129 साल बाद बदले 'एक किलो' के मायने, जानिए अब तक का सफर
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आज तक आप सब्जी, फल, दाल आदि किलोग्राम के हिसाब से खरीदते आ रहे हैं, लेकिन अब यह किलोग्रम रिटायर किया जा चुका है। किलो को रिटायर करने को लेकर फ्रांस में पिछले दिनों दुनिया के 60 वैज्ञानिक जुटे। सभी वैज्ञानिकों के बीच वोटिंग हुई और किलोग्राम के सबसे बड़े पैमाने और मानक को रिटायर किया गया। यानि अब जब आप सामान खरीदने बाजार जाएंगे और एक किलो सामान खरीदेंगे तो हम आपको बता दें कि किलोग्राम का वजन अब बदल चुका है।
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वैसे मानक में हुए इस बदलाव का प्रभाव आम जनता पर नहीं पड़ेगा लेकिन विज्ञान के क्षेत्र में इसका गहरा प्रभाव पड़ेगा। आम लोगों के जीवन में इसका प्रभाव इसलिए नहीं पड़ेगा क्योंकि थोड़े से बदलाव के बाद एक किलोग्राम चावल में यदि एक चावल का दाना कम हो जाए तो उससे आम जनता पर तो कोई प्रभाव पड़ता दिखाई नहीं देता है लेकिन विज्ञान के क्षेत्र में ये छोटा सा बदलाव भी बहुत प्रभाव डालता है।
फ्रांस के वर्साइल्स में वजन और मापने की प्रक्रिया पर हुए एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में फैसला हुआ कि किलोग्राम को पारिभाषित करने का तरीका बदला जाए। इस दौरान वैज्ञानिकों ने ये फैसला लिया कि अब तौल की इकाई को परिभाषित करने के लिए विद्युत धाराओं से पैदा की गई ऊर्जा का इस्तेमाल किया जाएगा। नए पैमाने के तहत अब बिजली से पैदा हुई ऊर्जा से तौल के मानक की परिभाषा तय होगी।
प्लैटिनम से बना ली ग्रैंड है किलोग्राम का मानक
फ्रांस की राजधानी पेरिस में एक तिजोरी में किलोग्राम को मापने वाली 129 साल पुराना एक माप रखा है। जिसे ली ग्रैंड कहा जाता है। प्लैटिनम से बना ली ग्रैंड ही इंटरनेशनल प्रोटोकॉल किलोग्राम माना जाता है। जो कि एक किलो के सटीक बाट की तरह है।
अब इसका हो रहा है क्षरण जिसकी वजह से हुआ मानक में बदलाव
अब इस बाट का क्षरण हो रहा है। कुछ साल पहले ही इसमें 30 माइक्रोग्राम की कमी आई है। यह कमी चावल के एक दाने जितनी है। वैज्ञानिकों ने यह भी फैसला लिया है कि माप के लिए प्राकृतिक वस्तुओं का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। साथ ही माना ये भी जा रहा है कि मई 2019 के बाद मीटर और सेकेंड समेत अन्य इकाइयों के मानकों में भी बदलाव किया जाएगा।
कुछ ऐसा रहा है किलो का सफर
- किलोग्राम को साल 1889 से ही ली ग्रैंड के नाम से परिभाषित किया जा रहा है। इसे इंटरनेशनल ब्यूरो ऑफ वेट एंड मेजर के हेडक्वार्टर में रखा गया है।
- ली ग्रैंड से वजन पहले के मुकाबले नहीं हो पा रहा था। इसके तीन ग्लास बेल जार में धूल मिट्टी के कण और वातावरण के कारण फर्क पड़ा है। इसमें सफाई की जरूरत है, जिससे इसके मास पर असर पड़ सकता है।
- वैज्ञानिकों ने एम्पियर (इलेक्ट्रिक करंट) और कैल्विन (थरमोडायनामिक टेमपिरेचर) की परिभाषा को अपटेड करने के लिए भी वोट किया है।
ये होंगी नई गणना-
अंतरराष्ट्रीय मात्रक प्रणाली में किलो सात बेसिक यूनिट्स में से एक है
उनमें से चार हैं- किलो, एंपियर (विद्युत प्रवाह), केल्विन (ताप) और मोल (पार्टिकल नंबर) किलोग्राम अंतिम एसआई बेस यूनिट है जो अभी तक एक फिजिकल ऑब्जेक्ट द्वारा परिभाषित है।
