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भारतीय व्यंजन के रेस्टोरेंट में लगाई आग, फिर भी मालिक प्रदर्शनकारियों के साथ

Sun, 31 May 2020 08:06 PM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मिनीपोलिस
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मिनीपोलिस Published by: गौरव पाण्डेय Updated Sun, 31 May 2020 08:06 PM IST
सार

अमेरिका के मिनीपोलिस में एक अश्वेत व्यक्ति जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान यहां एक प्रसिद्ध भारतीय व्यंजन का एक रेस्टोरेंट भी आग की चपेट में आ गया। हालांकि, रेस्टोरेंट के मालिक ने इस प्रदर्शन का समर्थन करते हुए कहा है कि मेरी इमारत डला दीजिए लेकिन न्याय जरूर मिलना चाहिए। 

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owner of Indian eatery backs Minneapolis protest and said let my building burn, justice needs to be served
गांधी महल रेस्टोरेंट और उसके मालिक रुहेल इस्लाम - फोटो : फेसबुक

विस्तार

इस घटना के विरोध में गुरुवार को मिनीपोलिस में हो रहे प्रदर्शन के दौरान पुलिस विभाग के तीसरे प्रीसिंक्ट मुख्यालय से थोड़ी ही दूर स्थित गांधी महल रेस्टोरेंट को प्रदर्शनकारियों ने आग के हवाले कर दिया था। इसके मालिक बांग्लादेशी रुहेल इस्लाम (42) हैं। इस घटना के बावजूद उन्होंने प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है।

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बता दें कि बीते सोमवार को जॉर्ज फ्लॉयड की मौत हो गई थी। दरअसल जॉर्ज पर एक स्थानीय दुकान में 20 डॉलर के नकली नोट का इस्तेमाल करने का आरोप था। शिकायत पर पहुंचे एक श्वेत पुलिस अधिकारी ने जॉर्ज को गिराकर घुटने से उसका गला दबा रखा था, जिससे उसकी मौत हो गई थी। 
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इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद पूरे अमेरिका में प्रदर्शन शुरू हो गए थे। हालांकि, बाद में आरोपी पुलिस अधिकारी को बर्खास्त कर दिया गया था और बीते शुक्रवार को उसके खिलाफ हत्या और थर्ड डिग्री का इस्तेमाल करने का मामला भी दर्ज किया गया। 

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वायरल हुआ बेटी का फेसबुक पोस्ट

वहीं, इस घटना को लेकर रुहेल की बेटी हफ्सा इस्लाम (18) का फेसबुक पोस्ट भी काफी वायरल हो रहा है। हफ्सा ने पोस्ट में लिखा, 'इस बात का बहुत दुख है गांधी महल में आग लग गई और नुकसान हुआ। हालांकि, हम उम्मीद नहीं खोएंगे। मैं अपने पड़ोसियों की बहुत आभारी हूं जो गांधी महल को बचाने के लिए खड़े हुए।'


'आपके प्रयास बेकार नहीं जाएंगे। हमारे बारे में चिंता मत करिए, हम इसे फिर बनाएंगे और दोबारा खड़े होंगे।' हफ्सा ने आगे लिखा, मैं अपने पिता के साथ बैठकर समाचार देख रही हूं। मैंने उन्हें फोन पर कहते हुए सुना कि मेरी इमारत जल जाने दीजिए लेकिन न्याय जरूर होना चाहिए, उन अधिकारियों को जेल भेजना चाहिए।'

हफ्सा ने कहा, हम केवल वह करने की कोशिश कर रहे थे जिससे हमारे समुदाय को मदद मिल सके। ये बात ठीक है कि हमारा व्यापार था। ठीक है कि हम अपना घर चलाने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन, बाकी किसी भी बात से ऊपर हम अपने लोगों के लिए चिंतित थे। 

2008 में शुरू हुआ था गांधी महल

बता दें कि गांधी महल रेस्टोरेंट की शुरुआत साल 2008 में बड़ी आर्थिक मंदी के दौरान हुई थी। हालांकि, रुहेल हिंसक प्रदर्शनों में विश्वास नहीं रखते हैं और इसीलिए उन्होंने अपने रेस्टोरेंट का नाम भारत के राष्ट्रपिता और अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी के नाम पर रखा था। 



न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक रुहेल ने कहा, 'मैं शांतिपूर्ण तरीकों का और अहिंसक प्रदर्शनों का समर्थन करता रहूंगा, लेकिन हमारी युवा पीढ़ी में गुस्सा है और उनके गुस्सा होने का कारण भी है।' अपनी सामुदायिक सेवाओं के चलते रुहेल के परिवार का इस क्षेत्र में काफी सम्मान है। 

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