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Pakistan: विदेश मंत्री इशाक डार बने पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री, नवाज शरीफ के करीबी हैं पीएमएलएन नेता
Sun, 28 Apr 2024 06:27 PM IST
जलज मिश्रा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
Published by: जलज मिश्रा
Updated Sun, 28 Apr 2024 06:27 PM IST
सार
कैबिनेट डिवीजन द्वारा जारी एक अधिसूचना के अनुसार, डार को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के आदेश से उप प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त किया गया है।
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इसाक डार
- फोटो : Pti
विस्तार
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार को सरकार में अब नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें पाकिस्तान का उप प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया है। कैबिनेट डिवीजन द्वारा जारी एक अधिसूचना के अनुसार, डार को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के आदेश से उप प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त किया गया है।
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नवाज शरीफ के चहेते हैं डार
बता दें, डार कश्मीरी मूल के नागरिक हैं। वे पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के वरिष्ठ नेता हैं। वह पार्टी प्रमुख और तीन बार प्रधानमंत्री रह चुके नवाज शरीफ के विश्वासपात्र भी माने जाते हैं।
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भारत के साथ व्यापार करने को लेकर उत्सुक रहे डार
पाकिस्तान के विदेश मंत्री के रूप में डार ने पिछले माह के आखिर में कहा था कि भारत और पाकिस्तान के बीच अगस्त 2019 से व्यापार संबंध रुके हुए हैं। इन संबंधों को बहाल करने पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। उन्होंने भारत के साथ व्यापार गतिविधियों को शुरू करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के कारोबारी भारत के साथ फिर से व्यापार शुरू करना चाहते हैं। डार के अनुसार पाकिस्तान भारत के साथ व्यापार संबंध बहाल करने पर गंभीरता से विचार करेगा।
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वित्त मंत्री के रूप में डार की काफी आलोचना
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इससे पहले, पिछली दो सरकारों में डार वित्त मंत्री रह चुके हैं। वित्त मंत्री के तौर पर डार की काफी आलोचना हुई थी। पाकिस्तान में आए आर्थिक संकट के कारण उनका काफी विरोध हुआ था। कहा जाता है कि आईएमएफ की चिंताओं को नजरअंदाज करने के कारण पाकिस्तान की वित्तीय हालत खराब हुई है। शुरुआत में अंदरखाने चर्चाएं थीं कि उन्हें संसद के ऊपरी सदन सीनेट का अध्यक्ष बनाया जा सकता है लेकिन पीपीपी के साथ गठबंधन के बाद सीनेट अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चाएं खत्म हो गईं थी। दरअसल, गठबंधन के कारण सीनेट अध्यक्ष का पद पीपीपी की झोली में चला गया। इसके बाद उन्हें विदेश मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया।