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पाकिस्तान में इमरान खान के खिलाफ बना विपक्षी गठबंधन टूटता नजर आ रहा है, सेना भी कर रही मदद

Thu, 24 Sep 2020 04:34 PM IST
देव कश्यप वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: देव कश्यप Updated Thu, 24 Sep 2020 04:34 PM IST
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Pakistan opposition alliance against Imran Khan is crumbling with help from the army
पाक सेना प्रमुख जनरल कमर बाजवा और पाक प्रधानमंत्री इमरान खान - फोटो : फाइल फोटो

पाकिस्तान की राजनीति में पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की वापसी से सियासी भूचाल आया हुआ है। कुछ दिन पहले संयुक्त विपक्ष की रैली में नवाज शरीफ ने इमरान खान और पाकिस्तानी सेना को खुले तौर पर चेतावनी दी थी। इसके बाद से इमरान के मंत्रियों ने सरकार की तरफ से मोर्चा संभाला था। इसी बीच खबर आ रही है कि पाकिस्तान में विपक्षी गठबंधन को अलग-थलग करने के लिए सेना की मदद ली जा रही है।

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पाकिस्तान की राजनीति में सेनाध्यक्ष के हस्तक्षेप को चुनौती देने वाले पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के सख्त भाषण के कुछ ही दिनों के भीतर, इमरान सरकार को हटाने के लिए बनाया गया विपक्षी गठबंधन टूटता नजर आ रहा है। यह आश्चर्य की बात नहीं है, ऐसा सेना की मदद से किया जा रहा है।
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हालांकि सरकार नवाज शरीफ द्वारा लगाए गए बहुत सारे आरोपों का सामना नहीं कर पाई, यह सेना ही थी जिसने मीडिया लीक और बयानों की एक श्रृंखला के साथ कार्रवाई की, जिसने न केवल राजनीतिक गठबंधन बल्कि शरीफ की अपनी पार्टी पीएमएल-एन में भी दरार पैदा कर दी। अपने भाई शाहबाज शरीफ, जो पार्टी के अध्यक्ष भी हैं, को उनकी बेटी मरियम नवाज, जो पार्टी उपाध्यक्ष और नवाज की राजनीतिक वारिस हैं, के साथ टकराव की स्थिति खड़ा हो गया है।
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गठबंधन की एक बैठक में पूर्व प्रधानमंत्री के भाषण के बाद पहला बयान सेना प्रमुख जनरल कमर बाजवा ने स्वयं अगले दिन दिया था। चुनिंदा सांसदों से मुलाकात करते हुए बाजवा ने कहा कि 'राजनीति से जुड़े मामलों में पाकिस्तानी सेना की भूमिका नहीं है।'

बाजवा ने आगे कहा कि 'सेना ने हाल ही में पारित एफएटीएफ से जुड़े कानूनों, राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (एनएबी) के कामकाज और गिलगित-बाल्टिस्तान (जीबी) के राजनीतिक प्रस्तावों में कोई भूमिका नहीं निभाई।'

उन्होंने कहा कि वित्तीय कार्रवाई टास्क फोर्स के अनुपालन से जुड़े बिलों के एक समूह से सरकार घिर गई थी, मनी लॉन्ड्रिंग और आतंक के वित्तपोषण पर वैश्विक निगरानी, संसद के संयुक्त बैठक में उनमें से कई बिलों को सीनेट द्वारा परास्त कर दिया गया था।

बाजवा ने जोर देकर कहा कि राजनीतिक नेतृत्व इन सभी मामलों के लिए जिम्मेदार था, बाजवा ने माना कि गिलगित-बाल्टिस्तान का रणनीतिक महत्व था और इसलिए व्यापक रूप से परामर्श आवश्यक था। सरकार चुनाव कराने के साथ आगे बढ़ रही है और गिलगित-बाल्टिस्तान को प्रांत का दर्जा देने की घोषणा कर रही है। दोनों का भारत का ने विरोध किया है जो इसे जम्मू और कश्मीर के भीतर का एक क्षेत्र मानता है जो अवैध रूप से पाकिस्तान द्वारा कब्जा कर लिया गया है।


शाहबाज शरीफ और उनके परिवार के खिलाफ धनशोधन का मामला दर्ज 
वहीं, पाकिस्तान सरकार ने नेता प्रतिपक्ष शाहबाज शरीफ और उनके परिवार के खिलाफ सात अरब रुपये के धनशोधन का मामला दर्ज कराया है। शाहबाज (69) पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के छोटे भाई हैं और 2008 से 2018 के बीच पंजाब के मुख्यमंत्री रहे हैं।

समाचार पत्र 'डॉन' की खबर के मुताबिक गृह और जवाबदेही मामलों के लिए प्रधानमंत्री के सलाहकार शहजाद अकबर ने बुधवार को कहा कि पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) पीएमएमल-एन के अध्यक्ष शाहबाज और उनके बेटे हम्जा तथा सलमान फर्जी खातों के जरिए धनशोधन के मामलों में संलिप्त हैं, लेकिन वह (शाहबाज) हमेशा यह कहते रहे हैं बेटों के कारोबार से उनका कोई-लेना देना नहीं है।


अकबर ने कहा कि 'राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (एनएबी) ने एक मामला दर्ज किया है, जिसमें शाहबाज शरीफ और उनके बच्चों के खिलाफ लाहौर की एनएबी अदालत में सात अरब रुपये के धनशोधन का आरोप लगाया गया है।' उन्होंने कहा कि वित्तीय निगरानी इकाई ने शाहबाज के परिवार के 177 संदिग्ध लेन-देन का पता लगाया था, जिसके बाद एनएबी ने जांच शुरू की।

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