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पाकिस्तान: 70 साल में पहली बार बनी राष्ट्रीय सुरक्षा नीति, लेकिन विपक्ष की सहमति नहीं

Tue, 07 Dec 2021 07:21 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 07 Dec 2021 07:21 PM IST
सार

पाकिस्तानी अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक दस्तावेज में खाद्य, जल, और सैनिक सुरक्षा को समान महत्त्व देने की बात कही गई है। साथ ही जनसंख्या वृद्धि रोकने पर जोर दिया गया है। आतंकवाद, कश्मीर, और अफगानिस्तान संबंधी पाकिस्तान की नीति क्या हो, इसका भी इसमें विस्तार से जिक्र है...

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Pakistan: Pak NSA proposed National security policy but opposition does not agree
पाकिस्तान के एनएसए मोइद यूसुफ - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

पाकिस्तान में राष्ट्रीय सुरक्षा नीति के एक मसविदे को मंजूरी दे दी गई है। इसे संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के सामने पाकिस्तान सरकार के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) मोईद युसूफ ने पेश किया था। लेकिन उस मौके पर समिति के सदस्य विपक्षी सांसद मौजूद नहीं थे। विपक्ष ने सोमवार को हुई इस बैठक का बहिष्कार करने का एलान पहले ही कर दिया था।

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सात साल तक चले विचार-विमर्श के बाद बनी नीति

इस दस्तावेज में देश को आर्थिक और सैनिक सुरक्षा को केंद्रीय महत्त्व दिया गया है। युसूफ ने कहा कि पाकिस्तान जिन चुनौतियों का सामना वर्षों से कर रहा है, उनका मुकाबला करने में ये नीति सहायक होगी। पाकिस्तान में यह पहला मौका है, जब राष्ट्रीय सुरक्षा नीति तैयार करने की कोशिश की जा रही है। एनएसए ने बताया कि ये दस्तावेज सात साल तक चले विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है। इसके लागू हो जाने के बाद हर साल इसकी समीक्षा की जाएगी और बदलते वक्त के तकाजों के मुताबिक इसमें बदलाव लाया जाएगा।  

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पाकिस्तानी अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक दस्तावेज में खाद्य, जल, और सैनिक सुरक्षा को समान महत्त्व देने की बात कही गई है। साथ ही जनसंख्या वृद्धि रोकने पर जोर दिया गया है। आतंकवाद, कश्मीर, और अफगानिस्तान संबंधी पाकिस्तान की नीति क्या हो, इसका भी इसमें विस्तार से जिक्र है।
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विपक्षी दलों ने यह कह कर संसदीय समिति की बैठक का बहिष्कार किया था, चूंकि प्रधानमंत्री इमरान खान उसमें भाग नहीं लेंगे, इसलिए उसमें शामिल होने का कोई फायदा नहीं है। लेकिन सत्ताधारी दल के सांसद और कई मंत्रियों ने इस बैठक में हिस्सा लिया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक बैठक में काफी गरमागर्म चर्चा हुई। लेकिन बाद में मीडिया के लिए हुई ब्रीफिंग में सत्ताधारी नेताओं ने इस पर जोर दिया कि 70 साल में पहली बार राष्ट्रीय सुरक्षा नीति बनाने की पहल हुई है। उन्होंने कहा कि इस लिहाज से संसदीय समिति की बैठक लाभदायक रही।

आम नागरिकों की समृद्धि और सुरक्षा पर ध्यान

मोईद ने सांसदों के सामने कहा कि प्रस्तावित नीति में समग्र नजरिया अपनाया गया है। उसमें मानव सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा, और सैनिक सुरक्षा के बीच अभिन्न संबंध को समझा गया है। इसमें मुख्य रूप से आम नागरिकों की समृद्धि और सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित किया गया है। उन्होंने कहा कि मानव और सैनिक सुरक्षा में देश को अधिक निवेश करना होगा, तभी अधिक राष्ट्रीय संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे।

बाद में जारी एक सरकारी बयान में कहा गया कि बैठक में शामिल हुए सदस्यों ने राष्ट्रीय सुरक्षा नीति के मसविदे को मंजूरी दे दी। इससे अब पाकिस्तान अपनी आंतरिक और बाहरी चुनौतियों का बेहतर ढंग से मुकाबला कर सकेगा। लेकिन पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि विपक्षी दलों ने अभी तक इस दस्तावेज पर अपनी सहमति नहीं दी है। इसलिए ये कहना मुश्किल है कि एनएसए जो दस्तावेज तैयार किया है, उस पर राष्ट्रीय आम सहमति बन सकेगी।



एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकार समर्थक दल एमक्यूएम के कुछ सदस्यों ने बैठक के दौरान मानवाधिकार मंत्री शिरीन मजारी से कठिन सवाल पूछे। ये सवाल कई लोगों के गायब होने के बारे में थे। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों में तीखी बहस हुई। लेकिन इस बारे में कोई स्पष्ट जवाब सरकार की ओर से पेश नहीं किया गया।

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