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'भले ही पाकिस्तान रवांडा से हार जाए पर भारत हरगिज नहीं जीतना चाहिए'

Tue, 20 Mar 2018 03:12 PM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Tue, 20 Mar 2018 03:12 PM IST
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pakistan might be lost by rawanda but it shouldn't lost by india

वैसे तो संयुक्त राष्ट्र के लिए बनाई गई खुशबाश-मस्त देशों की ताजा हैपीनेस इंडेक्स में पाकिस्तान अपने सभी हमसायों से कई प्वाइंट्स आगे है। मगर ये कोई उछलने वाली बात नहीं। क्योंकि अफगानिस्तान खुश है कि नहीं, हमें क्या? ईरान से आजकल बस दुआ-सलाम, नमस्कार की हद तक लेना-देना है। 

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वो खुश है या उदास, वो जाने। श्रीलंका, नेपाल, बांग्लादेश की खुशी-नाखुशी भी हमारे लिए दूर की कौड़ी जैसी है। असल खुशी तो ये है कि इस सूची के अनुसार भारत, पाकिस्तान जैसे मस्त देश से पक्का-पक्का 58 अंक पीछे है। अगर मामला उलटा होता तो फिर हम निराश और भारत खुश होता। 
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'भले रवांडा से ही हार जाए...'

भले डिप्लोमेसी, क्रिकेट हो या अंतरराष्ट्रीय हैपीनेस इंडेक्स, हम जीतें या न जीतें, कोई दुख नहीं। पर दूसरा हरगिज-हरगिज नहीं जीतना चाहिए, भले रवांडा से ही हार जाए... मगर हार जाए। बस यही तो हमारी जीत है, यही तो हमारी खुशी है। बिल्कुल ऐसी ही जैसे एमनेस्टी और ह्यूमन राइट्स वॉच वगैरह मानवाधिकार को लेकर कश्मीर के मुद्दे, मीडिया, पत्रकारों की कम होती आजादी और जकड़बंदियों पर जब भारत को रगेदते हैं तो हम फूले नहीं समाते- देखा हम न कहते थे, भारत को दूसरे पर उंगली उठाने से पहले अपने गिरेबां में झांकना चाहिए।
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ये रिपोर्ट भी न...

और जब यही एमनेस्टी और ह्यूमन राइट्स वॉच बगैरह बिल्कुल इसी रिपोर्ट में पाकिस्तान में अल्पसंख्यक वर्गों के रोज-ब-रोज होते बुरे हालात या गुप्तचर संस्थाओ के हाथों राजनीतिक, सामाजिक कार्यकर्ताओं के गायब हो जाने की घटनाओं की निंदा करते हैं तो उस वक्त जश्न मनाने की बारी भारत की और ये कहने की बारी हमारी होती है कि एमनेस्टी बगैरह की रिपोर्टें तो हैं ही झूठी, जिनका उद्देश्य भारत, अमेरिका और यहूदी लॉबी की शह पर पाकिस्तान को बदनाम करना है।

भारत चाहे तो मस्त-खुशबाश देशों की सूची ये कहके रद्द कर सकता है कि ऐसा कैसे हो सकता है कि जब शिक्षा, रक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक तरक्की के मैदान में पाकिस्तान हमसे पीछे है तो हमसें 58 प्वांइट्स ज्यादा खुश कैसे माना जा सकता है? जब भारत ये ऐतराज उठाएगा तो हमारे पास भी कहने को होगा कि खुशी अगर तरक्की से आती तो इस वक्त कम से कम चीन को तो पाकिस्तान से ज्यादा खुश नजर आना चाहिए था।


मगर वो इस सूची में पाकिस्तान से 11 पायदान पीछे क्यों है? तो क्या इसका मतलब ये हुआ कि तरक्की करने के बारे में सोचना ही नहीं चाहिए। क्या हमें अंतरराष्ट्रीय सर्वे और रिपोर्टों को देख कर अपनी-अपनी किस्मतों के फैसले करने चाहिए? इन सवालों पर भी समय आने पर गौर करेंगे पर अगला अंतरराष्ट्रीय सर्वे आने तक तो खुश होने दें। हां तो भारतवासियों आखिर तुम खुश नहीं हो? इस सवाल का तुम जो भी उत्तर दो हम सुनेंगे थोड़ी, क्या तुम हमारे उत्तर सुनते हो?

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