्ष वालों के समय में पाकिस्तान में 400 से ज्यादा ड्रोन अटैक हुए।


नरेंद्र मोदी से छिप-छिपकर मिलते थे नवाज शरीफ

बरखा दत्त की किताब में है कि नवाज शरीफ अपनी फौज से बचने के लिए नरेंद्र मोदी से छिप-छिपकर मिल रहे थे। कोई सोच सकता है कि हमारे सैन्य प्रमुख बाजवा को कोई आतंकी कह दे। हमारे राहिल शरीफ को मोदी दहशतगर्द कह रहे थे। 


मेरी सबसे बड़ी जिम्मेदारी मेरे 22 करोड़ लोग

मैं किसी के विरोध में बात नहीं करता। मेरी सबसे बड़ी जिम्मेदारी मेरे 22 करोड़ लोग हैं, उनके लिए विदेश नीति बनानी है। आखिर शाहबाज शरीफ ने कितनी बार पाकिस्तान के लिए स्टैंड लिया था, जब बमबारी हो रही थी। विपक्ष ने कहा कि यह दस्तावेज ठीक नहीं है। आपने ये दस्तावेज तब क्यों नहीं देखे, जब हमने इसे संसद में रखा था।


इस रविवार को होगा मुल्क का फैसला

संडे को वोट दिया जाएगा, इस संडे को इस मुल्क का फैसला होने वाला है कि ये मुल्क किस तरफ जाएगा। क्या वही गुलामाना रवैया, भ्रष्टाचारी जिनके खिलाफ नैब में केस पड़े हैं। जितने भी खुशहाल मुल्क हैं, वहां सबसे ताकतवर मुजरिम को दबाकर रखा जाता है, लेकिन पाकिस्तान में इसका इंतजाम नहीं है। इमरान को साढ़े तीन साल हुए हैं, आप तो तीस साल से थे, तो ये जो हाल खराब हुए हैं क्या ये साढ़े तीन साल में हुए हैं। जो साढ़े तीन साल में हुआ है वो विपक्ष के तीस सालों में नहीं हुआ है। अब जो फैसला होना है कि 3 तारीख को होगा। किसी ने मुझसे कहा था कि आप इस्तीफा दे दें। मैंने हमेशा आखिरी बॉल तक क्रिकेट खेली है। जो भी नतीजा हो मुझे आखिर तक लड़ना है। मुझे देखना है कि कौन अपने जमीर का सौदा करेगा। अगर कोई हमारी नीतियों के खिलाफ था तो उसे रिजाइन करना था, तब नहीं जब आपको 25 करोड़ रुपये ऑफर हो रहे थे। मैं पूछना चाहता हूं कि हमारे नौजवानों को हम क्या सबक दे रहे हैं। 


मुल्क का सौदा हो रहा है

ये कोई छुपी बात नहीं है। कोई नहीं मानेगा कि आसिफ जरदारी, शहबाज शरीफ या फजल-उर-रहमान कोई बेहतर आदमी हैं। ये सिर्फ और सिर्फ मुल्क का सौदा हो रहा है, हमारी स्वायत्ता का सौदा है। मुझे उम्मीद है कि जो लोग अपना सौदा कर के बैठे हैं, ये हमेशा के लिए आपके ऊपर निशान लग जाएगा। लोग आपको भूलेंगे नहीं, न माफ करेंगे। लोग आपको हैंडल करने वालों को भी नहीं भूलेंगे। लोग कहेंगे कि आपने अपने मुल्क का सौदा कर लिया। आपने उस सरकार को गिराने की कोशिश की, जिसकी आजाद नीतियां थीं।


आपको नस्लें माफ नहीं करेंगी

ये जो आप करने जा रहे हैं, आपको नस्लें माफ नहीं करेंगी। ये मेरी कौम से कमिटमेंट है कि जब तक मेरे अंदर खून है मैं इससे लड़ूंगा। नवाज शरीफ ने इस दौर में 18 फैक्ट्रियां बनवा ली थीं, लेकिन मैंने ऐसा कुछ नहीं किया। इस कौम से जो गद्दारी हो रही है, मैं चाहता हूं कि एक-एक गद्दार की आप शक्ल याद रखना। ये चाहे कुछ भी कहें, आप इनकी बात नहीं मानना। ये कौम न ये भूलेगी न आपको माफ करेगी, न जो आपके पीछे हैं, उन्हें माफ करेगी। मुझे अल्लाह ने मुकाबला करने का दम दिया है। मैं स्ट्रगल कर के यहां पहुंचा हूं। मैं किसी हालत में इसे सफल नहीं होने दूंगा।


 

संसद में नहीं हुई बहस
इससे पहले आज भी नेशनल असेंबली में पीएम इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बहस नहीं हुई और इसे 3 अप्रैल तक के लिए टाल दिया गया। इस बीच विपक्ष ने इमरान पर हमले और तेज कर दिए और इमरान से सम्मानपूर्वक इस्तीफा देने की मांग की। 

पाकिस्तान के संसद में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा तीन अप्रैल सुबह 11.30 बजे तक के लिए टाल दी गई है। माना जा रहा है कि जब वोटिंग होगी तो इमरान खान की कुर्सी छिननी तय है। वहीं अविश्वास प्रस्ताव पर बहस से पहले इमरान खान ने एनएससी की बैठक बुलाई। इससे पहले विपक्षी दलों की बैठक भी हुई थी। 

 

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