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Pakistan: पाकिस्तान की कंगाली में जानलेवा हुआ ‘आटा’, रोजमर्रा की जरूरत की चीजों के दाम छू रहे आसमान

Thu, 30 Mar 2023 07:53 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Thu, 30 Mar 2023 07:53 PM IST
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सार
पाकिस्तान में पंजाब सूबे के साहीवाल, बहावलपुर, मुजफ्फरगढ़ और ओकरा जिलों में मंगलवार को मुफ्त आटा केंद्रों पर भगदड़ मच गई। इस दौरान एक वृद्ध महिला और एक पुरुष की मौत हो गई, जबकि 45 महिलाओं सहित 56 लोग घायल हो गए। 
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Pakistan: Flour becomes deadly in Pakistan, country faces severe flour crisis, daily needs prices skyrocketing
pakistan flour crisis - फोटो : SOCIAL MEDIA

विस्तार

पाकिस्तान में आर्थिक हालात पहले ही दयनीय थे कि अब लोगों को आटे के लिए अपनी जान तक गंवानी पड़ रही है।मंगलवार को पंजाब प्रांत में मुफ्त आटा केंद्रों पर मची भगदड़ में एक वृद्ध महिला और एक पुरुष की मौत हो गई। इस दौरान 45 महिलाओं सहित 56 लोग घायल भी हो गए। दूसरी ओर देश के बड़े किसान संगठन पाकिस्तान किसान इत्तेहाद (पीकेआई) ने कहा है कि अगर कृषि उत्पादन के मुद्दे हल नहीं हुए तो पाकिस्तान की खाद्य सुरक्षा दांव पर लग सकती है।

pakistan flour crisis
pakistan flour crisis - फोटो : AMAR UJALA
आटे को लेकर पाकिस्तान में क्या हुआ है?
पंजाब सूबे के साहीवाल, बहावलपुर, मुजफ्फरगढ़ और ओकरा जिलों में मंगलवार को मुफ्त आटा केंद्रों पर भगदड़ मच गई। इस दौरान एक वृद्ध महिला और एक पुरुष की मौत हो गई, जबकि 45 महिलाओं सहित 56 लोग घायल हो गए। यह घटना तब हुई जब लोगों ने वितरण केंद्रों पर आटा लेने के लिए अचानक दौड़ शुरू कर दी। वहीं कायद-ए-आजम स्टेडियम में आटा वितरण केंद्र में मंगलवार तड़के 45 महिलाओं को चोटें आईं।

flour crisis in pakistan
flour crisis in pakistan - फोटो : SOCIAL MEDIA
आटे के लिए भगदड़ क्यों मची?
भगदड़ की वजह लाभार्थियों को सत्यापित करने के लिए उपयोग किए जाने वाले ऐप में आई तकनीकी खराबी बताई गई। इसके कारण मुफ्त आटा वितरण में लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। बताया जाता है कि ऐप लिंक डाउन रहा और तीन से चार घंटे तक दोबारा शुरू नहीं हुआ और स्टेडियम में 1500 से ज्यादा महिलाएं मौजूद थीं जो आटा लेने आईं थीं। कई महिलाओं ने केंद्र में गड़बड़ी के लिए पुलिस को दोषी ठहराया और कहा कि केंद्र में तैनात सिविल लाइंस पुलिसकर्मियों ने नागरिकों के साथ मारपीट की और लाठी चार्ज करना शुरू कर दिया। इसके बाद अव्यवस्था के चलते भगदड़ मच गई।

एक चश्मदीद ने कहा कि प्रशासन का ऐप डाउन हो गया, भीड़ और लंबी कतारों में फंसे लोगों ने बेचैनी से चिल्लाना शुरू कर दिया। पुलिस ने स्थिति को शांत करने की कोशिश की, लेकिन स्थिति को सामान्य करने के बजाय, उन्होंने लाठीचार्ज शुरू कर दिया। इसी दौरान पुलिसकर्मियों ने महिलाओं को थप्पड़ मारा और धक्का-मुक्की की, जिससे भीड़ और भी भड़क गई, जिससे स्थिति और बिगड़ गई और भगदड़ मच गई। सूबे के कार्यवाहक मुख्यमंत्री मोहसिन नकवी ने आटा वितरण केंद्र पर महिला की मौत पर संज्ञान लिया और भगदड़ की जांच के आदेश दिए हैं।

