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Bangladesh: बांग्लादेश में अब न्यायिक परिषद ही न्यायाधीशों को हटा सकेगी, SC ने संविधान संशोधन को किया रद्द

Sun, 20 Oct 2024 06:30 PM IST
बशु जैन वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका Published by: बशु जैन Updated Sun, 20 Oct 2024 06:30 PM IST
सार

जनवरी 2014 में 16वां संविधान संशोधन पारित किया गया था। इसके तहत सर्वोच्च न्यायिक परिषद से कदाचार के लिए न्यायाधीशों को हटाने का अधिकार छीन लिया गया था। मई 2016 में तीन सदस्यीय उच्च न्यायालय की पीठ ने संशोधन को असांवधानिक घोषित कर दिया था।

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Now only the Judicial Council will be able to remove judges in Bangladesh, SC canceled constitution amendment
अदालत ने रद्द किया आदेश (सांकेतिक) - फोटो : ANI

विस्तार

बांग्लादेश में अब सर्वोच्च न्यायिक परिषद ही न्यायाधीशों को हटाने और उन पर न्यायिक कदाचार के आरोपों की जांच करेगी। बांग्लादेश की सुप्रीम कोर्ट ने शेख हसीना सरकार के दौरान किए गए 16वें संविधान संशोधन को रद्द कर दिया है। इसके तहत न्यायाधीशों को हटाने का अधिकार संसद को दे दिया गया था। इसे सुप्रीम कोर्ट ने गैरकानूनी करार दिया।

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सुप्रीम कोर्ट के वकील रूहुल कुद्दूस ने बताया कि यह आदेश मुख्य न्यायाधीश सैयद रेफत अहमद के नेतृत्व वाली छह सदस्यीय पीठ ने पारित किया। मुख्य न्यायाधीश कुद्दुस ने कहा कि फैसले से मूल सांवधानिक प्रावधान मजबूत होंगे। इस फैसले के तहत पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के शासन के दौरान पारित 16वें सांवधानिक संशोधन को भी रद्द किया गया। इसमें न्यायाधीशों पर महाभियोग चलाने का काम सर्वोच्च न्यायिक परिषद के बजाय संसद को दिया गया था।
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बताया जाता है कि जनवरी 2014 में 16वां संविधान संशोधन पारित किया गया था। इसके तहत सर्वोच्च न्यायिक परिषद से अक्षमता या कदाचार के लिए न्यायाधीशों को हटाने का अधिकार छीन लिया गया। मई 2016 में तीन सदस्यीय उच्च न्यायालय की पीठ ने संशोधन को असांवधानिक घोषित कर दिया था। जिसे सरकार ने जनवरी 2017 में चुनौती दी।
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तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार सिन्हा के नेतृत्व में सात न्यायाधीशों की अपीलीय खंडपीठ ने जुलाई 2017 में उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा और संविधान संशोधन को अवैध घोषित किया। फैसले के बाद हसीना सरकार ने एक याचिका दायर कर शीर्ष अदालत से फैसले की समीक्षा करने का अनुरोध किया। इस मामले में रविवार को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया। इसके तहत संविधान संशोधन को रद्द करते हुए सर्वोच्च न्यायिक परिषद को बहाल कर दिया। 


बता दें कि छात्रों के आंदोलन के बाद पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था और देश छोड़ दिया था। इसके बाद सेना के नेतृत्व में देश में अंतरिम सरकार का गठन किया गया। जिसके प्रमुख नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस हैं। 

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