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Hindi News ›   World ›   Pakistan: Islamabad High Court decide to indictment charges against Imran Khan

Pakistan: इस्लामाबाद हाई कोर्ट के फैसले से अंदर तक हिल गई है इमरान खान की पार्टी

Sat, 10 Sep 2022 06:47 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 10 Sep 2022 06:47 PM IST
सार

Pakistan: पीटीआई के वकीलों ने अंदेशा जताया है कि हाई कोर्ट के इस रुख से उन लोगों का हौसला बढ़ेगा, जो असंवैधानिक तरीकों में यकीन करते हैं। इससे पाकिस्तान का जर्जर लोकतंत्र और कमजोर होगा...

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Pakistan: Islamabad High Court decide to indictment charges against Imran Khan
Pakistan- Imran Khan - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

पार्टी अध्यक्ष इमरान खान पर मुकदमा चलाने के इस्लामाबाद हाई कोर्ट के निर्णय से पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) अंदर तक हिल गई है। हाई कोर्ट ने अतिरिक्त जिला और सेशन जज जेबा चौधरी के खिलाफ इमरान खान की विवादास्पद टिप्पणियों के मामले में उन पर अभियोग तय करने का फैसला किया है। पांच जजों की बेंच ने इस मामले में हाई कोर्ट में पेश खान के जवाब को ‘असंतोषजनक’ माना। इस फैसले से पीटीआई और उसकी लीगल टीम सदमे में बताई जाती है। उन्हें यकीन नहीं था कि हाई कोर्ट का ऐसा रुख सामने आएगा।

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हाई कोर्ट ने जेबा चौधरी के खिलाफ इमरान खान की टिप्पणियों को ‘भड़काऊ’ माना है। कोर्ट ने कहा कि जिला न्यायपालिका उसके लिए ‘रेड लाइन’ है, जिसे पार करने वालों को वह नहीं बख्श सकता। ये फैसला उस समय आया, जब इमरान खान ‘हकीकी आजादी’ की अपनी मुहिम के आखिर चरण में थे। शुक्रवार को इस मुहिम के तहत गुजरांवाला में उनकी आखिरी रैली हुई। रैली को संबोधित करते समय खान ने खुद को हाई कोर्ट के फैसले से बेपरवाह दिखाने की कोशिश की। उन्होंने यह एलान भी कर दिया कि वे अपनी अगली सियासी मुहिम का एलान जल्द ही करेंगे।

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लेकिन हाई कोर्ट ने जब गुरुवार को फैसला दिया, उस समय इमरान खान की परेशानी साफ उनके चेहरे पर झलक रही थी। उस समय खान कोर्ट में निजी तौर पर मौजूद थे। फैसला सुनाए जाते समय उन्होंने अपने वकील शोएब शाहीन से कई बार कहा कि वे अपना पक्ष रखने की इजाजत मांगे। एक मौके पर इमरान खान खड़े हो गए और अपनी बात कहने की इजाजत बेंच से मांगी। लेकिन जजों ने उनकी ये गुजारिश ठुकरा दी।

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इमरान खान की सरकार के दौरान अटार्नी जनरल रहे तारिक खोखर ने शुक्रवार को कहा कि इस फैसले से न तो न्यायपालिका की गरिमा बढ़ेगी और न ही लोगों की नजर में उसकी साख बढ़ेगी। अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा- ‘1978 में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो को फांसी की सजा सुनाने से पहले लगातार तीन दिन तक कोर्ट में बोलने की इजाजत दी थी, जबकि उस समय देश में मार्शल लॉ लागू था। इस बार हाई कोर्ट ने इमरान खान को एक वाक्य भी कहने की अनुमति नहीं दी।’

पीटीआई के वकीलों ने अंदेशा जताया है कि हाई कोर्ट के इस रुख से उन लोगों का हौसला बढ़ेगा, जो असंवैधानिक तरीकों में यकीन करते हैं। इससे पाकिस्तान का जर्जर लोकतंत्र और कमजोर होगा। इमरान खान की लीगल टीम के एक सदस्य ने एक्सप्रेस ट्रिब्यून से बातचीत में स्वीकार किया कि हाई कोर्ट के इस फैसले से उन्हें हैरत हुई है।

इमरान खान के खिलाफ ये मुकदमा वरिष्ठ वकीलों ने दायर कराया था। उनकी दलील है कि एक जनसभा में अपने भाषण के दौरान इमरान खान ने जिला जज के खिलाफ जो बातें कहीं, वो कोर्ट की तौहीन हैं। अब पीटीआई से जुड़े वकीलों ने कहा है कि हाई कोर्ट के फैसले से साफ हो गया है कि पूरा ‘सिस्टम’ इमरान खान के खिलाफ लामबंद हो चुका है।

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