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Pakistan: 'जीवन के अधिकार का उल्लंघन हुआ', हाईकोर्ट ने इमरान खान की पत्नी को अडियाला जेल भेजने का दिया आदेश

Fri, 10 May 2024 03:25 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: नितिन गौतम Updated Fri, 10 May 2024 03:25 PM IST
सार

अपने 15 पेज के आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार ने सामान्य जेल की सजा को कठोर सजा बना दिया और बुशरा बीबी के जीवन के अधिकार का उल्लंघन भी किया, जिसकी गारंटी संविधान का अनुच्छेद 9 देता है।

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इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी - फोटो : एएनआई

विस्तार

पाकिस्तान के एक हाईकोर्ट ने कहा कि इमरान खान की पत्नी बुशरा बीबी को उप-जेल में रखने से उनके जीवन के अधिकार का उल्लंघन हुआ है। हाईकोर्ट ने कहा बुशरा बीबी को अन्य कैदियों से बात करने की अनुमति नहीं थी, जिसके चलते उनकी सजा सामान्य कैद से कहीं ज्यादा कठोर बन गई। हाईकोर्ट ने बुशरा बीबी को रावलपिंडी की अडियाला जेल में शिफ्ट करने का आदेश दिया। 
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हाईकोर्ट ने बुशरा बीबी को अडियाला जेल भेजने का दिया आदेश
पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को तोशाखाना मामले में 14 साल जेल की सजा हुई थी। हालांकि बाद में यह सजा रद्द हो गई। वहीं गैर इस्लामिक विवाह के मामले में भी बुशरा बीबी और इमरान खान दोषी हैं। इन मामलों में इमरान खान जहां रावलपिंडी की अडियाला जेल में बंद हैं, वहीं उनकी पत्नी बुशरा बीबी इस्लामाबाद में उनके घर बनी गाला में बनी अस्थायी जेल में बंद थी। बुशरा बीबी ने बीते दिनों हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उन्हें भी अडियाला जेल में बंद करने की मांग की थी। इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को अपने आदेश में बुशरा बीबी को उप-जेल से अडियाला जेल भेजने का आदेश दिया।
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'मौलिक अधिकार का उल्लंघन हुआ'
अपने आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि उपजेल में बुशरा बीबी का मौलिक अधिकार यानी जीवन के अधिकार का उल्लंघन हो रहा था। अपने 15 पेज के आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार ने सामान्य जेल की सजा को कठोर सजा बना दिया और बुशरा बीबी के जीवन के अधिकार का उल्लंघन भी किया, जिसकी गारंटी संविधान का अनुच्छेद 9 देता है। हाईकोर्ट ने कहा उप-जेल में बुशरा बीबी को एकांतवास में रखा गया और उन्हें अन्य कैदियों से बात नहीं करने दी गई। साथ ही पूरे बनी गाला को उपजेल घोषित कर दिया गया और न बुशरा बीबी और न ही उनके पति के बच्चे और परिवार के अन्य सदस्य भी आजादी से घर में नहीं घूम सकते थे। 
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कोर्ट ने कहा बनी गाला को उप-जेल बनाने से पहले संपत्ति के मालिक की भी मंजूरी नहीं ली गई। इस तरह सरकार ने घर के मालिक के मौलिक अधिकार का उल्लंघन किया। कोर्ट ने बनी गाला को उपजेल बनाने के आदेश को भी रद्द कर दिया। 
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