- किलोग्राम (किग्रा)
गणना: मास
आवश्यकता पड़ती है: पलैंक्स कॉन्सटेंट (ली ग्रैंड)
परिभाषा: किलोग्राम भार की SI इकाई है। यह एक किलोग्राम भार के बराबर है, जो कि एक लीटर जल के भार के एकदम बराबर है। यह इकलौती SI इकाई है, जिसका उपसर्ग किलो, उसके नाम का भाग है।
- एम्पियर (ए)
गणना: करंट
आवश्यकता पड़ती है: इलेक्ट्रॉन पर चार्ज
परिभाषा: एम्पियर, लघु रूप में विद्युत धारा, या विद्युत आवेश की मात्रा प्रति सेकेंड की इकाई है। एम्पियर SI की मूल इकाई है और इसका नाम विद्युतचुम्बकत्व को खोजने वाले वैज्ञानिक आंद्रे-मैरी एम्पीयर के नाम पर रखा गया है।
- कैल्विन (के)
गणना: तापमान
आवश्यकता पड़ती है: बेल्ट मेंस कॉन्सेंट
परिभाषा: कैल्विन तापमान की मापन इकाई है। यह सात मूल इकाईयों में से एक है। कैल्विन पैमाना ऊष्मगतिकीय तापमान पैमाना है, जहां, परिशुद्ध शून्य, पूर्ण ऊर्जा की सैद्धांतिक अनुपस्थिति है, जिसे शून्य कैल्विन भी कहते हैं।
- मोल (एमओएल)
गणना: पदार्थ की मात्रा
आवश्यकता पड़ती है: आवोगाद्रो कॉन्सटेंट
परिभाषा: मोल एक एसआई मूल इकाई है, जो पदार्थ की मात्रा मापन करता है। यह एक गण्य इकाई है। एक मोल में एवोगाद्रो संख्या के बराबर (लगभग 6.02214×1023) परमाणु, अणु, अन्य आरम्भिक कण होते हैं।
भारत के पास भी है ल ग्रैंड के
भारत के पास भी इस ‘ल ग्रैंड के’ की एक आधिकारिक कॉपी है जो दिल्ली के नेशनल फिजिकल लैबोरेटरी में रखा हुआ है। ये भारत का सबसे सही नाप वाला किलो माना जाता है। समय-समय पर इसे पेरिस माप के लिए भेजा जाता है।
क्या है ली ग्रैंड और कैसे बना है
'ली ग्रैंड के' लंदन में निर्मित 90 प्रतिशत प्लेटिनम और दस प्रतिशत इरिडियम से बना 4 सेंटीमीटर का एक सिलेंडर है, जो पश्चिमी पेरिस के सीमांत सेवरे में इंटरनेश्नल ब्यूरो ऑफ वेट्स एंड मेजर्स (बीआईपीएम) के वॉल्ट में साल 1889 से बंद है।
क्योंकि फिजिकलऑब्जेक्ट आसानी से परमाणु को खो सकते हैं या हवा से अणुओं को अवशोषित कर सकते हैं, इसी कारण इसकी मात्रा माइक्रोग्राम में दसियों बार बदली गई थी। इसका मतलब है कि किलोग्राम और स्तर मापने के लिए दुनिया भर में प्रोटोटाइप का उपयोग किया जाता है, जो कि एकदम सही अशुद्धि बताता है
सामान्य जीवन में इस तरह के मामूली बदलाव दिखाई भी नहीं देते, लेकिन एकदम सटीक वैज्ञानिक गणनाओं के लिए ये एक बड़ी समस्या रही है।
क्या होगा नया किलोग्राम
भविष्य में किलोग्राम को किब्बल या वाट बैलेंस का उपयोग करके मापा जाएगा। एक ऐसा उपकरण जो यांत्रिक और विद्युत चुम्बकीय ऊर्जा का उपयोग करके सटीक गणना करता है। ऐसा होने के बाद किलोग्राम की परिभाषा न बदली जा सकेगी और न ही इसे कोई नुकसान पहुंचाया जा सकेगा। ये न केवल फ्रांस में बल्कि दुनिया में कहीं भी वैज्ञानिकों को एक किलो का सटीक माप उपलब्ध करवाएगा।
यूके के राष्ट्रीय मानक प्रयोगशाला के शोध निदेशक और ब्रिटेन में पैमाइश मानकों के उत्तरदायी थिओडोर जैनसेन कहते हैं, "वैज्ञानिक पैमाइश में एसआई को पुन: परिभाषित करना एक यादगार क्षण है। एक बार लागू होने के बाद सभी एसआई यूनिट फंडामेंटल कंस्टेंट की प्रकृति पर आधारित होंगी, जिसके मायने हमेशा के लिए तय हो जाएंगे और ये और भी अधिक सटीक पैमाइश कर पाएगा।