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Pakistan Election: 1985 में निर्दलियों से बनी थी पूरी संसद, क्या इस बार इमरान समर्थक आजाद बनाएंगे सरकार?

Sat, 10 Feb 2024 06:16 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Sat, 10 Feb 2024 06:16 PM IST
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सार
Pakistan election 2024: पाकिस्तान में हुए आम चुनाव के नतीजों में पीटीआई समर्थित उम्मीदवारों ने सबसे ज्यादा सीटें जीती हैं। अब सवाल है कि यह है कि क्या निर्दलीय विजेता सरकार बना पाएंगे? समझते हैं...
 
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Pakistan election 2024: Can independents elects make independent Prime minister
पाकिस्तान आम चुनाव - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

पाकिस्तान में हुए आम चुनाव के नतीजे आ रहे हैं। गुरुवार को 855 निर्वाचन क्षेत्रों में नेशनल असेंबली (NA) और प्रांतीय विधानसभाओं (PA) के लिए मतदान हुआ था। इसके बाद बीते दो दिन से वोटों की गिनती हो रही है। सबकी नजरें संसद के निचले सदन नेशनल असेंबली के नतीजों पर हैं जहां कुल 266 सीटों के लिए चुनाव हुए थे। 


अब तक के नतीजों में सबसे ज्यादा सीटें पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) समर्थित उम्मीदवारों ने जीती हैं। दूसरे नंबर पर नवाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) है। पीएमएल-एन सुप्रीमो नवाज शरीफ ने अपने भाषण में गठबंधन सरकार बनाने की इच्छा का संकेत दिया है। वहीं, इमरान समर्थकों ने  आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग धांधली कर रहा है। इस वजह से आधिकारिक तौर पर सभी नतीजे घोषित होने में हो रही देरी हो रही है।


इन तमाम परिस्थितियों के बीच सबसे बड़ा सवाल है कि क्या निर्दलीय विजेता सरकार बना पाएंगे? देश में सरकार किसकी होगी? प्रधानमंत्री कौन बनेगा? इमरान खान की पार्टी पीटीआई के पास अब क्या विकल्प हैं? जानते हैं सब कुछ... 

पाकिस्तान चुनाव
पाकिस्तान चुनाव - फोटो : Amar Ujala
क्या पाकिस्तान के आम चुनाव में कभी बड़ी संख्या में निर्दलीय जीते हैं?
पत्रकार वुसअतुल्ला खान ने डॉन अखबार को बताया कि जनरल जियाउल हक के समय में पूरी संसद निर्दलियों से बनी थी। 1985 में बिना पार्टी के चुनाव हुए थे। किसी भी दल को चुनाव में भाग लेने की अनुमति नहीं दी गई थी और सभी ने अपनी व्यक्तिगत क्षमता से चुनाव लड़ा था। वुसअतुल्लाह के अनुसार, हर उम्मीदवार को किसी न किसी का समर्थन प्राप्त था लेकिन कागज पर वे सभी निर्दलीय थे।
जीते हुए उम्मीदवार संसद के पटल पर गए और उन्होंने अपने समूह या पार्टी को पाकिस्तान मुस्लिम लीग का नाम दिया। आज इन्हें पीएमएल-एन या पीएमएल-क्यू कहा जाता है। 
 

अब पीटीआई समर्थित उम्मीदवार क्या करेंगे?
पत्रकार वुसअतुल्ला कहते हैं कि समर्थित निर्दलीय लोग पर्याप्त संख्या में सीटें जीतते हैं लेकिन नेशनल असेंबली में वे एक समूह बनाने की कोशिश करेंगे। ये लोग इंसाफ समूह या कोई अन्य नाम देंगे।

क्या जीते हुए उम्मीदवार पीटीआई सदस्य के रूप में दावा कर सकते हैं?
पत्रकार जर्रार खुहरो डॉन अखबार में कहते हैं कि चीजें नियमों और कानून के हिसाब से चलती हैं, लेकिन यह बिल्कुल स्पष्ट है कि पाकिस्तान में ऐसा नहीं है। उन्होंने पार्टी और उसके सामने आने वाली परेशानियों की ओर इशारा किया। खुहरो ने कहा, 'हमें इसे इमरान खान के लिए सुनाई गई सजाओं के संदर्भ में देखना होगा। हमें पीटीआई नेताओं और समर्थकों को दी गई सजाओं को देखना होगा। पार्टी का चुनाव चिह्न भी छीन लिया गया। जब हम उस विशेष संदर्भ को देखते हैं, तो मुझे कोई रास्ता नहीं दिखता कि पीटीआई के लिए कोई राहत होगी, चाहे वे किसी भी नियम का पालन करें या न करें।'

वकील अब्दुल मोइज जाफरी ने तर्क दिया कि भले ही पाकिस्तान चुनाव आयोग (ईसीपी) ने पीटीआई को चुनाव चिह्न देने से इनकार कर दिया था, लेकिन उसने पार्टी को सूची से बाहर नहीं किया था। जाफरी ने कहा कि कानूनी तौर पर पीटीआई एक राजनीतिक दल बनी हुई है। सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका में तर्क दिया गया था कि एक राजनीतिक दल के रूप में पार्टी का अस्तित्व कायम है और इसे भंग नहीं किया गया है।

क्या पीटीआई से जुड़े निर्दलीय अपने बीच से पीएम चुन सकते हैं?
पत्रकार शाहजेब जिलानी के अनुसार एक बार जीते हुए उम्मीदवारों को सूचित कर दिया जाता है, तो उनके पास यह तय करने के लिए तीन दिन का समय होता है। इस दौरान उम्मीदवारों के सामने विकल्प होंगे कि क्या वे निर्दलीय के रूप से किसी राजनीतिक दल का समर्थन करना चाहते हैं या एक समूह के रूप में किसी पार्टी में शामिल होना चाहते हैं।

पत्रकार शाहजेब जिलानी के अनुसार, अगर पीटीआई समर्थित निर्दलीय संसद में सबसे बड़े समूह के रूप में उभरना चाहते हैं, तो उन्हें मौजूदा राजनीतिक दल में शामिल होना होगा। उन्होंने कहा कि मजलिस वहदत-ए-मुस्लिमीन (एमडब्ल्यूएम) पार्टी का नाम का उल्लेख किया जा रहा है। एमडब्ल्यूएम पहले से ही एक पंजीकृत पार्टी है। दोनों पार्टियों ने पहले स्थानीय निकाय चुनावों के लिए गठबंधन किया है। यदि निर्दलीय उस पार्टी में शामिल होते हैं, तो उन्हें आरक्षित सीटें भी मिलेंगी और उनकी संख्या और बढ़ जाएगी और फिर वे सदन के नेता के दावेदार हो सकते हैं।

पीटीआई समर्थित उम्मीदवारों के पास और क्या विकल्प हैं? 
पत्रकार शाहजेब जिलानी ने अपने बीच से विपक्ष का नेता चुनने के मुद्दे पर बात की। जिलानी ने कहा कि इसके लिए भी पीटीआई को एक राजनीतिक दल में शामिल होना होगा। अगर वे मौजूदा पार्टियों में से एक में एक गुट के रूप में जाते हैं, तो जाहिर तौर पर वे सदन के नेता का चुनाव करना चाहेंगे, अगर उनके पास सबसे बड़ी संख्या है। यदि वे किसी कारण से ऐसा नहीं कर सकते हैं, तो दूसरा सबसे अच्छा विकल्प विपक्ष के नेता को चुनना होगा।
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