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Pakistan: तोशाखाना से जुड़े विरोध मामले में इमरान खान को राहत, अदालत ने किया बरी; जानें क्या है पूरी कहानी
Wed, 03 Jul 2024 03:00 PM IST
काव्या मिश्रा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
Published by: काव्या मिश्रा
Updated Wed, 03 Jul 2024 03:00 PM IST
सार
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के 71 वर्षीय संस्थापक खान और अन्य राजनेताओं के खिलाफ 2022 में पाकिस्तान के चुनाव आयोग तोशाखाना भ्रष्टाचार के फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने के लिए आबपारा पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था।
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पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को राहत मिली है। दरअसल, तोशाखाना भ्रष्टाचार मामले में चुनाव आयोग द्वारा जेल में बंद प्रधानमंत्री को अयोग्य ठहराए जाने के खिलाफ प्रदर्शन करने पर उन पर और उनकी पार्टी के कई वरिष्ठ सहयोगियों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए थे। अब अदालत ने दर्ज मामले में खान और उनके सहयोगियों को बरी कर दिया है।
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किन लोगों को मिली राहत
इस मामले में जिला एवं सत्र अदालत ने जिन अन्य नेताओं को बरी किया है, उनमें शाह महमूद कुरैशी, शेख रशीद, असद कैसर, शहरयार अफरीदी, फैसल जावेद, राजा खुर्रम नवाज और अली नवाज अवान शामिल हैं। न्यायिक मजिस्ट्रेट यासिर महमूद ने बुधवार को सुनवाई के दौरान फैसला सुनाया। इस फैसले को पिछले हफ्ते सुरक्षित रखा गया था।
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साल 2022 में हुआ था केस दर्ज
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के 71 वर्षीय संस्थापक खान और अन्य राजनेताओं के खिलाफ 2022 में पाकिस्तान के चुनाव आयोग (ईसीपी) तोशाखाना भ्रष्टाचार के फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने के लिए आबपारा पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था। इस केस के चलते खान को प्रधानमंत्री पद से अयोग्य घोषित करार किया था।
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पहले जानिए क्या है तोशाखाना मामला?
दरअसल, पाकिस्तान के कानून के अनुसार किसी विदेशी राज्य के गणमान्य व्यक्तियों से प्राप्त कोई भी उपहार स्टेट डिपॉजिटरी यानी तोशाखाना में रखना होता है। अगर राज्य का मुखिया उपहार को अपने पास रखना चाहता है तो उसके लिए उसे इसके मूल्य के बराबर राशि का भुगतान करना होगा। यह एक नीलामी की प्रक्रिया के जरिए तय किया जाता है। ये उपहार या तो तोशाखाना में जमा रहते हैं या नीलाम किए जा सकते हैं और इसके माध्यम से अर्जित धन को राष्ट्रीय खजाने में जमा किया जाता है।
कहानी इमरान के प्रधानमंत्री रहते हुए शुरू हुई थी। 2018 में सत्ता में आए इमरान खान को आधिकारिक यात्राओं के दौरान करीब 14 करोड़ रुपये के 58 उपहार मिले थे। इन महंगे उपहारों को तोशाखाना में जमा किया गया था। बाद में इमरान खान ने इन्हें तोशखाने से सस्ते दाम पर खरीद लिया और फिर महंगे दाम पर बाजार में बेच दिया। इस पूरी प्रक्रिया के लिए उन्होंने सरकारी कानून में बदलाव भी किए।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इमरान ने 2.15 करोड़ रुपये में इन गिफ्ट्स को तोशखाने से खरीदा था और इन्हें बेचकर 5.8 करोड़ रुपये का मुनाफा कमा लिया। इन गिफ्टस में एक ग्राफ घड़ी, कफलिंक का एक जोड़ा, एक महंगा पेन, एक अंगूठी और चार रोलेक्स घड़ियां भी थीं।
कैसे हुआ खुलासा?
पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अगस्त में इमरान खान को सत्ता से हटाए जाने के कुछ महीनों बाद, सत्तारूढ़ गठबंधन के कुछ सांसदों ने नेशनल असेंबली के अध्यक्ष राजा परवेज अशरफ ने सामने एक आरोप पत्र दायर किया था। इमरान खान पर आरोप लगाए गए थे कि जो गिफ्ट उन्हें मिले, उसका विवरण तोशाखाना को नहीं सौंपा गया था। उन्हें बेचकर पैसे कमाए गए हैं। पाकिस्तान के स्पीकर ने इस मामले में जांच करवाई। आठ सितंबर को इमरान खान को नोटिस मिला था। उन्होंने इस नोटिस का जवाब दिया था और कहा था कि प्रधानमंत्री रहते हुए मिले चार उपहारों को उन्होंने बेच दिया था। इन उपहारों में ग्रेफ, रोलेक्स घड़ी, कफ़लिंक की एक जोड़ी, एक महंगी कलम, कई धातुओं की चीजें और एक अंगूठी शामिल थी। पिछले साल पांच अगस्त को खान को तोशाखाना भ्रष्टाचार मामले में तीन साल कैद की सजा सुनाई गई थी और एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था।
फिर सदस्यता भी चली गई
आरोप साबित होने पर पिछले साल इमरान खान की संसद सदस्यता भी चली गई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इमरान खान ने जानबूझकर चुनाव अधिनियम, 2017 के प्रावधानों का उल्लंघन किया था और गलत बयान दिया था। साल 2020-21 के लिए उन्होंने अपनी संपत्तियों के बारे में भी गलत जानकारी दी थी।
इमरान खान को चुनाव अधिनियम की धाराओं के साथ, संविधान के अनुच्छेद 63 (1) (पी) के तहत अयोग्य घोषित कर दिया गया था। पाकिस्तानी संविधान के अनुच्छेद 63 (1) (पी) में कहा गया है कि एक व्यक्ति कुछ समय के लिए, किसी भी कानून के तहत मजलिस-ए-शूरा या प्रांतीय विधानसभा के सदस्य के रूप में चुने जाने या चुने जाने के लिए अयोग्य ठहराया जा सकता है।
इमरान का क्या रुख है?
रिपोर्ट्स के अनुसार, तोशाखाना मामला सामने आने के बाद इमरान खान ने इसपर बयान भी दिया था। उन्होंने कहा था कि ये गिफ्ट्स उन्हें निजी तौर पर मिले हैं। इसलिए उन्हें इसे अपने पास रखने का अधिकार है। हालांकि, बाद में उन्होंने तोशाखाना मामले के सारे आरोपों को बेबुनियाद बताया था।