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Omicron variant: ओमिक्रॉन की पहेली हल करने में जुटे वैज्ञानिक, कहीं दुनिया पर ढहा न दे कहर
Sat, 27 Nov 2021 09:42 PM IST
Amit Mandal
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: Amit Mandal
Updated Sat, 27 Nov 2021 09:42 PM IST
सार
ओमिक्रॉन को पहले B.1.1.529 के नाम से जाना जाता है, अब डब्ल्यूएचओ ने इसे चिंताजनक बताया है जिसके बाद तीसरी लहर की आशंका जताई जा रही है।
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कोरोना का नया वैरिएंट खतरनाक
- फोटो : social media
विस्तार
कोरोना वायरस के नए वैरिएंट ओमीक्रॉन को लेकर आशंका जताई जा रही है कि ये एक बार फिर दुनिया पर कहर ढा सकता है। इस बीच वैज्ञानिक और विशेषज्ञ इसकी ताकत जानने और इससे निपटने के उपाय तैयार करने में जुटे हैं ताकि पहले की तरह मौतों का सिलसिला न शुरू हो जाए। आशंका के बीच कई देशों ने ट्रैवल बैन शुरू कर दिया है।
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रिसर्च में जुटे विशेषज्ञ
यूरोप, अमेरिका और अफ्रीका में इसकी जांच के लिए लैब तैयार हो रहे हैं। विशेषज्ञ दक्षिण अफ्रीका से निकले इस वायरस को लेकर इस बात पर रिसर्च में जुटे हैं कि ये कितना घातक सिद्ध हो सकता है।
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विशेषज्ञों और वैज्ञानिक ने शुक्रवार को कहा कि इसके असर का जानने में अभी थोड़ा समय लगेगा। बताया जा रहा है कि इसके 50 म्यूटेशन हुए हैं और इनमें से 30 स्पाइक प्रोटीन के हैं जो असल में घातक सिद्ध होता है। वहीं, इंपीरियल कॉलेज लंदन की संक्रामक रोग विभाग की प्रमुख वेंडी बार्कले का कहना है कि म्यूटेशन के कारण माइक्रोन अधिक संक्रामक साबित हो सकता है।
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लगातार हो रहा म्यूटेशन
वायरस सबसे पहले किसी सेल में विकसित होता है और फिर अपना आकार बदलता है। कोरोना वायरस के सबसे पहले सामने आने के बाद से ही इसका म्यूटेशन हो रहा है। ओमिक्रॉन को पहले B.1.1.529 के नाम से जाना जाता है डब्ल्यूएचओ ने इसे चिंताजनक बताया है।
कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर शैरोन पीकॉक का कहना है कि द. अफ्रीका से आया ये वायरस काफी संक्रामक है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने पाया कि संक्रमितों की संख्या रोजाना दोगुनी हो रही है। वहीं यूके के सांगर इंस्टीट्यूट के कोविड-19 जीनोमिक इनिशिएटिव के निदेशक जैफ्रे बैरेट कहते हैं कि जब भारत में डेल्टा वायरस पैदा हुआ तब दुनिया के बाकी हिस्से के पास नए वायरस के बारे में जानने के लिए काफी समय था। जब भारत में डेल्टा के बारे में पूरी जानकारी सामने आई ये कहर बनकर टूट पड़ा था।
वैक्सीन पर तेजी से हो रहा काम
बायोनटेक और फाइजर का कहना है कि 100 दिन के भीतर इसके खिलाफ एक नया वैक्सीन बनाने में कामयाब होंगे। मोडर्ना इंक भी इस पर रिसर्च कर रहा है कि एक बूस्टर डोज का निर्माण किया जाए जो ओमिक्रॉन पर कारगर साबित हो सके। कंपनी का कहना है कि वह इस वायरस के खिलाफ 60 से 90 दिनों के भीतर वैक्सीन का निर्माण कर लेंगे।