पाकिस्तान में खाने का संकट
पाकिस्तान में खाने का संकट - फोटो : Social Media
क्या पाकिस्तान खाद्य संकट की ओर बढ़ रहा है?
इसी बीच, पाकिस्तान किसान इत्तेहाद (पीकेआई) के अध्यक्ष खालिद महमूद खोखर ने चेतावनी दी है कि अगर कृषि उत्पादन को बढ़ावा नहीं दिया गया और इसके मुद्दे अनसुलझे रहे तो पाकिस्तान की खाद्य सुरक्षा दांव पर लग सकती है। बुधवार को कराची में उन्होंने भगदड़ की घटनाओं पर दुख व्यक्त किया। खालिद ने कहा, 'गरीब लोग रियायती दरों पर गेहूं का आटा खरीदने के लिए कतारों में मर रहे हैं, इसका श्रेय नीति निर्माताओं की लापरवाही को जाता है, जो कृषि क्षेत्र के विकास पर उचित ध्यान देकर खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने पर ध्यान नहीं देते हैं।'

उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान कम गुणवत्ता वाले गेहूं का आयात कर रहा है, जबकि दुनिया का सबसे अच्छा अनाज उगाने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि कृषि अर्थव्यवस्था होने के बावजूद हमें स्थानीय कमी को पूरा करने के लिए गेहूं, चीनी और सब्जियों सहित खाद्य आयात पर सालाना अरबों डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। पीकेआई के अध्यक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि पाकिस्तान को आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाना चाहिए जैसा कि भारत, मलेशिया और ब्राजील जैसे देशों ने खाद्य आपूर्ति का एक स्थायी स्रोत विकसित करने के लिए किया था।

पाकिस्तान महंगाई
पाकिस्तान महंगाई - फोटो : फाइल फोटो
महंगाई भी बढ़ रही है
इधर आसमान छूती कीमतों के कारण पाकिस्तान में लोग रमजान भी ठीक से नहीं मना पा रहे हैं। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि लोगों की घटती क्रय शक्ति के कारण कई खाद्य पदार्थों की बिक्री पिछले साल की तुलना में इस रमजान में बहुत कम हो रही है। यहां एक परंपरा है कि लोग राशन के पैकेट तैयार करते हैं और उन्हें रमजान के दौरान जरूरतमंदों में बांटते हैं। हालांकि, बढ़े हुए बिजली के बिल, गैस टैरिफ और पेट्रोलियम की बढ़ती कीमतें बड़ी संख्या में लोगों को इस साल गरीबों की मदद करने में असमर्थ हैं।

जोड़ा बाजार के एक व्यापारी शकील अहमद ने कहा कि दाल, चावल, चीनी आदि विभिन्न वस्तुओं की बिक्री पिछले साल की तुलना में अब 60 फीसदी कम है। इसी तरह अन्य वस्तुओं जैसे घी और खाना पकाने के तेल, चाय, आटा आदि की बिक्री भी उम्मीद से कम रही। उन्होंने कहा, 'जब व्यक्ति को अपने ही परिवार के लिए भोजन की व्यवस्था करने में समस्या का सामना करना पड़ रहा है, तो वह दूसरों के लिए राशन बैग की व्यवस्था कैसे कर सकता है।'

रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम कई गुना बढ़े
देश के कई शहरों में उच्च गुणवत्ता वाले बासमती चावल की कीमत 370-380 रुपये प्रति किलोग्राम, आटा 140-160 रुपये प्रति किलोग्राम, चीनी 110 रुपये प्रति किलोग्राम, मूंग दाल 245-260 रुपये प्रति किलोग्राम, मसूर 240-245 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहा है। वहीं, अच्छी गुणवत्ता वाले घी और खाना पकाने के तेल की कीमत पिछले साल 400-490 रुपये प्रति लीटर से 550-680 रुपये प्रति लीटर के बीच है। चीनी पिछले साल के 83-95 रुपए किलो के मुकाबले 110-120 रुपए किलो बिक रही है। एक अच्छी गुणवत्ता वाला चाय पैक (250 ग्राम से कम) अब 250-260 रुपये की तुलना में 413-558 रुपये में बिक रहा है। एक किलो गेहूं का आटा पिछले साल के 65-75 रुपये किलो के मुकाबले अब 140-160 रुपये में बिक रहा है।
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