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फिलीपींस में राष्ट्रपति चुनाव: पिता के कुकर्मों को प्रचार से धो डाला है मार्कोस जूनियर ने

Tue, 03 May 2022 06:58 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मनीला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मनीला Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 03 May 2022 06:58 PM IST
सार

राजनीतिक विशेषज्ञों ने ध्यान दिलाया है कि मार्कोस सीनियर की तानाशाही अपने आखिरी दिनों में बेहद अलोकप्रिय हो गई थी। लेकिन उसके बाद जो नेता सत्ता में आए, उनसे लोगों का मोहभंग हो गया। इसका लाभ अब मार्कोस जूनियर को मिल रहा है। मार्कोस की टीम ने सोशल मीडिया पर मार्कोस सीनियर की छवि देश के पितृ-पुरुष जैसी बना दी है...

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only a week left for the Philippines presidential election, Ferdinand Marcos Jr continuing his lead in pre-election opinion polls
मार्कोस जूनियर - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

फिलीपींस राष्ट्रपति चुनाव में अब एक हफ्ता ही बाकी रह गया है। इस बीच चुनाव पूर्व जनमत सर्वेक्षणों में पूर्व तानाशाह फर्डिनैंड मार्कोस के बेटे फर्डिनैंड मार्कोस जूनियर अपनी बढ़त लगातार बनाए हुए हैं। मार्कोस जूनियर की जन सभाओं में भी जबरदस्त भीड़ जुट रही है। कई जगहों पर भारी बारिश के बीच हजारों लोग उनके भाषण सुनने के लिए इकट्ठा हुए हैं।

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मार्कोस सीनियर के कार्यकाल को उस दौरान मानव अधिकारों के हुए घोर हनन के लिए जाना जाता है। इसके बावजूद ‘बोंगबोंग’ नाम से मशहूर मार्कोस जूनियर की देश में लहर चलती दिख रही है। विश्लेषकों ने कहा है कि चुनाव का नतीजा चाहे जो हो, चुनाव प्रचार के दौरान यह स्पष्ट हो गया है कि मार्कोस परिवार से देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा लगाव महसूस कर रहा है। जबकि आलोचकों का कहना है कि मार्कोस जूनियर ने काले धन और सोशल मीडिया के इस्तेमाल से अपने पक्ष में माहौल बनाया है। साथ ही उन्हें वंशवादी सोच रखने वाले लोगों से भी मदद मिली है।

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मार्कोस सीनियर की छवि देश के पितृ-पुरुष जैसी

राजनीतिक विशेषज्ञों ने ध्यान दिलाया है कि मार्कोस सीनियर की तानाशाही अपने आखिरी दिनों में बेहद अलोकप्रिय हो गई थी। लेकिन उसके बाद जो नेता सत्ता में आए, उनसे लोगों का मोहभंग हो गया। इसका लाभ अब मार्कोस जूनियर को मिल रहा है। मार्कोस की टीम ने सोशल मीडिया पर मार्कोस सीनियर की छवि देश के पितृ-पुरुष जैसी बना दी है। उनके शासनकाल को गुजर गए अच्छे दिन के रूप में प्रचारित किया गया है। जिन लोगों ने वो दौर नहीं देखा, वे इस उलटे चित्रण को स्वीकार कर रहे हैं।

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मार्कोस सीनियर ने 1972 में देश में मार्शल लॉ लगा दिया था। मनील स्थित एक यूनिवर्सिटी में राजनीतिक शास्त्र की प्रोफेसर जुलियो तीनहान्की ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा- ‘यह एतिहासिक विडंबना की पराकाष्ठा ही होगी कि मार्शल लॉ लगाए जाने की पचासवीं बरसी के मौके पर एक अन्य मार्कोस राष्ट्रपति भवन में बैठा दिखेगा।’

मार्शल लॉ लगा 50 हजार लोगों को गिरफ्तार कराया

मार्कोस सीनियर फिलीपींस के एक राजनीतिक परिवार से आए थे। वे जाने-माने वकील थे। वे अपने देश को ‘फिर से महान बनाने’ के नारे के साथ 1965 में राष्ट्रपति निर्वाचित हुए। उसके बाद उन्होंने अपनी तानाशाही कायम कर ली। सितंबर 1972 में उन्होंने मार्शल लॉ लगा कर विपक्षी नेताओं और लगभग 50 हजार राजनीतिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करवा लिया। साथ ही नागरिक आजादियों पर रोक लगा दी गई। वे 1986 तक सत्ता में रहे। इस दौरान मानव अधिकार हनन की 11 हजार से ज्यादा घटनाएं दर्ज हुईं।

विपक्ष के नेता बेनिग्नो एक्वीनो 1983 में जब स्वदेश लौटे, तो हवाई अड्डे पर ही गोली मार कर उनकी हत्या कर दी गई। उसके बाद देश में जन विद्रोह भड़क उठा। आखिरकार 1986 में मार्कोस को सत्ता छोड़नी पड़ी। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि उसके बाद फिलीपींस में नई पीढियां बालिग हो चुकी हैं। इन लोगों को फेसबुक, टिकटॉक, यूट्यूब पर जो बताया जाता है, वही मालूम है। इन प्लेटफॉर्म्स पर मार्कोस जूनियर की टीम ने वर्चस्व बना रखा है। वैसा ही वर्चस्व मार्कोस का चुनाव अभियान में दिखा है। इससे आम राय बनी है कि नौ मई को उनकी ही जीत होगी।

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