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ड्रैगन का नया दांव: चीन के हथियारों का 'गेटवे' बना पाकिस्तान? रिपोर्ट में चार अरब डॉलर के रक्षा सौदे का दावा
Sat, 04 Jul 2026 11:01 PM IST
प्रशांत तिवारी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Sat, 04 Jul 2026 11:01 PM IST
सार
अमेरिका स्थित थिंक टैंक मिडिल ईस्ट फोरम की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन, पाकिस्तान को पश्चिम एशिया और अफ्रीका के रक्षा बाजार में प्रवेश के 'गेटवे' के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान और लीबियाई नेशनल आर्मी के बीच प्रस्तावित 4 अरब डॉलर से अधिक का रक्षा सौदा इसी रणनीति का हिस्सा है।
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चीनी राष्ट्रपति के साथ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री, मंत्री और सेना प्रमुख
- फोटो : IANS
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विस्तार
चीन अपने रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल एक माध्यम के रूप में कर रहा है। अमेरिका स्थित थिंक टैंक मिडिल ईस्ट फोरम की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान और लीबियाई नेशनल आर्मी के बीच 16 जेएफ-17 लड़ाकू विमानों, प्रशिक्षण विमानों और अन्य सैन्य उपकरणों से जुड़ा 4 अरब डॉलर से अधिक का रक्षा सौदा इसी रणनीति का अहम उदाहरण माना जा रहा है।
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रिपोर्ट में क्या दावा किया गया?
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह संभावित रक्षा सौदा लीबिया पर संयुक्त राष्ट्र के हथियार प्रतिबंध को कमजोर कर सकता है। इसके अलावा, इससे देश के आंतरिक संघर्ष का सैन्य संतुलन बदलने और पूरे क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने की आशंका भी जताई गई है।
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चीन पर कितनी बढ़ी पाकिस्तान की निर्भरता?
थिंक टैंक के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान और चीन के बीच रक्षा, सुरक्षा और खुफिया सहयोग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के आंकड़ों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2021 से 2024 के बीच पाकिस्तान के कुल हथियार आयात में 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी चीन की रही। यह पाकिस्तान की बढ़ती निर्भरता और उसके रक्षा क्षेत्र में चीन की मजबूत होती पकड़ को दर्शाता है।
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चीनी हथियारों को दुनिया भर में बढ़ावा दे रहा पाकिस्तान
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान अब भी अमेरिकी मूल के एफ-16 फाइटिंग फाल्कन लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल करता है और समय-समय पर अमेरिका से सैन्य सहायता भी प्राप्त करता है। इसके बावजूद उसकी सैन्य क्षमता का बड़ा हिस्सा अब चीनी हथियारों पर आधारित हो चुका है। पाकिस्तान, चीन के साथ संयुक्त रूप से विकसित जेएफ-17 लड़ाकू विमान, चीनी ड्रोन, एचक्यू-9 वायु रक्षा प्रणाली और अन्य रक्षा उपकरणों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहा है।
कितने देशों के साथ रक्षा सौदों पर बातचीत?
रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल के महीनों में इराक, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, सऊदी अरब, लीबिया, मोरक्को, नाइजीरिया, सूडान और इथियोपिया जैसे देशों के साथ पाकिस्तान की रक्षा वार्ताओं और संभावित रक्षा सौदों की संख्या बढ़ी है। चीनी मीडिया में भी दावा किया गया है कि पाकिस्तान इनमें से कई देशों के साथ जेएफ-17 लड़ाकू विमानों के सौदों को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहा है।
सऊदी अरब के साथ भी संभावित समझौते की चर्चा
रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब के साथ संभावित समझौते के तहत पाकिस्तान जेएफ-17 लड़ाकू विमान उपलब्ध कराने के बदले वित्तीय व्यवस्था कर सकता है। हालांकि, अब तक ऐसा कोई समझौता नहीं हुआ है। इसके पीछे चीनी हथियारों की गुणवत्ता, अमेरिकी रक्षा प्रणालियों के साथ उनकी अनुकूलता और वित्तीय पहलुओं को प्रमुख कारण बताया गया है।
'पाकिस्तान बना चीन का गेटवे'
रिपोर्ट में कहा गया है, 'इसके बावजूद चीन पाकिस्तान का इस्तेमाल इस क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए एक गेटवे के रूप में कर रहा है। वहीं, पाकिस्तान द्वारा इन रक्षा प्रणालियों को बढ़ावा दिए जाने से चीन की व्यापक रक्षा-औद्योगिक मौजूदगी और उसकी रणनीतिक महत्वाकांक्षाओं को भी बल मिल रहा है।'
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क्या है रिपोर्ट का निष्कर्ष?
थिंक टैंक का निष्कर्ष है कि चीन, पाकिस्तान के जरिए पश्चिम एशिया के रक्षा बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान द्वारा चीनी हथियारों का प्रचार-प्रसार बीजिंग की व्यापक रक्षा-औद्योगिक रणनीति और वैश्विक रणनीतिक महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।