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पाकिस्तान: इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने जाधव मामले की सुनवाई 5 अक्तूबर तक के लिए टाली

Wed, 16 Jun 2021 12:07 PM IST
दीप्ति मिश्रा पीटीआई, इस्लामाबाद
पीटीआई, इस्लामाबाद Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Wed, 16 Jun 2021 12:07 PM IST
सार

इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल (एजीपी) खालिद जावेद खान के अनुरोध पर जाधव के लिए वकील नियुक्त करने की सरकार की याचिका पर सुनवाई मंगलवार को 5 अक्तूबर तक के लिए स्थगित कर दी।

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Pakistan court adjourns Kulbhushan Jadhav s case till October 5
कुलभूषण जाधव

विस्तार

पाकिस्तान की एक अदालत ने देश के शीर्ष विधि अधिकारी के अनुरोध पर भारतीय कैदी कुलभूषण जाधव के लिए वकील नियुक्त करने संबंधी सरकार की याचिका पर सुनवाई 5 अक्तूबर तक के लिए स्थगित कर दी। एक मीडिया रिपोर्ट से यह जानकारी मिली।

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भारतीय नौसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने जासूसी एवं आतंकवाद के आरोपों में अप्रैल, 2017 में दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई थी। भारत ने 50 वर्षीय जाधव को राजनयिक पहुंच न देने और मौत की सजा को चुनौती देने के लिए पाकिस्तान के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अदालत (आईसीजे) का रुख किया था।
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द हेग स्थित आईसीजे ने जुलाई, 2019 में फैसला दिया कि पाकिस्तान को जाधव को दोषी ठहराने और सजा सुनाने संबंधी फैसले की 'प्रभावी समीक्षा एवं पुनर्विचार' करना चाहिए। बिना किसी देरी के भारत को जाधव के लिए राजनयिक पहुंच उपलब्ध कराने देने का भी अवसर दिया जाना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने अपने वर्ष 2019 के फैसले में पाकिस्तान से जाधव को सुनाई गई सजा के खिलाफ अपील करने के लिए उचित मंच उपलब्ध कराने को कहा था।
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भारतीय उच्चायोग के वकील को पेश होने का कहा
पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल (एजीपी) खालिद जावेद खान के अनुरोध पर जाधव के लिए वकील नियुक्त करने की सरकार की याचिका पर सुनवाई मंगलवार को 5 अक्तूबर तक के लिए स्थगित कर दी। आईएचसी ने भारतीय उच्चायोग के वकील को सुनवाई की अगली तारीख पर अदालत के समक्ष पेश होने का नोटिस भी जारी किया।

इससे पहले, सात मई को हुई सुनवाई में इस्लामाबाद हाईकोर्ट की वृहद पीठ ने भारत को जाधव के लिए वकील नियुक्त करने का 15 जून तक एक और मौका दिया था। न्यायमूर्ति अतहर मिनल्लाह, न्यायमूर्ति आमेर फारूक और न्यायमूर्ति मियांगुल हसन औरंगजेब इस पीठ में शामिल हैं।

भारत सरकार ने जताई आपत्ति 

अटॉर्नी जनरल खान ने सुनवाई के दौरान अदालत को सूचित किया था कि भारत सरकार पाकिस्तान की अदालत के समक्ष मुकदमे पर आपत्ति जता रही है। उसने हाईकोर्ट की सुनवाई के लिए वकील नियुक्त करने से भी इनकार करते हुए कहा कि यह संप्रभु अधिकारों का आत्मसमर्पण करने के समान है। वृहद पीठ ने बाद में तीन पन्नों का एक लिखित आदेश जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि किसी भी अदालत के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार करना किसी मामले में सहायता के लिए अदालत के सामने पेश होने से काफी अलग है।

आदेश में कहा गया था कि इस समय अदालत केवल अंतरराष्ट्रीय अदालत के फैसले को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए कार्यवाही कर रही है। अदालत ने कहा था कि वह केवल आईसीजे के आदेश को लागू करने का एक तरीका निकालने की कोशिश कर रही है और इसे भारत के ध्यान में लाने की जरूरत है ताकि उसकी भी मौजूदगी रहे और वह कार्यप्रणाली एवं निर्णय के कार्यान्वयन की प्रक्रिया के बारे में अपनी आपत्ति व्यक्त कर सके।

पिछले हफ्ते दिया था जाधव को अपील का अधिकार
पाकिस्तान सरकार ने पिछले सप्ताह जाधव को अपील का अधिकार देने के लिए विपक्ष के हंगामे और बहिष्कार के बीच नेशनल असेंबली में एक विधेयक पारित किया था। संसद के निचले सदन ने अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत (समीक्षा एवं पुनर्विचार) विधेयक, 2020 को बृहस्पतिवार को पारित किया था। विधेयक का लक्ष्य कथित भारतीय जासूस जाधव को आईसीजे के फैसले के अनुरूप राजनयिक पहुंच उपलब्ध कराना है।

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