{"_id":"5d3222668ebc3e6cb12e9b13","slug":"no-us-aid-for-pakistan-as-decisive-action-against-terror-pending","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को अमेरिकी दौरे से पहले लगा करारा झटका","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को अमेरिकी दौरे से पहले लगा करारा झटका
Sat, 20 Jul 2019 01:34 AM IST
संदीप भट्ट
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: संदीप भट्ट
Updated Sat, 20 Jul 2019 01:34 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को अमेरिकी दौरे से पहले करारा झटका लगा है। अमेरिका कड़े शब्दों में कहा है कि लश्कर-ए-ताइबा और अल कायदा के आतंकियों के खिलाफ पाक ठोस और निर्णायक कार्रवाई करे वर्ना उसे अमेरिका से सुरक्षा सहायता पर लगी रोक बरकरार रहेगी।
विज्ञापन
दरअसल, पाकिस्तान ने मुंबई हमले के मास्टरमाइंड आतंकी हाफिज सईद को गिरफ्तार कर अमेरिका को खुश करने की कोशिश तो बहुत की, मगर अमेरिका इस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जनवरी, 2018 में ही पाक को मिलने वाली सुरक्षा सहायता पर रोक लगा दी थी। ट्रंप प्रशासन काल के दौरान यह किसी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री का पहला उच्चस्तरीय दौरा होगा। माना जा रहा है कि पाक पीएम का यह दौरा दोनों देशों के रिश्तों में नई जान फूंकने जैसा होगा।
विज्ञापन
कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस (सीआरएस) ने पाकिस्तान पर एक नई रिपोर्ट में कहा, पाकिस्तान कई इस्लामी चरमपंथियों एवं आतंकी समूहों का पनाहगाह है और पाक की कई सरकारों ने इन आतंकी समूहों को बर्दाश्त किया। इनमें से कई आतंकी समूहों नेे पाकिस्तान के उसके पड़ोसियों के साथ ऐतिहासिक लड़ाईयों में नुमाइंदगी भी की है। 15 जुलाई को पेश की गई इस रिपोर्ट में कहा गया कि ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान पर पहले की सरकारों के मुकाबले ज्यादा सख्त रुख अपनाया है और वित्तीय मदद में कटौती करने और सुरक्षा संबंधित सहायता रोकने जैसे कदम उठाए हैं।
विज्ञापन
लश्कर और आईएस अब भी सक्रिय
रिपोर्ट के मुताबिक, पाक में 2014 से चल रहे सैन्य अभियानों से घरेलू आतंकवाद में काफी कमी आई है। हालांकि, लश्कर जैसे खतरनाक आतंकी समूह वहां अब भी संचालित हो रहे हैं। अल कायदा और इस्लामिक स्टेट जैसे आतंकी संगठनों ने पांव पसार रखे हैं।
परमाणु युद्ध छिड़ने का खतरा