पाकिस्तान: शहबाज शरीफ का दांव, कहा- सीपीईसी से तुर्की को जोड़कर बनाई जाए त्रिपक्षीय व्यवस्था
सीपीईसी को लेकर भारत ने चीन के सामने विरोध जताया है क्योंकि इसे पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से होते हुए बिछाया जा रहा है।
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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार को प्रस्ताव दिया कि महत्वाकांक्षी चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) को चीन, पाकिस्तान और तुर्की के बीच एक त्रिपक्षीय व्यवस्था में बदल दिया जाए ताकि तीनों मित्र राष्ट्र इसकी क्षमता से लाभान्वित हो सकें। शरीफ ने कराची शिपयार्ड एंड इंजीनियरिंग वर्क्स में तुर्की द्वारा निर्मित तीसरे MILGEM कार्वेट के लॉन्चिंग समारोह को संबोधित करते हुए यह टिप्पणी की। अखबार ने प्रधानमंत्री के हवाले से कहा, व्यापार गतिविधियों में वित्तीय और औद्योगिक गतिविधियों के विकास के साथ कई गुना बढ़ने की क्षमता है। चल रही सीपीईसी परियोजना क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने और ग्वादर के साथ व्यापार को अधिकतम करने की हमारी इच्छा पूरी करने के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा कि मैं इस अवसर का लाभ उठाने के लिए प्रस्ताव रखना चाहता हूं कि सीपीईसी को चीन, पाकिस्तान और तुर्की के बीच एक त्रिपक्षीय व्यवस्था बनने दें और हमें अपने देशों को लाभ पहुंचाने की इसकी अद्भुत क्षमता का लाभ उठाने दें। उन्होंने कहा कि समुद्री बुनियादी ढांचे के विकास के लिए पाकिस्तानी सरकार प्रतिबद्ध है। सीपीईसी 60 अरब डॉलर की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है जिसके बारे में इस्लामाबाद कहता है कि यह देश के बुनियादी ढांचे, ऊर्जा, औद्योगीकरण, सामाजिक-आर्थिक विकास की जरूरतों में सुधार करके और लोगों की आजीविका में सुधार लाकर पाकिस्तान को बदल देगा।
शहबाज ने एर्दोगन का गुणगान किया
महत्वाकांक्षी सीपीईसी चीन के उत्तर पश्चिमी शिनजियांग उइघुर स्वायत्त क्षेत्र और पश्चिमी पाकिस्तान प्रांत बलूचिस्तान में ग्वादर बंदरगाह को जोड़ने वाली बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का 3,000 किलोमीटर लंबा मार्ग है। सीपीईसी को लेकर भारत ने चीन के सामने विरोध जताया है क्योंकि इसे पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से होते हुए बिछाया जा रहा है। शहबाज ने तुर्की की एक कंपनी के सहयोग से निर्मित युद्धपोत के लॉन्च की भी सराहना की। उन्होंने युद्धपोत के विकास में सहायता करने के लिए तुर्की की सराहना करते हुए कहा कि यह राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन के सक्षम और गतिशील नेतृत्व के तहत पाकिस्तान और तुर्की के बीच सहयोग का एक और महान उदाहरण है। वह न केवल एक महान भाई और मित्र हैं, बल्कि पाकिस्तान के महान समर्थक भी हैं। हमारे आपसी भाईचारे के संबंध पहले की तुलना में बहुत अधिक ऊंचाइयों तक पहुंच गए हैं।