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Hindi News ›   World ›   Pak's apex court upholds sentences of army officers for conspiring against Benazir Bhutto's 1995 govt

Pakistan: बेनजीर भुट्टो की सरकार के खिलाफ साजिश रचने वाले सैन्य अफसरों की सजा बरकरार, 2007 में की गई थी हत्या

Tue, 12 Sep 2023 08:30 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 12 Sep 2023 08:30 PM IST
सार

Pakistan: पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की 1995 में सरकार को उखाड़ फेंकने की साजिश में शामिल सैन्य अधिकारियों की सजा को मंगलवार को बरकरार रखा।

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Pak's apex court upholds sentences of army officers for conspiring against Benazir Bhutto's 1995 govt
पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media

विस्तार

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की 1995 में सरकार को उखाड़ फेंकने की साजिश में शामिल सैन्य अधिकारियों की सजा को मंगलवार को बरकरार रखा। दिसंबर 2007 में बेनजीर की हत्या कर दी गई थी। 

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यह मामला 30 सितंबर 1995 को रावलपिंडी के सेना मुख्यालय में आयोजित होने वाली कोर कमांडरों की बैठक में अधिकारियों के एक समूह ने तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल वहीद काकर और प्रधानमंत्री भुट्टो को मारने की योजना से संबंधित है। 

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साजिश में मेजर जनरल जहीरुल इस्लाम अब्बासी, ब्रिगेडियर मुस्तानसिर बिल्ला, कर्नल मोहम्मद आजाद मिन्हास और कर्नल इनायत उल्लाह खान समेत 38 अन्य सैन्य अधिकारी शामिल थे। वे देश में इस्लामिक सरकार स्थापित करना चाहते थे। उन्हें 26 सितंबर, 1995 को गिरफ्तार कर लिया गया था।
 

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फील्ड जनरल कोर्ट मार्शल (एफजीसीएम) ने तख्तापलट के प्रयास में शामिल होने के लिए मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) अब्बासी को सात साल और ब्रिगेडियर मुस्तानसिर बिल्ला को 14 साल जेल की सजा सुनाई थी।
 

कर्नल मिन्हास और कर्नल खान का साजिश में कथित भूमिका के लिए सितंबर 1996 में कोर्ट मार्शल किया गया था और उन्हें चार-चार साल कैद की सजा सुनाई गई थी। कई साल बाद कर्नल खान ने 2000 में सुप्रीम कोर्ट में और कर्नल मिन्हास ने लाहौर हाई कोर्ट में सजा को चुनौती दी, जिसने पिछले साल मई में उनकी अपील खारिज कर दी। बाद में उन्होंने इसे शीर्ष अदालत में चुनौती भी दी।
 

अपीलों पर सुनवाई के बाद अदालत ने 15 फरवरी को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसमें मूल दोषसिद्धि के खिलाफ उनकी अपीलों को खारिज कर दिया गया था।  बेनजीर भुट्टो की 27 दिसंबर, 2007 को रावलपिंडी के ऐतिहासिक लियाकत बाग में एक चुनावी रैली को संबोधित करने के तुरंत बाद हत्या कर दी गई थी।

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