Russia Earthquake: रूस में भूकंप के तेज झटके, 7 से अधिक तीव्रता से कांपी धरती; सुनामी की चेतावनी जारी
Earthquake in Russia Today : रूस के कामचटका क्षेत्र के पूर्वी तट के पास भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। इसकी तीव्रता सात से ज्यादा बताई जा रही है। इस प्रायद्वीप में 20 जुलाई, 2025 को पांच शक्तिशाली भूकंप आए थे, जिनमें से सबसे बड़ा 7.4 तीव्रता का था।
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विस्तार
रूस में शनिवार को भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। रूस के कामचटका प्रायद्वीप के पूर्वी तट के पास 7.1 तीव्रता का भूकंप आया। इसके बाद इलाके में सुनामी की चेतावनी जारी की गई। भारत के नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी ने भूकंप की तीव्रता सात मापी। एनसीएस के मुताबिक, भूकंप सुबह आठ बजकर सात मिनट पर आया। इसका केंद्र जमीन से 60 किलोमीटर गहराई में था।
जर्मन भूविज्ञान अनुसंधान केंद्र ने तीव्रता 7.1 बताई
जर्मन भूविज्ञान अनुसंधान केंद्र (GFZ) ने भूकंप का केंद्र 10 किलोमीटर की गहराई में बताया, जबकि अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने इसकी तीव्रता 7.4 बताई और केंद्र 39.5 किलोमीटर की गहराई में बताया। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी के हवाले से बताया गया कि कामचटका के दक्षिण-पश्चिम में स्थित जापान ने कोई सुनामी चेतावनी जारी नहीं की है।
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने क्या कहा?
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के मुताबिक, शनिवार तड़के रूस के कामचटका क्षेत्र के पूर्वी तट के पास 7.4 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया। भूकंप का केंद्र पेट्रोपावलोव्स्क-कामचत्स्की से 111.7 किमी पूर्व में और 39 किमी की गहराई में था।
किसी के हताहत होने या संपत्ति के नुकसान की कोई खबर नहीं
प्रशांत सुनामी चेतावनी केंद्र ने चेतावनी दी है कि भूकंप से सुनामी आ सकती है। अभी तक किसी के हताहत होने या संपत्ति के नुकसान की कोई खबर नहीं है। यह भूकंप उसी क्षेत्र में आया, जहां जुलाई में 8.8 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया था। इसके बाद पूरे प्रशांत क्षेत्र में सुनामी की चेतावनी जारी की गई थी।
क्यों घातक है रूस के इस इलाके में आने वाला भूकंप
रूस के पूर्वी छोर पर स्थित कामचटका प्रायद्वीप पृथ्वी के सबसे खतरनाक भूगोल वाले इलाकों में गिना जाता है। शनिवार को फिर से यहां 7.4 तीव्रता का भीषण भूकंप दर्ज किया गया। लगभग 1,200 किलोमीटर लंबा यह प्रायद्वीप प्रशांत रिंग ऑफ फायर का हिस्सा है, जहां टेक्टॉनिक प्लेटों की लगातार हलचल और ज्वालामुखीय गतिविधियां आम हैं।
यही कारण है कि कामचटका को भूकंप और ज्वालामुखी के लिहाज से दुनिया के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में रखा जाता है। कामचटका में भूगर्भीय, जलवायु और समुद्री सभी तरह की आपदाएं साथ-साथ दिखाई देती हैं। इससे इसे रूस का आपदा-हॉटस्पॉट कहा जाता है और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक संस्थान लगातार इस क्षेत्र की निगरानी करते रहते हैं। वैज्ञानिक मानते हैं कि कामचटका के नीचे प्रशांत प्लेट और उत्तरी अमेरिकी प्लेट के साथ-साथ ओखोत्स्क माइक्रोप्लेट की टकराहट होती है। यही कारण है समय-समय पर बड़े भूकंप आते रहते हैं। इससे पहले 20 जुलाई को यहां भूकंप के कई बड़े झटके लगे थे।
टेक्टॉनिक प्लेटों के बीच लगातार हलचल से रूस के इस क्षेत्र में आते रहते हैं भूकंप
कामचटका के दक्षिणी हिस्से में कुरिल-कामचटका ट्रेंच मौजूद है, जहां प्रशांत प्लेट समुद्र तल के नीचे खिसककर ओखोत्स्क प्लेट के नीचे धंसती है। इसे सबडक्शन जोन कहते हैं और यही बड़े भूकंपों की मुख्य वजह है। प्रशांत प्लेट लगातार उत्तर-पश्चिम की ओर खिसक रही है और ओखोत्स्क माइक्रोप्लेट के नीचे धंस रही है। इस टकराव से भारी दबाव बनता है।
इस तरह के बड़े भूकंप के बाद सुनामी का खतरा पूरे प्रशांत क्षेत्र में फैल सकता है। कामचटका से निकलने वाली सुनामी की लहरें सबसे नजदीकी इलाके होने के कारण जापान और कोरिया तक सबसे पहले पहुंच सकती हैं। प्रशांत महासागर के आर-पार पहुंचने वाली लहरें अलास्का और बाद में हवाई द्वीपों को प्रभावित कर सकती हैं।