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जाधव को मिलेगा अपील का मौका, पाक संसद ने चार महीने बढ़ाई विधेयक की अवधि
Tue, 15 Sep 2020 05:54 PM IST
गौरव पाण्डेय
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Tue, 15 Sep 2020 05:54 PM IST
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कुलभूषण जाधव
- फोटो : सोशल मीडिया
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पाकिस्तान की संसद ने भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव से संबंधित एक अध्यादेश की अवधि चार महीने बढ़ा दी है। यह अध्यादेश जाधव को अपनी दोषसिद्धि के खिलाफ किसी उच्च न्यायालय में एक अपील दायर करने की इजाजत देता है। बता दें कि भारतीय नौसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी जाधव को पाक की एक सैन्य अदालत ने जासूसी और आतंकवाद के आरोपों में अप्रैल 2017 में मौत की सजा सुनाई थी।
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बीती मई में जारी अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (समीक्षा एवं पुनर्विचार) अध्यादेश की अवधि 17 सितंबर को समाप्त होने वाली थी। लेकिन, कौमी असेंबली ने सोमवार को इसकी अवधि चार महीने के लिए बढ़ा दी। यह अध्यादेश अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के उस फैसले को लागू करने के लिए लाया गया था जिसमें पाक से कहा गया था कि वह जाधव को सैन्य अदालत द्वारा सुनाई गई सजा की एक प्रभावी समीक्षा मुहैया कराए।
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पाक सरकार ने इस्लामाबाद उच्च न्यायालय से अदालत में जाधव के प्रतिनिधित्व के लिए वकील नियुक्त करने का अनुरोध किया है। अदालत ने गत तीन सितंबर को सरकार को निर्देश दिया था कि वह भारत को जाधव का प्रतिनिधित्व करने के लिए वकील नियुक्त करने का एक और मौका दे। पिछले सप्ताह पाक ने कहा था कि उसने इसे लेकर न्यायिक आदेशों से भारत को अवगत कराया है लेकिन भारत ने कोई जवाब नहीं दिया।
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गत 16 जुलाई को, पाकिस्तान ने जाधव को राजनयिक पहुंच प्रदान की थी लेकिन भारत सरकार ने कहा था कि उक्त पहुंच न तो सार्थक थी और न ही विश्वसनीय थी। भारत ने कहा कि पाकिस्तान न केवल आईसीजे के फैसले का उल्लंघन कर रहा है, बल्कि अपने अध्यादेश का भी। भारत ने जाधव को राजनयिक पहुंच से इनकार करने और मौत की सजा को चुनौती देने के लिए पाक के खिलाफ आईसीजे से संपर्क किया था।
आईसीजे ने पिछले साल जुलाई में फैसला दिया था कि पाक को जाधव की दोषसिद्धि और सजा की प्रभावी समीक्षा और पुनर्विचार करना चाहिए। बिना किसी और देरी के भारत को राजनयिक पहुंच प्रदान करनी चाहिए। पाक का दावा है कि उसके सुरक्षा बलों ने जाधव को तीन मार्च, 2016 को ईरान से कथित तौर पर घुसने के बाद बलूचिस्तान से गिरफ्तार किया था। भारत का कहना है कि जाधव को ईरान से अगवा किया गया था जहां नौसेना से सेवानिवृत्त होने के बाद उनके व्यापारिक हित थे।