Pakistan: चीनी कंपनियों को खुश करने के लिए अपने कानून भी बदलने को तैयार पाकिस्तान
Pakistan: पाकिस्तान सरकार के प्रस्ताव के मुताबिक परियोजनाओं से जुड़ी चीनी कंपनियां कुल लागत का 20 फीसदी हिस्सा डॉलर के रूप में एक विशेष खाते में पाकिस्तान के सेंट्रल बैंक में जमा कराएंगी...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बढ़ती आर्थिक मुश्किलों के बीच पाकिस्तान सरकार ने फिर उम्मीद चीन से जोड़ी है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार एक प्रस्ताव पर विचार कर रही है, जिसके तहत चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) के तहत बन रही पांच परियोजनाओं की लागत का 20 फीसदी हिस्सा वह चीनी कंपनियों से पाकिस्तान के सेंट्रल बैंक में जमा करा देने को कहेगी। इससे विदेशी मुद्रा के संकट से कुछ राहत मिलेगी। देश का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार घट रहा है।
अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने एक कैबिनेट मंत्री के हवाले से बताया है कि इस प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री के स्तर पर विचार-विमर्श हो चुका है। अब इसे अंतिम रूप दिया जा रहा है। इस सिलसिले में पाकिस्तान सरकार की नजर जिन परियोजनाओं पर है, उनमें कुल मिला कर सात बिलियन डॉलर का निवेश होना है। अगर यह प्रस्ताव चीन को मंजूर हुआ, तो पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में तुरंत 1.4 बिलियन डॉलर आ जाएंगे। पाकिस्तान के अधिकारियों का कहना है कि उस स्थिति में इन परियोजनाओं पर काम भी तेजी से आगे बढ़ेगा, जिन पर अमल में अभी देर हो रही है।
पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार घट कर अब आठ बिलियन डॉलर रह गया है। उसे उम्मीद है कि जल्द ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से 1.2 बिलियन डॉलर का कर्ज मिलेगा। आईएमएफ की बैठक 29 अगस्त को होने वाली है। पाकिस्तान सरकार को आशा है कि उस बैठक में कर्ज की इस किस्त के भुगतान को हरी झंडी मिल जाएगी। लेकिन विश्लेषकों ने कहा है कि चीन से मदद लेने की ताजा पहल से आईएमएफ नाराज हो सकता है। सरकारी सूत्रों ने अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून को बताया कि इस बारे में वित्त मंत्री मिफ्ताह इस्माइल ने सरकार को आगाह किया है।
पाकिस्तान सरकार ने जो प्रस्ताव तैयार किया है, उसके मुताबिक परियोजनाओं से जुड़ी चीनी कंपनियां कुल लागत का 20 फीसदी हिस्सा अमेरिकी डॉलर के रूप में एक विशेष खाते में पाकिस्तान के सेंट्रल बैंक में जमा कराएंगी। इसमें वे जब चाहें, जरूरत के मुताबिक रकम पाकिस्तानी रुपये में निकाल सकेंगी। इस तरह इस रकम से चीनी कंपनियां अपने कर्मचारियों के वेतन का भी भुगतान कर पाएंगी। लेकिन वे डॉलर में रकम निकाल पर देश से बाहर नहीं ले जा सकेंगी। चीनी कंपनियों के इस शर्त पर राजी होने के बदले पाकिस्तान सरकार परियोजनाओं पर अमल की राह में मौजूद अड़चनों को दूर करने की जिम्मेदारी लेगी। इसके तहत उन पाकिस्तानी कानूनी को बदलना भी शामिल होगा, जिन पर चीनी कंपनियों को एतराज रहा है।
जानकारों के मुताबिक पाकिस्तान को अपनी जरुरतें पूरी करने के लिए इसी वित्त वर्ष में लगभग 40 बिलियन डॉलर का कर्ज लेना होगा। पाकिस्तान सरकार का आकलन है कि अगर आईएमएफ ने कर्ज दिया और चीनी कंपनियों ने मदद की, तो उससे कर्ज बाजार में पाकिस्तान की साख सुधरेगी। उस हालत में उसके लिए कर्ज लेना आसान हो जाएगा।
खबरों के मुताबिक ताजा प्रस्ताव पर विचार करने के बाद प्रधानमंत्री शरीफ ने बोर्ड ऑफ इन्वेस्टमेंट, योजना मंत्रालय और वित्त मंत्रालय को इस पर अमल की ठोस योजना बनाने का निर्देश दिया है। उन्होंने चीनी कंपनियों को इस योजना के बारे में विश्वास में लेने का निर्देश भी दिया है।