Pakistan: इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने 1947 से अब तक के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपतियों को मिले उपहारों पर रिपोर्ट मांगी
याचिकाकर्ता के वकील के मुताबिक पाकिस्तान सूचना आयोग ने 29 जून को इस संबंध में आदेश दिया था लेकिन पांच महीने बीत जाने के बाद भी आदेश पर अमल नहीं हो सका है।
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पाकिस्तान के निर्माण के बाद से प्रधानमंत्रियों और राष्ट्रपतियों द्वारा प्राप्त उपहारों का विवरण देने से इनकार करने पर इस्लामाबाद उच्च न्यायालय (आईएचसी) ने सोमवार को कैबिनेट डिवीजन को नोटिस जारी किया। आईएचसी ने कैबिनेट से एक महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा है। जियो न्यूज की रिपोर्ट में कहा गया है कि आईएचसी के न्यायमूर्ति मियां गुल हसन औरंगजेब ने अबुजार सलमान नियाजी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की। याचिकाकर्ता की ओर से वकील वसीम आबिद अदालत में पेश हुए। आबिद ने सुनवाई के दौरान कहा कि याचिकाकर्ता ने पाकिस्तान के राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों को अन्य देशों द्वारा दिए जाने वाले उपहारों की मांग की। कैबिनेट डिवीजन ने जानकारी देने से इनकार कर दिया और इसे गोपनीय बताया। याचिकाकर्ता के वकील के मुताबिक पाकिस्तान सूचना आयोग ने 29 जून को इस संबंध में आदेश दिया था लेकिन पांच महीने बीत जाने के बाद भी आदेश पर अमल नहीं हो सका है।
जस्टिस हसन ने सुनवाई के दौरान कहा कि आप इस उपहार को केवल राष्ट्रपति और प्रधानमंत्रियों तक ही सिमित क्यों रखना चाहते हैं? और भी लोकसेवकों ने उपहार लिए हैं उन्हें क्यों शामिल नहीं किया गया? आप अपनी मंशा को स्पष्ट कीजिए। इसपर याचिकाकर्ता ने कहा कि इस तरह की याचिका केवल प्रधानमंत्रियों के लिए होते हैं।
सरकार ने कहा-1990 के पहले का कोई रिकॉर्ड नहीं होगा
अदालत ने इसके बाद पाकिस्तान के उप अटार्नी जनरल सैयद अहसान रजा से कहा कि यदि आवश्यक जानकारी उपलब्ध हो तो उपलब्ध कराएं। हालांकि, रजा ने कहा कि ऐसी जानकारी वेबसाइट पर उपलब्ध होनी चाहिए और 1990 से पहले का कोई रिकॉर्ड नहीं होगा। तोशखाना के रिकॉर्ड उपलब्ध हो सकते हैं, अदालत ने कहा। अदालत द्वारा कैबिनेट डिवीजन से एक महीने में रिपोर्ट मांगे जाने के बाद सुनवाई स्थगित कर दी गई थी।
यह दूसरी बार है जब किसी अदालत ने इस तरह की याचिका पर कार्रवाई की
जियो न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार यह दूसरी बार है जब किसी अदालत ने इस तरह की याचिका पर कार्रवाई की है। इससे पहले दिसंबर में, लाहौर उच्च न्यायालय (एलएचसी) ने 1947 से तोशखाना से लिए गए उपहारों का ब्योरा मांगा था। नागरिक मुनीर अहमद की याचिका पर एलएचसी के न्यायमूर्ति असीम हफीज द्वारा विवरण मांगा गया था।