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US-ईरान संघर्ष के बीच बड़ा दावा: PAK ने अपने एयरबेस पर छिपाए ईरानी विमान! अमेरिकी रिपोर्ट से मध्यस्थता पर सवाल

Tue, 12 May 2026 05:24 AM IST
Pavan वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: Pavan Updated Tue, 12 May 2026 05:24 AM IST
सार

अमेरिका-ईरान के बीच भले ही संघर्षविराम लागू है, लेकिन कई मौकों पर ऐसी खबरें आती है, जिससे ये संघर्षविराम टूटने की कगार पर पहुंच जाता है। अब अमेरिकी न्यूज चैनल की तरफ से दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने ईरान के विमानों को अपने एयरबेस पर छिपा कर उन्हें अमेरिकी हमलों से बचाया है। अमेरिका, ईरान और पाकिस्तान में से किसी ने भी आधिकारिक तौर पर इन दावों की पूरी पुष्टि नहीं की है, लेकिन इस रिपोर्ट के बाद क्षेत्रीय राजनीति और कूटनीति को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

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Pakistan parked Iranian planes on its airbases to escape US airstrikes: report
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

विस्तार

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच पाकिस्तान को लेकर एक बड़ा दावा सामने आया है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने ईरानी सैन्य विमानों को अपने एयरबेस पर खड़ा होने की अनुमति दी, ताकि वे अमेरिकी हवाई हमलों से बच सकें। यह दावा अमेरिकी न्यूज चैनल ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से किया है। हालांकि पाकिस्तान ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है।
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रिपोर्ट में क्या किया गया दावा?
रिपोर्ट में कहा गया है कि जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अप्रैल में युद्धविराम की घोषणा की, उसके बाद ईरान ने अपने कई सैन्य विमान पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस पर भेजे थे। इनमें एक जासूसी और खुफिया जानकारी जुटाने वाला विमान भी शामिल बताया गया है। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि इन विमानों को अमेरिकी हमलों से सुरक्षित रखने के लिए पाकिस्तान की जमीन का इस्तेमाल किया गया।
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अफगानिस्तान में भी छिपाए गए ईरान विमान
इसी रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ईरान ने अपने कुछ नागरिक विमानों को अफगानिस्तान में भी भेजा था। अफगान अधिकारियों के अनुसार, ईरानी एयरलाइन 'महान एयर' का एक विमान युद्ध शुरू होने से पहले काबुल पहुंचा और ईरानी एयरस्पेस बंद होने के बाद वहीं रुका रहा। बाद में उसे ईरान सीमा के पास हेरात एयरपोर्ट भेज दिया गया।

अमेरिकी सीनेटर ने पाकिस्तान की भूमिका पर उठाए सवाल
इन खबरों के सामने आने के बाद अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अगर यह रिपोर्ट सही है, तो अमेरिका को ईरान और दूसरे देशों के बीच मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की भूमिका पर दोबारा गंभीरता से विचार करना होगा। ग्राहम ने यह भी कहा कि पाकिस्तान के कुछ रक्षा अधिकारियों के पहले दिए गए बयानों को देखते हुए उन्हें इस खबर पर हैरानी नहीं होगी।


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पाकिस्तान ने दावों को बताया गलत
दूसरी ओर पाकिस्तान ने इन दावों को पूरी तरह गलत बताया है। पाकिस्तान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमेरिकी न्यूज चैनल से कहा कि नूर खान एयरबेस शहर के बीचों-बीच स्थित है और वहां बड़ी संख्या में विमान छिपाकर रखना संभव नहीं है, क्योंकि लोगों की नजर आसानी से पड़ सकती है। 

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान की सैन्य जरूरतों के लिए चीन पर निर्भरता काफी बढ़ गई है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2020 से 2024 के बीच पाकिस्तान को मिलने वाले बड़े हथियारों में लगभग 80 प्रतिशत चीन से आए। इसके अलावा पाकिस्तान के चीन और ईरान दोनों से करीबी संबंध हैं, इसलिए वह इस पूरे संकट में संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।

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