Pakistan: पाकिस्तान का सिरदर्द बढ़ा, आईएमएफ से तुरंत कर्ज मिलने की संभावना नहीं
आईएमएफ ने कहा है कि वह पाकिस्तान को मंजूर हुए कर्ज को जारी करने पर बातचीत 31 दिसंबर 2022 तक की पाकिस्तान की वित्तीय स्थिति के बारे में पूरा विवरण मिलने के बाद ही शुरू करेगा...
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पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से जल्द कर्ज मिलने की उम्मीद नहीं है। जबकि उसका विदेशी मुद्रा का संकट लगातार गहराता जा रहा है। इस वित्त वर्ष में पाकिस्तान को लगभग आठ बिलियन डॉलर का कर्ज चुकाना है। इसके अलावा चालू खाता संबंधी देनदारियां भी पूरी करनी हैं। जबकि उसके विदेशी मुद्रा भंडार में इससे काफी कम रकम बची है।
इस बीच आईएमएफ ने पाकिस्तान से उसकी मौजूदा बजटीय स्थिति के बारे में जानकारी मांगी है। आईएमएफ ने कहा है कि वह पाकिस्तान को मंजूर हुए कर्ज को जारी करने पर बातचीत 31 दिसंबर 2022 तक की पाकिस्तान की वित्तीय स्थिति के बारे में पूरा विवरण मिलने के बाद ही शुरू करेगा। आईएमएफ के इस रुख से पाकिस्तान सरकार की चिंता बढ़ गई है।
पाकिस्तान सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अखबार द न्यूज से कहा- ‘कर्ज चुकाने और मौजूदा वित्त वर्ष में चालू खाता घाटे को भरने के लिए दस बिलियन डॉलर तक की विदेशी मुद्रा चाहिए। आईएमएफ की मदद के बिना इसे जुटा पाना संभव नहीं है।’ पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने इसी अखबार से बातचीत में पुष्टि की कि आईएमएफ ने पाकिस्तान की वित्तीय हालत के बारे में अतिरिक्त जानकारियां मांगी हैं।
इस बीच पाकिस्तान सरकार ने गैस सेक्टर के चक्रीय ऋण को खत्म करने की योजना बनाई है। आईएमएफ ने ऐसा करने की शर्त लगाई थी। इस ऋण को खत्म करने का मतलब यह है कि गैस के आयात के लिए सरकारी ऋण नहीं मिलेगा। इसलिए देश के अंदर उसकी बिक्री आयात अंतरराष्ट्रीय बाजार के मूल्य के अनुपात में करनी होगी। इसका अर्थ है कि पाकिस्तान में प्राकृतिक गैस के मूल्य में तेज बढ़ोतरी होगी।
पाकिस्तान में वित्त वर्ष जुलाई से जून तक होता है। अगले 30 जून तक पाकिस्तान सरकार पर विदेश मुद्रा के तहत जो देनदारी है, उसे पूरा करने के लिए उसे लगभग 10 बिलियन डॉलर जुटाने होंगे। ऐसा न होने पर पाकिस्तान डिफॉल्ट करने (कर्ज चुकाने में अक्षम होने) पर मजबूर हो जाएगा। इसका हवाला देते हुए पिछले दिनों पाकिस्तान सरकार ने आईएमएफ के पासा तुरंत कर्ज जारी करने का अनुरोध पत्र भेजा था। उसके जवाब में आईएमएफ ने अतिरिक्त जानकारियां मांगी हैं।
बीते वर्ष आईएमएफ अपनी विस्तारित ऋण सुविधा के तहत पाकिस्तान को लगभग सात बिलियन डॉलर देने पर राजी हो गया था। लेकिन कई शर्तें लगाते हुए उसने कहा था कि उन शर्तों को पूरा करने के बाद ही वह कर्ज की रकम जारी करेगा। इस बीच पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति बिगड़ती जा रही है।
स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने अपने ताजा मौद्रिक नीति संबंधी दस्तावेज में स्वीकार किया है कि विदेशी देनदारी पूरी करने के मोर्चे पर पाकिस्तान की चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पाकिस्तान को इस वित्त वर्ष में 23 बिलियन डॉलर विदेशी कर्जदाताओं को चुकाने हैं। इसमें से वह 15 बिलियन डॉलर की देनदारी पूरी कर चुका है। बाकी आठ बिलियन डॉलर का ऋण उसे चुकाना है। इसके अलावा चालू खाता संबंधी देनदारियां भी हैं। अधिकारियों के मुताबिक इस वित्त वर्ष में पाकिस्तान का चालू खाता घाटा नौ बिलियन डॉलर तक रह सकता है।