टीम बिना कोई चैंपियन नहीं: जरूरत पर मदद लेना कमजोरी नहीं, मजबूत सहयोगी होने के संकेत; सफल इंसान की पहचान क्या?
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मियामी तट के पास अटलांटिक महासागर की तेज लहरों में 86 वर्षीय मां पानी निगलकर बेहोश हो चुकी थी। फेफड़ों में भरता पानी और थमती सांसें। बेटी ने अपनी पूरी ताकत से हाथ-पैर मारकर मां को खींचने की कोशिश की, लेकिन समंदर की ताकत के आगे उसकी हर कोशिश नाकाम हो रही थी।
जब लगा कि दोनों डूब जाएंगे, तभी बेटी ने अपनी रणनीति बदली। एक हाथ से मां का सिर पानी के ऊपर रखा और दूसरा हाथ हवा में लहराते हुए पूरी ताकत से चीख पड़ी...मदद करो। रेस्क्यू बोट के प्रशिक्षित तैराकों ने तुरंत छलांग लगाई, दोनों को पानी से निकाला और समय पर अस्पताल पहुंचाया। यह दास्तान किसी आम इंसान की नहीं, बल्कि जुनून और दृढ़ संकल्प पर दुनिया की सबसे चर्चित बेस्टसेलर किताब लिखने वाली प्रसिद्ध साइकोलॉजिस्ट डॉ एंजेला डकवर्थ की है। डकवर्थ लिखती हैं, उस दिन मेरी और मां की जान समंदर की लहरों से अकेले लड़ने से नहीं बची, बल्कि सही समय पर मदद की गुहार लगाने से बची।
अकेले जीतने का भ्रम
समाज में थॉमस एडिसन के हजारों प्रयोगों या स्टीव जॉब्स के अकेले दम पर क्रांति लाने की कहानियां गढ़कर लोगों को यह सिखाया जाता है कि हर मुश्किल से अकेले जूझना ही मर्दानगी या असली कामयाबी है।
- रिसर्च का निष्कर्ष : दुनिया के शीर्ष सफल लोगों का गहन अध्ययन करने के बाद डकवर्थ कहती हैं, शीर्ष स्तर के सफल लोगों ने अपनी सफलता का श्रेय उन लोगों को दिया जिन्होंने मुश्किल वक्त में उनका हाथ थामा।
- मदद मांगना कमजोरी नहीं : रिसर्च से साबित हुआ है कि जो लोग सलाह और सहयोग मांगने में संकोच नहीं करते, वे अकेले जूझने वालों के मुकाबले कई गुना ज्यादा तेजी से सीखते हैं।
सफल इंसान की असली पहचान 04 व्यावहारिक कदम
| पुरानी सोच (अकेले लड़ना) | सहयोग का आधुनिक मॉडल |
| न समझ आने पर भी चुपचाप बैठे रहना | क्लास या मीटिंग में हाथ उठाकर दोबारा पूछना |
| परेशानी में खुद को कमरे में बंद कर लेना | गुरु या बॉस से बिना झिझक सलाह मांगना |
| काम खुद करने की जिद में थक जाना | टीम से कहना कि मैं इस समस्या पर अटक गया हूं |
| मदद मांगने को दूसरों पर बोझ मानना | यह समझना कि लोग मदद करके ज्यादा खुश होते हैं |
ग्लोबल लीडर ने माना...अकेले हम कुछ भी नहीं
- सबसे बड़े वेल्थ फंड के सीईओ निकोलाई टैंगेन: निकोलाई अपनी लीडरशिप किताब में अपनी निजी खूबियों से ज्यादा अपनी असिस्टेंट ग्रेटे स्टारहाइम की भूमिका को विस्तार से दर्ज करते हैं। निकोलाई कहते हैं, मैं उस पर आंख मूंदकर भरोसा करता हूं। जब वह कहती है कि मैं गलत हूं, तो मैं अपनी गलती मान लेता हूं। क्या यह स्वीकार करने में कोई शर्म है कि हमें दूसरों की मदद की जरूरत है?
- कोनन ओ'ब्रायन की हार्वर्ड स्पीच : प्रसिद्ध टीवी होस्ट कोनन ओ'ब्रायन ने हार्वर्ड के दीक्षांत समारोह में कहा था, अगर मैं आज उन सभी लोगों को यहां बुला लूं जिन्होंने मुझे इस मुकाम तक पहुंचाने में मदद की है, तो पूरा शहर खचाखच भर जाएगा।
दुनिया की सबसे बड़ी स्टार्टअप इनक्यूबेटर फर्म वाय काम्बिनेटर कभी भी एक सस्थापक को फंड देने से बचती है। वह सह-संस्थापकों की टीम को चुनती है। फर्म के मुखिया पॉल ग्राहम के अनुसार, चाहे आप सारा काम खुद करने में सक्षम हों, फिर भी आपको ऐसे साथियों की जरूरत होती है जो गिरते वक्त आपका हौसला बढ़ा सकें।