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संकट में इमरान सरकार: बढ़ते घाटे के कारण अब पाकिस्तान के भविष्य पर उठने लगे सवाल

Wed, 02 Mar 2022 02:20 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 02 Mar 2022 02:20 PM IST
सार

पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स (पीबीएस) के आंकड़ों से जाहिर हुआ है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ रही कीमतों का सीधा असर पाकिस्तान के चालू खाते पर पड़ रहा है। इसका नतीजा यह हुआ कि बीते जनवरी में ये घाटा 2.6 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। 2008 के बाद कभी एक महीने में पाकिस्तान को इतना घाटा नहीं झेलना पड़ा था...

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Pakistan Bureau of Statistics revealed that the rising prices in the international market are directly affecting the current account of Pakistan
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

पाकिस्तान की माली हालत और तेजी से बिगड़ने वाली है। देश के चालू खाता घाटे को कम करने का इमरान खान सरकार का लक्ष्य पूरा होने की संभावना नहीं है। उलटे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की बढ़ी कीमतों के कारण चालू खाते का घाटा इस वित्त वर्ष में 20 बिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने की आशंका पैदा हो गई है। यूक्रेन संकट के कारण इमरान खान के नेतृत्व वाली पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) सरकार की मुश्किलें और बढ़ने का अंदाजा है।

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विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि पीटीआई जब सत्ता में आई थी, तब उसने पिछली सरकारों पर देश की अर्थव्यवस्था को तबाह कर देने का आरोप लगाया था। लोगों ने उसकी बात पर यकीन किया, क्योंकि 2017-18 चालू खाते का घाटा 19 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका था। लेकिन अब पीटीआई के चार साल के शासन के बाद ये रिकॉर्ड टूटने वाला है।

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खाली होने की तरफ विदेशी मु्द्रा भंडार

अर्थशास्त्री और पाकिस्तान के पूर्व वित्त मंत्री डॉ. हाफिज ए पाशा ने अखबार द न्यूज से कहा कि चालू खाते का घाटा 20 बिलियन डॉलर तक जाने का मतलब यह होगा कि इस वित्त वर्ष में ये घाटा देश की जीडीपी के छह फीसदी के बराबर हो जाएगा। इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजारों में दाम तेजी से चढ़ रहे हैं। इससे पाकिस्तान के चालू खाते पर दबाव और बढ़ रहा है। पाशा ने सुझाव दिया कि सरकार को आयात घटाने के लिए तुरंत कदम उठाने चाहिए। ऐसा नहीं किया गया तो विदेशी मुद्रा का भंडार तेजी से खाली होने लगेगा। उसका पूरी अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा प्रभाव होगा।

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पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स (पीबीएस) के आंकड़ों से जाहिर हुआ है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ रही कीमतों का सीधा असर पाकिस्तान के चालू खाते पर पड़ रहा है। इसका नतीजा यह हुआ कि बीते जनवरी में ये घाटा 2.6 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। 2008 के बाद कभी एक महीने में पाकिस्तान को इतना घाटा नहीं झेलना पड़ा था।

किफायत की नीति अपनाए सरकार

विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान की अकेली समस्या चालू खाते का घाटा बढ़ना ही नहीं है। बल्कि हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अनुमान लगाया था कि पाकिस्तान को विदेशी कर्ज चुकाने पर इस वित्त वर्ष में 18.5 बिलियन डॉलर खर्च करने होंगे। जबकि पिछले वित्त वर्ष में उस पर ये बोझ सिर्फ 11.9 बिलियन डॉलर का था। सरकार ने इस वित्त वर्ष का बजट पेश करते हुए इस मद में 12.8 बिलियन डॉलर रखे थे। जबकि असली खर्च उससे काफी ज्यादा होने जा रहा है।



पाकिस्तान सरकार के आर्थिक सलाहकार रह चुके डॉ. अशफाक हसन खान ने भी इस हालात को एक गंभीर चुनौती बताया है। उन्होंने कहा है कि सरकार को आयात घटाने की आक्रामक नीति अपनानी चाहिए। विश्लेषकों का कहना है कि इस मौके पर पाकिस्तान सरकार को सबको भरोसे में लेकर किफायत की नीति अपनानी चाहिए। लेकिन राजनीतिक दलों में लोक लुभावन घोषणाएं करने की होड़ लगी हुई है। अब इमरान खान सरकार भी इसमें कूद पड़ी है। इसका पाकिस्तान के भविष्य पर बहुत खराब असर होगा।

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