North Korea: कुर्सी से उठते ही तानाशाह की टीम करती है उसे साफ, किम जोंग से जुड़ी हर चीज पर ऐसी निगरानी क्यों?
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें किम जोंग के साथ आए स्टाफ को उनकी एक बैठक के बाद कमरे में मौजूद चीजों की सफाई करते देखा जा सकता है।
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विस्तार
किम जोंग-उन चीन के बीजिंग पहुंचे हैं, जहां उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध से जुड़ी सैन्य परेड में हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम से इतर किम ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात की। रिपोर्ट्स की मानें तो वायरल वीडियो इसी बैठक के बाद का है। वीडियो को एक रूसी पत्रकार एलेक्जेंडर युनाशेव ने अपने टेलीग्राम पर साझा किया था। इसमें उत्तर कोरियाई अधिकारियों को बैठक वाली जगह पर किम जोंग की कुर्सी के पीछे के हिस्से को साफ करते और उनके व्हिस्की ग्लास और ट्रे को हटाते देखा जा सकता है।
🤡 All traces of Kim Jong Un were wiped away after his talks with Putin
— NEXTA (@nexta_tv) September 3, 2025
They took the glass the dictator drank from and thoroughly wiped down the chair he had been sitting in. pic.twitter.com/eTf7f4FAZu
इतना ही नहीं स्टाफ का एक और सदस्य किम की कुर्सी के पाए और हैंडरेस्ट को भी साफ करता है। इसके अलावा उनके सामने रखी टेबल से भी निशान मिटाए जाते हैं। युनाशेव के मुताबिक, पुतिन-किम की बातचीत के बाद उनके साथ पहुंचे स्टाफ ने बैठक स्थल से उनकी मौजूदगी के सारे सबूत हटा दिए।
हाल ही में जापानी अखबार निक्केई ने सूत्रों के हवाले से दावा किया था कि उत्तर कोरिया ने चीन जाने से पहले ही किम जोंग-उन के लिए एक नया बाथरूम तैयार किया है, जिसमें और किसी को जाने की अनुमति नहीं है। इसके अलावा उनके साथ मौजूद गार्ड्स को किम के सभी निशान मिटाने की जिम्मेदारी दी गई थी।
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बताया जाता है कि इस पूरे एहतियात की वजह यही है कि किम जोंग-उन का डीएनए किसी भी हालत में लीक न हो पाए। दरअसल, किम के डीएनए के विश्लेषण से दूसरे देश उनके स्वास्थ्य की स्थिति को लेकर अहम जानकारी हासिल कर सकते हैं। ऐसा न सिर्फ उत्तर कोरियाई तानाशाह के मल-मूत्र के जरिए किया जा सकता है, बल्कि उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए ग्लास, कप, खाने की प्लेट, आदि से भी उनकी लार के सैंपल हासिल किए जा सकते हैं। चूंकि, लार और मल-मूत्र इंसानों के जैविक अंश यानी डीएनए का हिस्सा लिए होते हैं, इसलिए इनका दूसरे देशों के पास जाना उनके लिए जानकारी का बड़ा स्रोत हो सकता है।
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इतना ही नहीं इंसानी डीएनए और उसके फिंगरप्रिंट्स जानकारी का भी अहम खजाना होता है। कई विश्लेषकों का दावा है कि दुश्मन देश किम जोंग-उन की जासूसी के लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं। दरअसल, उत्तर कोरिया के तानाशाह दुश्मनों से बचने के लिए अपने साथ जैसे दिखने वाले बहरूपियों को लेकर भी चलते हैं, ताकि असल किम जोंग-उन किसी खतरे की स्थिति में सुरक्षित रहें। हालांकि, उनके डीएनए और फिंगर प्रिंट्स दुश्मन के हाथ लगने से किम की गतिविधियों को ट्रैक किया जा सकता है, जो कि बड़ा खतरा हो सकता है।
1. किम जोंग-उन जिन होटल रूम में ठहरते हैं, वहां यह सुनिश्चित किया जाता है कि उनके डीएनए का कोई भी हिस्सा कमरे से बाहर न जाए। इसके लिए उनके मल-मूत्र को इकट्ठा कर बाद में उत्तर कोरिया ले जाकर नष्ट किया जाता है।
2. उत्तर कोरिया के तानाशाह की लार से उनका डीएनए लीक न हो, इसके लिए उनके साथ मौजूद अधिकारी उनके सिगरेट बट को इकट्ठा करते हैं और एश ट्रे को भी साथ ले जाते हैं। यहां तक कि माचिस को भी कहीं नहीं फेंका जाता।
4. किम जब दूसरे देशों में सम्मेलनों में हिस्सा लेते हैं, तब किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर के लिए भी वे मेजबान के दिए हुए पेन नहीं लेते, बल्कि अपने अधिकारियों के दिए हुए पेन ही प्रयोग करते हैं। इससे उनके फिंगरप्रिंट्स को सुरक्षित रखा जाता है।