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Pakistan: जन आक्रोश को संभालें या आईएमएफ को खुश रखें- पाकिस्तान सरकार की मुश्किल

Fri, 07 Oct 2022 05:58 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 07 Oct 2022 05:58 PM IST
सार

Pakistan: आईएमएफ ने पाकिस्तान सरकार को चेतावनी दी थी कि वह नीति संबंधी अपने वायदों पर कायम रहे। पाकिस्तान के लिए आईएमएफ की प्रतिनिधि एस्टर पेरेज ये बात याद दिलाई कि पाकिस्तान और आईएमएफ के बीच जिन शर्तों पर समझौता हुआ था, उनमें कोई बदलाव नहीं किया गया है...

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Pakistan government trouble- Handle public outrage or keep IMF happy
Pakistan: Shahbaz Sharif - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

घर संभालें या बाहर- पाकिस्तान की शहबाज शरीफ ये मुश्किल बढ़ती जा रही है। हाल में सरकार ने देश के अंदर पेट्रोलियम शुल्क घटा कर कुछ तबकों को राहत देने की कोशिश की। उस पर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने उसे कड़ी फटकार लगाई। उसके बाद अब पाकिस्तान सरकार आईएमएफ के सामने सफाई पेश करती नजर आ रही है।

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आईएमएफ का बयान आने के कुछ घंटों के अंदर ही पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय में राज्यमंत्री आयशा ग़ौस पाशा को सरकार का बचाव करने के लिए सामने आना पड़ा। उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम पर शुल्क में छूट से सरकार को राजस्व का जो भी नुकसान होगा, सरकार आने वाले महीनों में उसकी भरपाई करेगी। पाशा ने ये बयान पाकिस्तान की संसद नेशनल असेंबली की वित्त मंत्रालय की स्थायी समिति के सामने दिया।

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इसके पहले आईएमएफ ने पाकिस्तान सरकार को चेतावनी दी थी कि वह नीति संबंधी अपने वायदों पर कायम रहे। पाकिस्तान के लिए आईएमएफ की प्रतिनिधि एस्टर पेरेज ये बात याद दिलाई कि पाकिस्तान और आईएमएफ के बीच जिन शर्तों पर समझौता हुआ था, उनमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। उन्होंने कहा- ‘आईएमएफ के सहायता कार्यक्रम के तहत सातवीं और आठवीं समीक्षा के दौरान पाकिस्तानी अधिकारियों ने जो वादा किया था, वे अभी भी लागू हैं।’ पेरेज ने यह टिप्पणी इस सवाल के जवाब में की कि पाकिस्तान सरकार ने हाल में ईंधन के मूल्यों में जो कटौती की, क्या उस पर उसने पहले आईएमएफ से विचार-विमर्श किया था।

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इसके पहले पाकिस्तान के नए वित्त मंत्री इशहाक डार ने अगले पखवाड़े के लिए पेट्रोलियम की कीमत में पांच फीसदी कटौती का एलान किया था। जबकि यह शुल्क आईएमएफ की शर्तों के तहत सरकार का राजस्व बढ़ाने के लिए लगाया गया था। हालांकि अभी ये मुद्दा चर्चा में नहीं आया है, लेकिन पर्यवेक्षकों की राय है कि किसानों का विरोध प्रदर्शन खत्म कराने के लिए सरकार ने कृषि क्षेत्र को बिजली शुल्क में जो छूट देने की इस हफ्ते घोषणा की है, वह भी आईएमएफ को नागवार गुजर सकता है।

आईएमएफ की टिप्पणी आने के बाद पाशा ने कहा- ‘हमने आईएमएफ के साथ हुए समझौते का उल्लंघन नहीं किया है। पेट्रोलियम शुल्क के लक्ष्य तय को पूरा करने के लिहाज से हाल की छूट से जो कमी आएगी, उसे पूरा करने के लिए हमारे पास दिसंबर तक का समय है।’ इसके पहले पूर्व वित्त मंत्री मिफ्ताह इस्माइल ने शुल्क में छूट देने के नए वित्त मंत्री के फैसले की कड़ी आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि इसका असर आईएमएफ के सहायता प्रोग्राम पर पड़ेगा। इस्माइल को ही हटा कर इशहाक डार को देश का नया वित्त मंत्री बनाया गया है।

इस बीच शरीफ सरकार के लिए खुद उसके एक अधिकारी की तरफ से दी गई जानकारी से भी घिरती नजर आ रही है। वित्त सचिव हामिद याकूब शेख ने बताया है कि जुलाई-अगस्त में पेट्रोलियम पर नए शुल्क से 22 अरब रुपयों का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हुआ। सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष में कुल 855 अरब रुपयों की उगाही का लक्ष्य रखा है। जुलाई-अगस्त की उगाही इस लक्ष्य के लिहाज से काफी कम है। माना जा रहा है कि ये आंकड़ा आईएमएफ के साथ अगली बातचीत में सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी करेगा।

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