Pakistan: पाकिस्तान में सरकार, सेना और अमेरिका के खिलाफ फैल रहा है गुस्सा
Pakistan: इमरान खान के खिलाफ आतंकवाद निरोधक कानून की धारा सात के तहत मामला दर्ज किया गया है। यही धारा खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के नेता शहबाज गिल पर भी लगाई गई है। गिल दो हफ्तों से हिरासत में हैं...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पाकिस्तान में राजनीतिक विरोधियों के कथित दमन के मुद्दे पर अमेरिका की नरम प्रतिक्रिया से यहां सरकार विरोधी खेमों में तीखी प्रतिक्रिया हो रही है। इसे इस बात का एक और संकेत बताया जा रहा है कि इस वर्ष अप्रैल में इमरान खान की सरकार को हटा कर वर्तमान शहबाज शरीफ बनवाने के पीछे अमेरिका का भी हाथ था। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी की संभावना पर अमेरिका ने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। इस बारे में पूछे जाने पर अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा- ‘हमें इस प्रकरण की जानकारी है। यह पाकिस्तान के कानूनी और न्यायिक प्रणाली से जुड़ा मुसला है। इसका अमेरिका से कोई सीधा संबंध नहीं है, इसलिए इस बारे में हमारा कोई रुख नहीं है।’
जबकि संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटारेस की प्रतिक्रिया अधिक सधी हुई रही है। गुटारेस के प्रवक्ता स्टीफेन दुजारिक ने एक बयान में पाकिस्तान सरकार से ‘निष्पक्ष वैधानिक प्रक्रिया’ का पालन करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा- ‘संयुक्त राष्ट्र महासचिव की अपील है कि देश में तनाव घटाया जाए और कानून के शासन, मानव अधिकारों और बुनियादी स्वतंत्रताओं का सम्मान किया जाए।’
पाकिस्तान के पूर्व सैनिक अधिकारी और रक्षा विश्लेषक हैदर मेदही ने कुछ समय पहले दावा किया था कि पाकिस्तान के मौजूदा सेनाध्यक्ष जनरल कमर जावेद बाजवा ने इमरान खान की सरकार को गिराने के लिए अमेरिका के साथ मिलकर जोड़तोड़ की थी। अब पाकिस्तान के सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में ऐसे पोस्ट डाले जा रहे हैं, जिनमें इस बात की खुल कर चर्चा की जा रही है।
इमरान खान के खिलाफ आतंकवाद निरोधक कानून की धारा सात के तहत मामला दर्ज किया गया है। यही धारा खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के नेता शहबाज गिल पर भी लगाई गई है। गिल दो हफ्तों से हिरासत में हैं। फिलहाल, सेहत बिगड़ने के कारण उन्हें अस्पताल में रखा गया है। विधि विशेषज्ञों ने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ आतंकवाद निरोधक कानून की धारा के इस्तेमाल पर चिंता जताई है। उन्होंने इसे इस कानून का खुल्लमखुल्ला दुरुपयोग करार दिया है। इन घटनाओं के कारण आतंकवाद विरोधी कानून पर भी गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकार आयुक्त के कार्यालय ने कहा है कि पाकिस्तान के आतंकवाद निरोधक कानून की बुनियादी खामी यह है कि इसमें आतंकवाद की परिभाषा अस्पष्ट और व्यापक रखी गई है। इससे उन मामलों में भी इसके इस्तेमाल की गुंजाइश बन जाती है, जिनका उग्रवादी गतिविधियों या आतंकवादी गुटों से कोई संबंध नहीं है। वरिष्ठ अधिवक्ता इमरान अस्मत चौधरी ने वेबसाइट दक्रैडल.को से बातचीत में कहा- ‘मैंने निजी तौर पर ऐसे 11 मामलों में पैरवी की है, जिनमें आतंकवाद विरोधी कानून का इस्तेमाल निजी दुश्मनी, राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और दुर्भावनापूर्ण मकसदों से किया गया। ये तमाम ऐसे मामले हैं, जिनका आतंकवाद से कोई संबंध नहीं है।’
समझा जाता है कि शहबाज शरीफ सरकार जल्द चुनाव कराने से बचना चाहती है। इसलिए वह अपने प्रमुख राजनीतिक विरोधियों को जेल में डालने की कोशिश कर रही है। ये धारणा गहरा गई है कि सरकार को इन कार्रवाइयों को सेना का समर्थन हासिल है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक इससे सेना और ज्यादा अलोकप्रिय हो रही है। प्रमुख राजनीतिक विश्लेषक नसीर अहमद ने कहा है- ‘जनरल बाजवा और उनके साथी वरिष्ठ जनरलों को इसका अंदाजा नहीं है कि पाकिस्तान के लोग उन्हें नापसंद करते हैं। जनरल जितना खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं, उतना ही कड़ा रुख अपना रहे हैं। लेकिन उतनी ही तेजी से वे देश को पतन की ओर ले जा रहे हैं।’ विश्लेषकों ने कहा है कि अमेरिका ने इस दमन का विरोध ना कर अपने प्रति लोगों का गुस्सा और बढ़ा दिया है।